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Satnaam singh· 8 years ago
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क्या ये बात सही है कि मनुष्य की चिंता उसको दुसरो के साथ-साथ अपनों से भी दूर कर देती है ?

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नमस्कार सतनाम सिंह जी , आपका का सवाल आज के समय के अनुसार बहुत अच्छा है और कही हद तक सही है | आप ये जानना चाहते है की मनुष्य की चिंता उसको अपनों से किस प्रकार दूर करती है ? चिंता मनुष्य को औरो से ही नहीं अपनों के साथ साथ खुद से भी दूर देती है | चिंता आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण चिंता बन चूका है | क्योकि यह एक ऐसा विचार है जिसके नाम से ही लोगो के मन में डर की भावना बैठ जाती है |

कहते है चिंता चिता समान होती है। चिंता हो या चिता हिंदी वर्णमाला के हिसाब से बस एक मात्रा ही किसी भी शब्द का अर्थ बदल देती है। या फिर कह सकते है कि अर्थ का अनर्थ तक बना देती है। कैसा होता है ये शब्दों का फेर बदल ,हिंदी वर्णमाला की सिर्फ़ एक मात्रा से इंसान का व्यक्तित्व बदल जाता है। अगर कोई इंसान परेशान है तो उसकी परेशानी को चिंता नाम दिया जाता है। और वही दूसरी और कोई इंसान इस धरती को अलविदा कह कर चला जाए तो,उसका इस दुनिया में आख़िर क़दम उसकी चिता के नाम से जाना जाता है।

कैसी दुनिया है और कैसे है उसके बनाए हिंदी वर्णमाला के शब्द ना जाने कब किसका क्या अर्थ और क्या अनर्थ निकल जाए। कहा जाता है ज़्यादा चिंता इंसान को उसकी चिता के क़रीब ले जाता है। सब कहते है चिंता नहीं करना चाहिए वरना इंसान की उम्र कम हो जाती है। पर क्या हम इस बात पर कभी ग़ौर करते है के इंसान को चिंता होती क्यों है। क्यों वो उम्र से पहले बूढ़ा हो जाता है। क्यों वो अपनी उम्र से ज़्यादा अपने दिमाग़ में परेशानी लेकर बैठा रहता है।

आज के दौर का इंसान एक ऐसी परेशानी में घिरा है जो चाह कर भी उससे दूर नहीं हो सकता। आज के समय में इंसान को अगर कुछ चाहिए तो वो है वक़्त । आज के समय में अगर वक़्त साथ हो तो इंसान ख़ुश होता है। और अगर उसके पास वक़्त ही ना हो तो वो चाहे कितना भी मेहनत कर ले पर वो अपने लिए सुकून नहीं ख़रीद सकता।

नोट :- आपका धन्यवाद् ,और अधिक जानकारी और सुझाव के लिए संपर्क करे -www.letsdiskuss.com

आपके विचार हमारे लिए अनमोल है |

और पढ़े-आत्मा मनुष्य के मरने के कितने दिन बाद दोबारा जन्म लेती है?

 

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K
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हिंदी लेखक

Updated on05/07/26
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जी हां बिल्कुल ये बात सही है कि मनुष्य की चिन्ता उसको दूसरे के साथ -साथ अपनों से भी दूर कर देती है, क्योंकि कुछ लोग ऐसे होते है, जो किसी न किसी चीज को लेकर चिन्ता मे आकर अपने परिवार वालो से भी धीरे -धीरे दूर होने लगते है। जो लोग बिज़नेस मे नुकसान होने के कारण चिन्ता मे हर वक़्त डूबे रहते है जिसके कारण वह अपने बीवी, बच्चों को समय नहीं दे पाते है और उनसे दूर होने लगते है।

उनके इस चिन्ता के कारण उनके परिवार वाले माता -पिता, बच्चे, बीवी भी उनकी चिन्ता करने लग जाते है कि वह सब के साथ अच्छे बैठकर खाना -पिना नहीं खाता है। ऐसे मे सब लोग एक - दूसरे की चिंता मे डूब जाते है और सब अपने ही परिवार के सदस्य एक -दूसरे से दूर जाने लगते है, ऐसे किसी भी व्यक्ति को बिज़नेस मे घाटा होने या फिर कोई बात लेकर चिन्ता नहीं करनी चाहिए क्योंकि जो एक बार हो जाता है, उसे दोबारा बदला नहीं जा सकता है।Article image

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M
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Answered on10/02/23
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आपके इस जवाब से में सहमत हूँ | इंसान इतना मानसिक तनाव से गुज़र रहा है के वो क्या करे उसको समझ नहीं आता | तो उसको क्या करना चाहिए अपने तनाव को दूर करने के लिए |


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P
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Answered on02/20/18
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हाँ, काफी हद तक ऐसा हो सकता है। Excessive चिंता और stress इंसान को mentally exhausted बना देते हैं, जिससे वो लोगों से कम बात करने लगता है या emotionally distant feel करता है। कई लोग overthinking में इतने उलझ जाते हैं कि relationships पर भी असर पड़ने लगता है। Family और close friends कई बार notice करते हैं कि person पहले जैसा open नहीं रहा। Honestly, stress सिर्फ mind पर नहीं बल्कि behavior और social life पर भी असर डालता है। इसलिए mental health और emotional support दोनों बहुत important हैं।

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P
Pari DeshmukhReporting what matters — with 12 years of ground-level journalism behind every story.
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Pari Deshmukh is a journalist with over 12 years of experience covering current affairs across print and digital media in India. She holds a Master's degree in Journalism and Mass Communication from Pune University, bringing both academic grounding and extensive field experience to her reporting. Over her career, Pari has reported on national politics, policy developments, social issues, and breaking news events across India. Her work has appeared on platforms including The Print, Scroll.in, and Hindustan Times Digital, where she has built a reputation for factual, balanced, and timely reporting on stories that shape public discourse. With 12+ years in the field, she has covered major national events, conducted ground-level investigations, and interviewed policymakers, civil society leaders, and public figures. Her journalism is driven by one standard — verified facts reported without distortion, regardless of the pressure or pace of the news cycle. She has participated in press panels at the Ramnath Goenka Excellence in Journalism Awards and is a member of the Press Club of India. Her reporting continues to serve readers who need current affairs coverage they can trust.

Answered on05/12/26
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