Avinash Kumar
Avinash Kumar· 4 साल पहले
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बदलते वक़्त के साथ तरीके भी बदल जाते है इसका क्या उदहारण है?

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जवाब दिया गया12/28/22

दोस्तों वक्त के साथ इंसान भी बदलता है बदलते वक्त के साथ इंसानों की परिस्थितियां भी बदलती हैं यदि आज इंसान खुश है कल क्या पता खुशी हो या ना हो इसीलिए बदलते वक्त के साथ तरीके भी बदल लेना बेहद जरूरी है यदि कोई व्यक्ति किसी के प्यार में हैं और वह इंसान उसे छोड़कर चला जाता है तू उसकी याद में इंसान अपनी पूरी जिंदगी नहीं बता सकता। इसलिए उसे बदलते वक्त के साथ खुद को बदलना होगा तभी वह अपने जीवन में सफल हो पाएगा और अपने जीवन में कुछ कर पाएगा।

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जवाब दिया गया12/27/22

बदलते समय के साथ इंसान को भी बदलना बहुत जरूरी होता है। क्योंकि,बदलते वक्त के साथ इंसान की परिस्थितियां भी बदलती है और इन्हीं परिस्थितियों को अच्छा करने के लिए इंसान को भी उन्हीं के समान बदलना पड़ता है। उदाहरण के लिए अगर कोई इंसान किसी से प्रेम करता है और उसका बैकअप हो जाए तो उस व्यक्ति को समय के साथ अपने आप को बदलना ही पड़ता है। क्योंकि, उसको पता रहता है कि अब वह उसकी किस्मत में नहीं है और उसे उसके बिना ही आगे बढ़ना है।लेख की तस्वीर

preeti  patel
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जवाब दिया गया12/24/22

सबसे पहले समय बदलता है और बदलते समय के साथ परिस्थितयां बदलती है और इन्ही परिस्थितियों के साथ इंसान भी बदल जाता है,जो भी हमारे आस -पास की सभी चीजे बदलने लगती है। कभी- कभी समय की मांग होती है इंसान को न चाहते हुए भी समय के अनुसार बदलना पड़ता है कभी हम खुशी-ख़ुशी बदल जाते है तो कभी-कभी हम मजबूरी में हमें बदलना ही पड़ता है, जीवन मे परिस्थितियों के अनुसार जीवन का चक्र घूमता रहता है।लेख की तस्वीर

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Mp

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जवाब दिया गया03/27/22

बदले वक्त के साथ ही तरीके इसलिए बदल जाते हैं क्योंकि इस दुनिया में हर चीज समय के अनुसार बदलती है। दुनिया की भौगोलिक अवस्था भी धीरे-धीरे बदलती रहती है सभी हिमालय के पास बहुत बड़ा सागर था आज वही सागर हिमालय पर्वत के रूप में खड़ा हो गया है. इसी तरह इंसान भी समय के अनुसार और समाज की सोच के अनुसार स्वयं को बदलता है। इसलिए वक्त के बदलने के साथ जो बदलता नहीं है वह सरवाइव नहीं कर पाता है इसी तरह से एक एग्जांपल है डायनासोर का जो समय के साथ खुद को बदल नहीं सका और छोटे जानवर आज धरती पर राज कर रहे हैं.

बदलाव के लिए प्रेरित करने वाले 40 अनमोल विचार - धाकड़ बातें

Rinki Pandey
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जवाब दिया गया10/11/18
हर त्यौहार की तरह दुर्गा पूजा भी वस्तुओं तक सीमित हो गयी है, जो सभी के लिए एक पूर्ण व्यवसाय में बदल रहा है। ऐसा नहीं है कि इसमें कुछ भी गलत है; आखिरकार, यह केवल मजदूर वर्ग को आर्थिक रूप से समर्थन दे रहा है। जब नए कपड़े खरीदते हैं, एक विशाल मूर्ति प्राप्त करते हैं और विसर्जन के दौरान यातायात को बाधित करते हैं तो बेतुकापन लगभग अनिवार्य माना जाता है।

पैसे नहीं है? आपको फिर भी नए कपड़े खरीदने की जरूरत है।

मूर्ति के लिए पैसा और जगह नहीं है? फिर भी,खरीदो, आखिर शर्मा जी भी तो लाये हैं |

क्या यह यातायात को बाधित कर रहा है और नियमित जीवन को रोकने वाले लोगों को भी रोक रहा है? ऐसा कहकर आप धार्मिक भावनाओं को चोट पहुँचाते हैं।

यह तब नहीं था जब मैं बढ़ी हो रही थी। उत्सव में ऐतिहासिक प्रासंगिकता थी। हम एक पारंपरिक और मापे गए तरीके से उत्साहित होते थे जो हमारे बजट, पसंद और मानदंडों के अनुसार होता था | यह उत्सव परिवार के साथ-साथ पड़ोस के लोगो के साथ हंसी ख़ुशी मनाया जाता था | खुशी छोटी छोटी चीज़ो से आती थी जैसे, सुबह सुबह उठना, आरती करना और मिठाई तैयार करना।


आज, दुर्गा पूजा के हर पहलू को भौतिक चीज़ो पर आधारित कर दिया गया है | जोकि बेकार है!
नवरात्रि में डांडिया खेलना एक सेल्फी गेम बन गया है। पिछले साल, मैंने सचमुच डांडिया से ज़्यादा लोगो के हाथ में फ़ोन देखा । कुछ लोग ऐसे थे जो अपना ही लाइव टेलीकास्ट करने में लगे हुए थे |

मैं इस साल के लिए पहले से ही डर रही हूँ। Musically और Tik-tok मुख्यधारा में चल रहा है। मुझे डर है की यह किशोर, पंडाल और डांडिया के साथ जाने क्या दृश्य प्रस्तुत करते दिखेंगे |

आजकल सब इसी के आधार पर होता है कि हम दूसरों की तुलना में क्या कर रहे हैं, हम दुसरो से अच्छे दिख रहे हैं या नहीं, और हमारी फोटो और वीडियो को कितने पसंद / दिल मिलते हैं।


यह किशोर और 20 के दशक के बच्चे अपनी इंस्टा परफेक्ट फोटो के अलावा यह कभी नहीं समझ सकते कि इन पंडालों की खूबसूरती कितनी मनमोहक है | वे मित्रों और अजनबियों के साथ डांडिया खेलने की खुशी कभी नहीं जान पाएंगे। वह खान- पान और फोटो खींचने के इस दशक में कभी भी रात भर अपने परिवार के साथ नाचने गाने की ख़ुशी महसूस नहीं कर पायंगे |

वे फल्गुनी पाठक के गीत सुनकर संगीत और नृत्य के रोमांच का, उसमे घुल जाने का उत्साह नही जान पायंगे |

हर पहलू से, वाणिज्यिक, आध्यात्मिक और अधिक तरहों से, जिस तरह से हम नवरात्रि और दुर्गा पूजा का जश्न मनाते हैं, वह बहुत बदल गया है।

देखिये, मैं उन बढ़े लोगो में से एक नहीं हूँ जो "इन युवा बच्चों" के बारे में शिकायत करते हैं। मैं नहीं हूँ ! मैं "मज़ा" की अपनी परिभाषा को दंडित नहीं कर रही हूं। मैं समझ चुकी हूँ कि यह सिर्फ इतना है कि, जब तुलना की जाये तो मैं एक दशक पहले नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान महसूस किए गए अनुभवों को दोबारा जीने के लिए सब कुछ न्योछावर करदूंगी । वह सब बहुत शुद्ध बहुत पारम्परिक था |

हालांकि चीज़े खराब नहीं है । त्यौहार तो त्यौहार हैं। उत्सव मनाने का तरीका पुराना हो या नया, हमेशा मजेदार होता है। और शायद मै भी डांडिया के बीच एक दो सेल्फी ले लुंगी ;)

Translated from English by Team Letsdiskuss
Prreeti Radhika Taneja
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जवाब दिया गया12/28/22

हर समय एक सा नहीं रहता है जिस तरह समय बदलते रहता है उसी तरह इंसान भी बदलते रहता है आज हम आपको बताएंगे कि बदलते वक्त के साथ तरीके भी बदल जाते हैं इसका एक अच्छा उदाहरण देंगे।

दोस्तों कहते हैं लेकिन हर इंसान कभी न कभी जरूर बदलता है लेकिन क्यों बदलता है चलिए जानते हैं इंसान के बदलने के पीछे का कारण होता है कि आप जिसके साथ जैसा करेंगे आगे चलकर आपको उसका परिणाम मिल ही जाएगा यदि आप किसी के साथ अच्छा करेंगे तो आपके साथ भी अच्छा होगा और यदि आप किसी के साथ गलत करेंगे तो आगे चलकर आपके साथ भी गलत ही होगा।लेख की तस्वीर

Krishna Patel
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