होम्योपैथी की जितनी भी दवाईयां बनायीं जाती है वह सभी दवाईयाँ मे अल्कोहल मिलाकर बनाया जाता है जिस कारण से होम्योपैथी दवाईया खाने मे कड़वी या फिर कसौली लगती है इसलिए होम्योपैथी दवाईयो मे गन्ने से तैयार गोलियों या फिर शर्करा युक्त गोलियां बनायी जाती है और होम्योपैथिक दवाईयो के साथ गन्ने से तैयार गोलियों यानि दोनों गोलियों एक साथ मिक्स करके खाया जाता है जिससे की होम्योपैथी दवाईया खाने मे कड़वी नहीं लगे।
होम्योपैथी की दवा मीठी क्यों होती है?
@setukushwaha4049 | Posted on October 17, 2022
@vandnadahiya7717 | Posted on October 17, 2022
दोस्तों आप ने होम्योपैथी के बारे में सुना ही होगा। होम्योपैथी का उद्देश्य किसी भी बीमारी को जड़ से खत्म करना होता है पर क्या आप जानते है कि होम्योपैथी के दौरान दी जाने वाली गोलियां मीठी क्यों होती हैं यदि आपको नहीं पता तो हम आपको बताएंगे। होम्योपैथिक के जाने वाली गोलियों में एल्कोहल की मात्रा मिली होती है जिसे उसका स्वाद कड़वा होता है इसीलिए इन्हें शर्करा या गन्ने शर्करा से तैयार किया जाता है इसी करण गोलिया मीठी बनाई जाती है और
मीठी गोलियों के साथ मरीज को खाने के लिये भी दिया जाता है।
आइए दोस्तों आज हम आपको बताते हैं कि होम्योपैथी की दवाइयां मीठी क्यों होती है बात यह है कि होम्योपैथिक दवाई अल्कोहल मिलाकर तैयार की जाती है जिस वजह से इनका स्वाद काफी कसैला और कड़वा होता है इतना ही नहीं कई बार अल्कोहल की मात्रा यदि अधिक हो जाती है तो मुंह में छाला पड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है यही वजह है कि इन्हीं गन्ने के रस के साथ मिलाकर मरीज को दिया जाता है इसलिए होम्योपैथी दवाइयों का स्वाद मीठा होता है। और सभी लोग मीठे होने की वजह से इन दवाइयों का सेवन भी कर लेते हैं।





