चलिए दोस्तों आज हम आपको बताते हैं कि रंग पंचमी का त्यौहार किसके प्रेम का प्रतीक माना जाता है।जैसा कि आप सभी जानते हैं कि रंग पंचमी का त्योहार होली के पांचवें दिन मनाया जाता है और यह त्यौहार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन का भगवान कृष्ण और राधा रानी के साथ सभी देवताएं ब्रज में आकर होली खेले थे तभी से इस त्यौहार को मनाया जाने लगा है।
रंग पंचमी के दिन श्री कृष्ण राधा रानी के साथ होली खेला करते थे इस उपलक्ष में यह त्यौहार आज भी मनाया जाता है।इसलिए मैं कहना चाहती हूं कि रंग पंचमी का त्योहार भगवान कृष्ण और राधा रानी के प्रेम का प्रतीक है। इसी कारण से रंग पंचमी के त्यौहार को कृष्ण पंचमी और देव पंचमी भी कहा जाता है। रंग पंचमी के त्यौहार का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इस दिन भगवान कृष्ण और राधा रानी बैकुंठ से होली खेलकर धरती पर होली खेलने आते हैं।अगर हम इस दिन भगवान कृष्ण और राधा रानी को रंग अर्पित करते हैं तो हमारे सभी कार्य मंगलमय होते हैं और शुभ समाचार मिलता है।हमारी सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं ।रंग पंचमी का त्योहार आपस में लोगों को जोड़ता है और लोगों के बीच में आपस में प्रेम भरता है।
रंग पंचमी के दिन भगवान धरती पर होली खेलने तो आते ही हैं साथ में उनके सारे भक्त भी इस आस में होली खेलते हैं कि हम भगवान के साथ होली खेल रहे हैं और वह बड़े खुशी से अलग-अलग रंग के ग़ुलाल उड़ाते हैं और बड़े उत्सव के साथ होली खेलते हैं।रंग पंचमी का त्योहार भगवान कृष्ण के द्वारा शुरू किया गया था। ऐसा माना जाता था कि भगवान कृष्ण और राधा रानी अपने प्रेम के रंग को बिखरने के लिए होली खेलते थे और जब वह होली खेले तो पूरी धरती रंग बिरंगी हो गई यह अद्भुत नजारा देखकर सभी ग्वाल, गोपी और देवी देवताओं का भी श्री कृष्णा और राधा रानी के साथ होली खेलने का मन करने लगा और इस प्रकार सभी मिलकर एक साथ होली खेलने लगे थें।







