वैदिक काल में विश (गोत्र) क्या था? - letsdiskuss
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shweta rajput

blogger | पोस्ट किया |


वैदिक काल में विश (गोत्र) क्या था?


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Preetipatelpreetipatel1050@gmail.com | पोस्ट किया


गोत्र हमारे सनातन धर्म में ऋषि मुनियों के द्वारा सबसे पहले सप्तर्षियों के नाम से प्रसिद्ध  था . सभी सप्तर्षियों मे पहचाने जाने वाले ऋषियों के नामों में पुराने समय के ग्रथों में अलग अंतर है. हम सभी लोगो के  कुल नाम पर - गौतम, भरद्वाज, जमदग्नि, वशिष्ठ,विश्वामित्र, कश्यप, अत्रि, अंगिरा, पुलह, क्रतु- ग्यारह गोत्र हो जाते हैं.

इससे जो सप्तर्षियों आकाश मे रहने की संख्या पर होते है इनपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, पर गोत्रों की संख्या को प्रभावित होना पड़ता  है. लेकिन  बाद में दूसरे आचार्यों और यऋषियों के नाम से गोत्र को प्रचलित किया गया .
  हमारे सभी व्यक्तियों का एक गोत्र होता है और वह अपने गोत्र के नाम से जाने जाते हैं!

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