चलिए हम आपको बताते हैं कि भारतीय पुलिस वर्दी का रंग खाकी ही क्यों होता है :-
मैं आपको बता दूं कि जब हमारे भारत देश में ब्रिटिशर्स का शासन था तब उस समय भारतीय पुलिस के वर्दी का रंग सफेद रंग हुआ करता था।और वर्दी का रंग सफेद होने के कारण जब पुलिस से ड्यूटी में हुआ करती थी तो वर्दी पर चाय के दाग़, धूल मिट्टी,या अन्य प्रकार के दाग धब्बे लगने से वर्दी जल्दी गंदी हो जाती थी।जिस वजह से वर्दी को रोजाना धोना पड़ता था।और कर्मचारी काफी तंग हो जाते थे।जिस वजह से पुलिसकर्मियों की शिकायत हमेशा बनी रहती थी। और फिर वर्दी का रंग बदलने का फैसला किया गया।वर्दी का रंग बदलने के लिए डाई का इस्तेमाल किया गया। और फिर वर्दी का रंग सफेद की जगह खाकी कर दिया गया।
चलिए जानते हैं की वर्दी का रंग बदलने के लिए किस चीज का इस्तेमाल किया गया था:-
बताया जाता है कि उसे समय वर्दी के रंग को बदलने के लिए चाय की पत्तियां या कॉटन फैब्रिक कलर का इस्तेमाल किया गया था।ताकि वर्दी के रंग को खाकी में बदला जा सके।और फिर यह रंग पुलिस के आला अधिकारी सर हैरी लैंसडेन को काफी पसंद आया। क्योंकि खाकी रंग में पहले की तुलना में धूल मिट्टी बहुत ही कम दिखाई दे रही थी।इतना ही नहीं पुलिस कर्मियों को यह रंग देखने में भी काफी आकर्षित लग रहा था। इसी वजह से पुलिस कर्मियों की वर्दी का रंग खाकी कर दिया गया।
मैं आपको बता दूं की सन 1847 में पहली बार खाकी रंग की वर्दी पहनी गई थी। और इस वर्दी को पहनने वाले पहले व्यक्ति सर हैरी लैंसडेन थे जो की एक अधिकारी के पद पर कार्यरत थे।इसके बाद पूरे भारत देश में खाकी रंग की वर्दी का प्रचलन हो गया और सभी पुलिस वाले खाकी रंग की वर्दी पहनने लगे।




