क्या ये बात सही है कि मनुष्य की चिंता उसको दुसरो के साथ-साथ अपनों से भी दूर कर देती है ? - letsdiskuss
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Satnaam singh

@letsuser | पोस्ट किया |


क्या ये बात सही है कि मनुष्य की चिंता उसको दुसरो के साथ-साथ अपनों से भी दूर कर देती है ?


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Content Writer | पोस्ट किया


नमस्कार सतनाम सिंह जी , आपका का सवाल आज के समय के अनुसार बहुत अच्छा है और कही हद तक सही है | आप ये जानना चाहते है की मनुष्य की चिंता उसको अपनों से किस प्रकार दूर करती है ? चिंता मनुष्य को औरो से ही नहीं अपनों के साथ साथ खुद से भी दूर देती है | चिंता आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण चिंता बन चूका है | क्योकि यह एक ऐसा विचार है जिसके नाम से ही लोगो के मन में डर की भावना बैठ जाती है |

                                 कहते है चिंता चिता समान होती है। चिंता हो या चिता हिंदी वर्णमाला के हिसाब से बस एक मात्रा ही किसी भी शब्द का अर्थ बदल देती है। या फिर कह सकते है कि अर्थ का अनर्थ तक बना देती है।  कैसा होता है ये शब्दों का फेर बदल ,हिंदी वर्णमाला की सिर्फ़ एक मात्रा से इंसान का व्यक्तित्व बदल जाता है। अगर कोई इंसान परेशान है तो उसकी परेशानी को चिंता नाम दिया जाता है। और वही दूसरी और कोई इंसान इस धरती को अलविदा कह कर चला जाए तो,उसका इस दुनिया में आख़िर क़दम उसकी चिता के नाम से जाना जाता है।

कैसी दुनिया है और कैसे है उसके बनाए हिंदी वर्णमाला के शब्द ना जाने कब किसका क्या अर्थ और क्या अनर्थ निकल जाए। कहा जाता है ज़्यादा चिंता इंसान को उसकी चिता के क़रीब ले जाता है। सब कहते है चिंता नहीं करना चाहिए वरना इंसान की उम्र कम हो जाती है। पर क्या हम इस बात पर कभी ग़ौर करते है के इंसान को चिंता होती क्यों है। क्यों वो उम्र से पहले बूढ़ा हो जाता है। क्यों वो अपनी उम्र से ज़्यादा अपने दिमाग़ में परेशानी लेकर बैठा रहता है।

                           आज के दौर का इंसान एक ऐसी परेशानी में घिरा है जो चाह कर भी उससे दूर नहीं हो सकता। आज के समय में इंसान को अगर कुछ चाहिए तो वो है वक़्त । आज के समय में अगर वक़्त साथ हो तो इंसान ख़ुश होता है। और अगर उसके पास वक़्त ही ना हो तो वो चाहे कितना भी मेहनत कर ले पर वो अपने लिए सुकून नहीं ख़रीद सकता।


नोट :- आपका धन्यवाद् ,और अधिक जानकारी और सुझाव के लिए संपर्क करे - www.letsdiskuss.com

आपके विचार हमारे लिए अनमोल है |



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@letsuser | पोस्ट किया


आपके इस जवाब से में सहमत हूँ | इंसान इतना मानसिक तनाव से गुज़र रहा है के वो क्या करे उसको समझ नहीं आता | तो उसको क्या करना चाहिए अपने तनाव को दूर करने के लिए |



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