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Shayraa .

| Updated on July 1, 2021 | news-current-topics

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस- नेशनल डॉक्टर्स डे (National Doctors Day) की शुरुआत कैसे हुई?

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@viratkumar3750 | Posted on July 1, 2021

1 जुलाई नेशनल डॉक्टर्स डे

हम सभी के जीवन में डॉक्टरों की क्या अहमियत है इसे तो हर कोई जानता है। इंसान के रूप में डॉक्टर को भगवान का स्वरूप माना जाता है। और डॉक्टर को भगवान का स्वरूप माना भी क्यों ना जाए। क्योंकि हमारी सभी प्रकार की बीमारियों का समाधान डॉक्टरों के पास ही होता है। डॉक्टर हमारी सेवा हमारे पैदा होने से लेकर हमारे मरने तक करते हैं। और वर्तमान समय में चले आ रहे कोरोनावायरस से लड़ने में अगर हम सहायक है तो उसकी वजह भी डॉक्टर ही है। डॉक्टरों ने अपने ज्ञान और बुद्धिमत्ता से कोरोनावायरस जैसे वायरस को भी मात दे दी है।

डॉक्टरों की इसी अहमियत को देखते हुए 1 जुलाई का दिन "नेशनल डॉक्टर डे" के नाम से मनाया जाता है। इसे "राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस " भी कहा जाता है। भारत में प्राचीन काल से ही बहुत से महान चिकित्सक हुए हैं। जिन्होंने अपने ज्ञान और बुद्धिमत्ता के दम पर असंभव को भी संभव कर दिखाया था। यदि बात प्राचीन वैद्य की कि जाए तो धनवन्तरि, जीवक, सुश्रुत, चरक, आदि ऐसे वैद्य रहे हैं जो उस काल में चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत ही आगे रहे हैं। इनमें से धनवन्तरि का भगवान के स्वरूप में पूजन किया जाता है।

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हमारे देश के महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉ. विधानचंद्र राय के जन्मदिन के अवसर पर उन्हें सम्मान देने हेतु नेशनल डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। हमारे देश में हर साल 1 जुलाई को ये दिन मनाया जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केंद्र सरकार के द्वारा साल 1991 में पहली बार राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाया गया था। तभी से प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाने लगा। इस दिन डॉक्टरों के अहमियत के बारे में जनता में जागरूकता फैलाई जाती है। और इसके साथ ही डॉक्टरों के मूल्यवान योगदान के सराहना भी की जाती है।

प्रसिद्ध डॉक्टर विधानचंद्र राय का जन्म बिहार मे 1 जुलाई 1882 को पटना में हुआ था। अपने स्कूल के दिनों में वह पढ़ने में काफी अच्छे थे जिस वजह से उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई औरों की तुलना में जल्दी पूरी कर ली। अपने प्रारंभिक शिक्षा तो उन्होंने भारत में पूरी करी लेकिन उच्च शिक्षा के लिए वो इंग्लैंड गए। अपनी डॉक्टरी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक सरकारी अस्पताल में काम करके अपने करियर की शुरुआत की। वह एक डॉक्टर होने के साथ-साथ आंदोलनकारी समाजसेवी व राजनेता भी थे। इसीलिए उन्होंने जब भारत में असहयोग आंदोलन हुआ तो उसमें हिस्सा भी लिया। शुरुआत में जनता उन्हें महात्मा गांधी जवाहरलाल नेहरू का डॉक्टर समझती थी। परंतु जब उन्होंने राजनीति में कदम बढ़ाया तो उन्हें एक अलग पहचान मिली।

भारत में अनेक काबिल डॉक्टर हुए तो डॉक्टर्स डे, विधानचंद्र रॉय के जन्मदिन के दिन पर ही क्यों मनाया जाता होगा? यह प्रश्न हर किसी के मन मे उठता है। विधानचंद्र रॉय के जन्मदिन पर डॉक्टर डे मानाने का कारण है उनके दान करने की आदत उनकी जितनी भी कमाय होती वो वह सब कुछ दान कर देते। देश की आजादी के समय आंदोलन मे घायल और पीड़ितों का उन्होंने निस्वार्थ भाव से इलाज किया। और लोगों के लिए एक मिसाल बन गए। और इसी वजह से नेशनल डॉक्टर डे उनके जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है।Article image

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