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Sks Jain

Updated on Jun 17, 2023entertainment

चुप रहना कितना जरूरी है?

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5 Answers

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Answered on Jun 19, 2021

मनुष्य के जीवन में कई बार ऐसी परिस्थिति आ जाती है। जब सब कुछ उसकी वाणी पर ही निर्भर करता है। ऐसे में हमेशा बुद्धि से काम लेना चाहिए वह कुछ परिस्थितियों में शांत रहना चाहिए। क्योंकि बोलने से हमारे व्यवहार और गुणों का पता चलता है। कभी-कभी हम बिना सोचे समझे ऐसा बोल देते हैं। जिससे लोगों को हमारी वाणी कर्कश लगने लगती है। काला तो कौवा भी होता है और कोयल भी। कौवा जब भी बोलता है उसकी आवाज हमें कर्कश सुनाई देती है। जब कोयल बोलती है उसकी आवाज हमें मीठी सुनाई देती है। जबकि कोयल बसंत ऋतु में Article image आने तक शांत रहती है और बसंत आजाने के बाद मधुर वाणी बोलती है। इसलिए सबको कोयल अच्छी लगती है। अगर हम कोयल नहीं बन सकते तो हमें खुद को कौवा बनने से रोकना होगा। जब भी बोलो मधुर बोलो क्योंकि गलत बोलने से चुप रहने में ही फायदा है।


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asif khan
Answered on Jun 22, 2021

1. मौन आंतरिक शांति प्रदान करता है।

क्या आपको याद है कि पिछली बार जब आप मौन में बैठे थे और अपनी सांसों की आवाज सुनी थी और अपनी आत्मा की शांति को महसूस किया था? ऐसे क्षण दुर्लभ होते हैं, लेकिन हमें इनकी आवश्यकता होती है, जैसे पानी या जिस हवा में हम सांस लेते हैं। अपने दिमाग को शांत करने के लिए दिन में कुछ मिनट निकालें, उन सभी महत्वहीन मुद्दों को छोड़ दें जिन्हें आप नियंत्रित नहीं कर सकते हैं और बस खुद को जाने दें। अपने शरीर के माध्यम से आंतरिक शांति को धोते हुए महसूस करें। मौन और एकांत के उपचार लाभों को महसूस करें।

2. मौन एक अलग स्तर पर संवाद करने में मदद करता है।
यह हमेशा मुझे चकित करता था कि कैसे मेरे पिताजी अपने सबसे अच्छे दोस्त के साथ घंटों मछली पकड़ने के लिए बैठ सकते थे, एक दूसरे से एक शब्द कहे बिना। मुझे लगा कि मौन में कुछ भरने की जरूरत है, नहीं तो पूरी स्थिति बहुत अजीब और असहज हो गई। केवल वर्षों बाद मुझे एहसास हुआ कि संचार के विभिन्न तरीके हैं। शब्द हमें सूचनाओं का आदान-प्रदान करने और कभी-कभी अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की अनुमति देते हैं। लेकिन मौन आत्माओं का संचार है।

किसी अन्य व्यक्ति के साथ चुपचाप बैठने और अपने और बाहरी दुनिया के साथ पूर्ण सामंजस्य में रहने के बारे में कुछ जादुई है।

3. मौन आत्म-खोज को बढ़ावा देता है।

बाह्य मौन को बनाए रखने का उद्देश्य आंतरिक मौन के विकास को प्रोत्साहित करना है। फिर भी बहुत से लोग अपनी आंतरिक आवाज को बाहरी बकबक में मरने देते हैं। मौन के लाभ आंतरिक शांति और मन की शांति से बहुत आगे जाते हैं। मौन जागरूकता और स्वीकृति का अभ्यास करने का अवसर प्रदान करता है। यह आपको यह पता लगाने में मदद करता है कि ब्रह्मांड में जो कुछ भी मौजूद है वह पहले से ही आपके भीतर है।

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Answered on Jan 12, 2022

कभी-कभी चुप रहना भी जीवन के लिए बहुत जरूरी होता है आपने तो ये कहावत सुनी होगी एक चुप सौ को हराए, एक चुप सबको सुख दे जाए इसलिए हमें कई बार चुप रहना पड़ता है क्योंकि एक मूर्ख व्यक्ति के सामने कुछ कहने से अच्छा होता है कि चुप रह कर उसका उत्तर दिया जाता है क्योंकि अगर उसके आगे आप कुछ बोलेंगे तो वह बात को हमेशा बढ़ाता है इसलिए चुप रहना ही अच्छा होता है लेकिन हमेशा चुप रहना मूर्खता कहलाती है जहां पर अन्याय होता है वहां चुप रहना उचित नहीं होता इसलिए हमें वहां कुछ ना कुछ ऐसी बोलना है कि सामने वाले बोलती बंद हो जाए और वह लड़ाई झगड़ा बंद कर दे।Article image

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Answered on Jan 12, 2022

* हमें बिना किसी वजह के अधिक नहीं बोलना चाहिए ! क्योंकि,बोलने से भी एनर्जी खत्म होती है ! इसीलिए हमें वहां पर बोलना चाहिए जहां पर हमारे बोलने का कुछ अर्थ निकले ! हमें वहां पर कभी भी नहीं बोलना चाहिए जहां पर हमारे ना बोलने के कारण किसी व्यक्ति की जान बच रही हो ! हमें किसी मूर्ख व्यक्ति के सामने नहीं बोलना चाहिए ! क्योंकि, हमारे बोलने से उसको कोई फर्क नहीं पड़ेगा ! हमें अपने बड़ों के बीच कभी नहीं बोलना चाहिए जिससे हमारे संस्कार का पता चलता है !Article image

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Answered on Jun 16, 2023


आज के समय की लाइफस्टाइल मे लोगो के जीवन मे काम क़ो लेकर तनाव अधिक रहता है जिसकी वजह से दिमाग में हर समय तनाव रहता ही है ऐसे में यदि आप हर रोज कुछ समय तक चुप रहने की प्रैक्टिस करते हैं तो इससे आपके दिमाग मे तनाव पैदा करने वाले हार्मोन के लेवल में कमी आएगी इससे आपका दिमाग शांत होगा, गुस्सा नियंत्रित होगा और तनाव पैदा करने वाले हॉर्मोन्स का लेवल घटता जाएगा, इसलिए हमें दिन मे कम से कम 3 -5मिनट चुप रहना चाहिए, इससे मन शांत रहता है।

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