पुराने समय में यानी कि ऋषि मुनियों के समय में माता के नाम से ही वंश को जाना जाता था उस समय माता का स्थान पिता के अस्थान से मुख्य होता था उस संस्कृति में माता का स्थान इतने ऊंचे दर्जे का होता था कि माता के नाम से ही बन सिद्ध होता था एक एक नहीं हजारों ऐसी माताएं थे जिनके नाम से उनके वंश को पहचाना जाता था इस प्रकरण में एक नहीं 50 माताओं से ऋषि मुनियों की वंश परंपरा का उल्लेख है
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| Updated on October 9, 2021 | education
क्या माताओं के नाम पर ऋषि - मुनियों की वंश - परंपरा चलती थी ?
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@pritysingh8243 | Posted on October 9, 2021
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