उज्जैन भारतीय राज्य मध्य प्रदेश का पांचवा सबसे बड़ा शहर है। यह एक अत्यंत प्राचीन शहर है, उज्जैन शिप्रा नदी के किनारे बस नगर है। उज्जैन के गौरव महाकाल है। उज्जैन के राजा महाकालेश्वर को मना जाता हैं। उज्जैन नगरी के श्री महाकालेश्वर भारत में 12 प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं। उज्जैन नगरी महाकाल के भस्म आरती के लिए प्रसिद्ध मानी जाती है। महाकालेश्वर पर भस्म आरती चढ़ाने की परंपरा है यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग पर रोज सुबह शिवजी की आरती भस्म से की जाती है। भस्म आरती से ही भगवान महाकाल का श्रृंगार किया जाता है। यहां हर 12 वर्ष पर सिंहस्त महाकुंभ का मेला लगता है, जहां लाखों हजारों की भीड़ में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं। उज्जैन को 'महाकाल की नगरी' के नाम से भी जाना जाता है।
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव ने यहां दूषण नामक राक्षस का वध कर अपने भक्तों की रक्षा की थी। इसके बाद भक्तों के निवेदन के बाद भोले बाबा यहीं पर विराजमान हो गए उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से तीसरा ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यहां महाकाल मंदिर के ऊपर गर्भग्रह में ओंकारेश्वर शिव की मूर्ति प्रतिष्ठित है। गर्भ ग्रह के पश्चिम,उत्तर और पूर्व में भगवान श्री गणेश, माता पार्वती और, श्री कार्तिकेय के चित्र स्थापित है। साथ ही दक्षिण में नंदीबाबा की प्रतिमा है। प्राचीन काल में उज्जैन नगर कई नाम से प्रचलित था। जिनमें अवंतिका, उज्जैनीय, विशाला, प्रतिकल्पा, कुमुदवाती, स्वर्णशृंगा, अमरावती आदि अनेक नाम से जाना था। यहां कई तीर्थ स्थल है.उज्जैन नगर प्राचीन काल से ही भारत के एक महान तीर्थ स्थल के रूप में विकसित रहा है। यह महान सम्राट विक्रमादित्य की राजधानी भी रही हैं। उज्जैन को कालिदास की नगरी के नाम से भी जाना जाता था। इसीलिए उज्जैन नगरी इतनी प्रसिद्ध है।


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