दोस्तों आप सभी जानते हैं की गंगा को ब्रह्मदेव की पुत्री के नाम से जानते हैं,क्योंकि गंगा की उत्पत्ति ब्रह्मदेव के कमंडल से हुई थी। गंगा एक पवित्र नदी मानी जाती है।ऐसा कहा जाता है कि अगर कोई व्यक्ति पाप करता है और वह पापी है।अगर वह पापी एक बार आकर गंगा में स्नान कर लेता है तो उसके सारे पाप धुल जाते हैं। दोस्तों आप सभी जानते ही हैं कि गंगा को ब्रह्मा की पुत्री के नाम से जानते हैं पर क्या आप जानते हैं कि ब्रह्मा अपनी पुत्री को श्राप भी दिए थे और वह श्राप क्यों दिए थे। अगर आपको नहीं पता है तो चलिए मैं आपको बताती हूं कि ब्रह्मा ने अपनी पुत्री गंगा को श्राप क्यों दिए थे।
एक बार ब्रह्मा के दरबार में सभी देवगढ तथा अनुयायी उपस्थित थे तथा वहां पर उनकी पुत्री गंगा भी मौजूद थी। दरबार में सभी लोग प्रार्थना मुद्रा में थे तो अचानक हवा आती है और उस हवा के आने से ब्रह्मा की पुत्री गंगा का पल्लू उनके शरीर थोड़ा सरक जाता है। यह देख कर दरबार में मौजूद सभी लोग अपना सर झुका लेते हैं लेकिन महाभिष ऐसा नहीं करते हैं बल्कि वह गंगा को देखते रहते हैं और गंगा भी उन्हें देखने से नहीं रोकती है और उनकी तरफ देखती रहती है। इस तरह दोनों ही एक दूसरे की तरफ देखते रहते हैं।यह सब कुछ ब्रह्मा जी देख लेते हैं और यह सब देखते ही ब्रम्हा जी बहुत क्रोधित होते हैं और इतना क्रोध होते हैं कि वह अपनी पुत्री गंगा और महाभिष को श्राप देते हैं कि तुम दोनों धरती पर मनुष्य की तरह जन्म लोगे। इस प्रकार गंगा और महाभिष धरती पर जन्म लेते हैं। धरती पर गंगा, गंगा के रूप में जन्म लेती है और महाभिष शांतनु के रूप में धरती पर जन्म लेते हैं।


