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Updated on Mar 18, 2024others

गंगा को ब्रह्मा ने श्राप क्यों दिया था?

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Modern India Explorer
Answered on Mar 14, 2024

दोस्तों आप सभी जानते हैं की गंगा को ब्रह्मदेव की पुत्री के नाम से जानते हैं,क्योंकि गंगा की उत्पत्ति ब्रह्मदेव के कमंडल से हुई थी। गंगा एक पवित्र नदी मानी जाती है।ऐसा कहा जाता है कि अगर कोई व्यक्ति पाप करता है और वह पापी है।अगर वह पापी एक बार आकर गंगा में स्नान कर लेता है तो उसके सारे पाप धुल जाते हैं। दोस्तों आप सभी जानते ही हैं कि गंगा को ब्रह्मा की पुत्री के नाम से जानते हैं पर क्या आप जानते हैं कि ब्रह्मा अपनी पुत्री को श्राप भी दिए थे और वह श्राप क्यों दिए थे। अगर आपको नहीं पता है तो चलिए मैं आपको बताती हूं कि ब्रह्मा ने अपनी पुत्री गंगा को श्राप क्यों दिए थे।

 

एक बार ब्रह्मा के दरबार में सभी देवगढ तथा अनुयायी उपस्थित थे तथा वहां पर उनकी पुत्री गंगा भी मौजूद थी। दरबार में सभी लोग प्रार्थना मुद्रा में थे तो  अचानक हवा आती है और उस हवा के आने से ब्रह्मा की पुत्री गंगा का पल्लू उनके शरीर थोड़ा सरक जाता है। यह देख कर दरबार में मौजूद सभी लोग अपना सर झुका लेते हैं लेकिन महाभिष ऐसा नहीं करते हैं बल्कि वह गंगा को देखते रहते हैं और गंगा भी उन्हें देखने से नहीं रोकती है और उनकी तरफ देखती रहती है। इस तरह दोनों ही एक दूसरे की तरफ देखते रहते हैं।यह सब कुछ ब्रह्मा जी देख लेते हैं और यह सब देखते ही ब्रम्हा जी बहुत क्रोधित होते हैं और इतना क्रोध होते हैं कि वह अपनी पुत्री गंगा और महाभिष को श्राप देते हैं कि तुम दोनों धरती पर मनुष्य की तरह जन्म लोगे। इस प्रकार गंगा और महाभिष धरती पर जन्म लेते हैं। धरती पर गंगा, गंगा के रूप में जन्म लेती है और महाभिष शांतनु के रूप में धरती पर जन्म लेते हैं।

 

 

 

Letsdiskuss

 

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Answered on Mar 17, 2024

सही कहा आपने हमारे भारत देश में गंगा नदी को देवी के रूप में पूजा की जाती है। मैं आपको बता दूं की गंगा नदी ब्रह्मा देव जी के कमंडल से प्रकट हुई थी जिन्हें गंगा नदी के नाम से पुकारने लगे और लोग इन्हें ब्रह्मा की पुत्री कहने लगे। खैर अब हम आपके यहां पर बताने वाले हैं कि गंगा जी को ब्रह्मदेव ने क्यों श्राप दिया था।

 

तो चलिए जानते हैं कि क्यों ब्रह्मा जी ने गंगा जी को दिया था श्राप :-

 

एक पौराणिक कथा में बताया जाता है कि एक दिन ब्रह्मदेव के दरबार में सभी देवताओं को बुलाया गया था और वहां पर ब्रह्मदेव की पुत्री यानी की मां गंगा भी मौजूद थी। और इसके बाद सभी देवता एक साथ आंखें बंद करके  प्रार्थना करने लगे तभी अचानक से हवा का झोंका आता है और मां गंगा का वस्त्र थोड़ा ऊपर की ओर उठ जाता है तो मां गंगा की इस स्थिति को देखकर सभी देवगण अपनी आंखों को नीचे कर ली थी। लेकिन गंगा और महाभिस एक दूसरे को देखते रहे और यह सब ब्रह्मा जी से देखा नहीं गया तो वह क्रोधित हो गए और क्रोध में उन्होंने श्राप देते हुए कहा कि तुम फिर मृत्यु लोक में जन्म लोगे और गंगा तुम्हारी विपरीत आचरण करेगी। और फिर माता गंगा और महाभिष धरती पर जन्म लेते हैं। और जब मां गंगा का जन्म धरती पर होता है तो वह गंगा नदी का रूप धारण कर लेती है। और महाभिष शांतनु के रूप में जन्म लेते हैं।

 इस प्रकार मैंने आपको यहां पर पूरी जानकारी दे दी है कि ब्रह्मदेव ने माता गंगा को श्राप क्यों दिया था। यदि आपको जानकारी पसंद आई हो तो आप हमारे द्वारा लिखे गए आर्टिकल को एक बार पूरा अवश्य पढ़े।

 

 

 

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