- देवता और दानवों के सहयोग से संपन्न हुए समुद्र मंथन की घटना यूं तो देवताओं के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध हुई। परंतु सभी देव और दानव तब निशब्द हो गए जब समुद्र मंथन से हलाहल विष बाहर आया। क्योंकि देवता और दानव इस चाह में समुद्र मंथन कर रहे थे कि समुंद्र से अमृत कलश निकलेगा और जिसे पीकर वह अमर हो जाएंगे। परंतु अमृत निकलने से पहले समुंद्र से हलाहल विष निकल गया। जिसे देवता और दानव कोई भी नहीं पीना चाहता था। ऐसे में देव आदि देव भगवान शिव ने हलाहल विष को पीकर अपने कंठ में जमा कर लिया। जिस कारण उनको एक अन्य नाम नीलकंठ दिया गया।
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