Advertisement

Advertisement banner

Advertisement

Advertisement banner

Advertisement

Advertisement banner
Current Topicsप्रदूषण कितने प्रकार के होते है?
image

| Updated on November 4, 2023 | news-current-topics

प्रदूषण कितने प्रकार के होते है?

10 Answers
S

@setukushwaha4049 | Posted on December 1, 2021

प्रदूषण 4 प्रकार के होते है :-
1. ध्वनि प्रदूषण
2. जल प्रदूषण
3. भूमि प्रदूषण
4.वायु प्रदूषण

1. ध्वनि प्रदूषण :-
ध्वनि प्रदूषण वह प्रदूषण होता है जो किसी कारण से अचनाक उत्पन्न होती है उसको ध्वनि प्रदूषण कहते है।जैसे - शादी मे बैंड, डीजे की ध्वनि का उत्पन्न होना,दिवाली मे पटाखों को फोड़ने पर जो ध्वनि उत्पन्न होती है उसको ध्वनि प्रदूषण कहा जाता है।

2.जल प्रदूषण :-
नदी, तालाबों के पानी जिसमे लोग अपने जानवर, गाड़ी, वही नहाते, वही कपडे धोते है। जिस वजह से वह पानी पूरी तरह से प्रदूषित हो रहा है उसे ही जल प्रदुषण कहते है।

3. भूमि प्रदूषण :-
भूमि प्रदूषण वह प्रदूषण होता है, जैसे कि किचन से निकलने वाला कूड़ा करकट, मल मूत्र, सब्जी के छिलके, हॉस्पिटल निकलने वाला प्लास्टिक, पालीथीन आदि ये सब हम भूमि पर ही फेकते है जिस वजह से भूमि प्रदूषण होता है। इसी ही भूमि प्रदुषण कहते है।

4.वायु प्रदुषण :-
वायु प्रदुषण वह होता है जो कार, ट्रेन, बस, बाइक से निकलने वाला धुआँ जो वायु मे जाकर वायु को प्रदूषित करता है वह वायु प्रदुषण कहलाता है।

Article image

2 Comments
R

@rajnipatel6804 | Posted on December 1, 2021

प्रदूषण कई प्रकार होते हैं!

वायु प्रदूषण -वायु प्रदूषण में प्रदूषण होता है जो विभिन्न प्रकार के गैस धुआं खनिज आदि कण सम्मिलित होते हैं जो वायु प्रदूषण को प्रदूषित करते हैं!

जल प्रदूषण जल प्रदूषण वायु प्रदूषण होता है! जो आज के युग में बढ़ती जनसंख्या के कारण होता है! जनसंख्या बढ़ने के कारण लोग कूड़े को कचड़े दान में ना फेंककर नीचे डालते हैं! जिससे जल प्रदूषित होता है!

ध्वनि प्रदूषण ध्वनि प्रदूषण के कारण मानव को हृदय रोग,सिर दर्द आदि जैसी बीमारियों का शिकार हो जाते हैं! जिससे कि मानव की नींद बेकार हो जाती है!जिससे की मानव बहरेपन का शिकार हो जाता है!Article image

2 Comments
logo

@aanchalsingh1985 | Posted on December 3, 2021

यह प्रदूषण विशेष तौर पर चार प्रकार का होता है

1 वायु प्रदूषण

2 जल प्रदूषण

3 मृदा प्रदूषण

4 ध्वनि प्रदूषण

1 वायु प्रदूषण , वायु प्रदूषण यह घर से निकलने वाला धुआं एवं गाड़ी वाहनों से निकलने वाला विषैला प्रकार का धुआं जो हमारे वायुमंडल में जाकर हवाई को प्रभावित करता है वायु प्रदूषण कहलाता है.।

2 जल प्रदूषण, यह घर से निकलने वाले गंदा पानी जो नालियों में जाकर यह पानी जीलो एवं नदियों में मिलता है और जल को दूषित करता है दूषित पानी जल प्रदूषण कहलाता है.।

3 मृदा प्रदूषण, यह प्रदूषण जो हमारे मिट्टी को काफी प्रभावित करता है जैसे विस्फोटक के समय कुछ हमारे मृदा को काफी हानि पहुंचाता है और यह जटिल ए पदार्थ भी अनावश्यक पदार्थ भी जो खेत खलियान में फेंके जाते हैं हमारे मृदा को दूषित करता है यह मृदा प्रदूषण कहलाता है.।

4 ध्वनि प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण व प्रदूषण है जो अनावश्यक कार्यों के लिए बजाया जाता है इस पर एसपी करो को ऊंची आवाज में बजाने से हमारे दिल की धड़कन काफी बढ़ने लगती है और जो हमारे सीधे स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं यह ध्वनि प्रदूषण करता ध्वनि प्रदूषण के कारण जो जिओ जंतुओं को काफी नुकसान होता है यह ध्वनि प्रदूषण कहलाता है.।Article image

2 Comments
logo

@krishnapatel8792 | Posted on December 7, 2021

Article image

1. जल प्रदूषण

2. वायु प्रदूषण

3. मृदा प्रदूषण

4 ध्वनि प्रदूष

1. जल के कारण होने वाला प्रदूषण फैक्ट्रियों से जो कचरा निकलता है। पाइप के द्वारा नदी में प्रवाहित होता है। और उसी पानी का उपयोग खाना बनाने में पीने में उपयोग किया जाता है। जल प्रदूषित होता ही है। साथ में बीमारियां भी खेलती यही है जल से प्रदूषण का कारण।

2) वायु प्रदूषण सड़क पर चलने वाले ट्रक कार के धुएँ रेलगाड़ी के धुएँ की वजह से होता है यह हमारी वायु को दूषित करते हैं जिससे प्रदूषण फैलता है।

3) मृदा प्रदूषण का कारण यह है कि मिट्टी में डालने के लिए इतने रासायनिक पदार्थों का उपयोग किया जाता है जिसके कारण मिट्टी दूषित होती है। इसी से प्रदूषण बढ़ता है

4) ध्वनि प्रदूषण का कारण ट्रक कार के निकलने वाले हौर्न से होता है बड़े-बड़े डीजे साउंड की वजह से होता है।Article image

2 Comments
logo

@poonampatel5896 | Posted on April 28, 2023

प्रदूषण के कई प्रकार होते हैं-

1 जल प्रदूषण

2) वायु प्रदूषण

3) ध्वनि प्रदूषण

4) मृदा प्रदूषण

1) जल प्रदूषण :- यह घर से निकलने वाले गंदा पानी जो नालियों में जाकर यह पानी झीलो एवं नदियों में मिलता है जल को दूषित करता है दूषित पानी जल प्रदूषण कहलाता है।

2) वायु प्रदूषण :- वायु प्रदूषण सड़क पर चलने वाले ट्रक कार के धुएँ रेलगाड़ी के धुएँ वजह से होता है हमारे वायु को दूषित करते हैं जिससे वायु प्रदूषण होता है।

3) ध्वनि प्रदूषण :- ध्वनि प्रदूषण में प्रदूषण होता है जो किसी कारण से उत्पन्न होता है उसे ध्वनि प्रदूषण कहते हैं।

शादी में बैंड डीजे की ध्वनि का उत्पन्न होना , दिवाली में पटाखे को फोड़ने पर जो ध्वनि उत्पन्न होती है उसे ध्वनि प्रदूषण कहते हैं।

4) मृदा प्रदूषण :- मृदा प्रदूषण का कारण यह है कि मिट्टी में डालने के लिए इतने रासायनिक पदार्थों का उपयोग किया जाता है जिसके कारण मिट्टी दूषित होती है ऐसे ही मृदा प्रदूषण कहते हैं।Article image

2 Comments
A

@anjalipatel3903 | Posted on November 1, 2023

दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताएंगे कि प्रदूषण कितने प्रकार के होते हैं।

प्रदूषण चार प्रकार के होते हैं:-

1) जल प्रदूषण।

2) वायु प्रदूषण।

3) ध्वनि प्रदूषण।

4) भूमि प्रदूषण।

1) जल प्रदूषण:- जल प्रदूषण उसे कहते हैं जिनके द्वारा जल को दूषित किया जाता है जैसे फैक्ट्री से निकलने वाला गंदा पानी जो सीधे जाकर नदी में प्रवाहित होता है और जल को दूषित करता है। घरों से निकलने वाला गंदा पानी जो नालियों के द्वारा सीधे तालाब में जाता है और तालाब का पानी गंदा होता है और इसी पानी का उपयोग लोग अपने खाने-पीने में करते हैं। जल प्रदूषण कहलाता है।

2) वायु प्रदूषण:- फैक्ट्री और कारखानों से निकलने वाला धुआं गाड़ियों और ट्रकों से निकलने वाला धुआं घरों से निकलने वाला धुआं जो सीधे जाकर वायु को दूषित करता है वायु प्रदूषण कहलाता है।

3) ध्वनि प्रदूषण:- ध्वनि प्रदूषण ट्रैकों से निकलने वाले हॉर्न गाड़ियों से निकलने वाले हॉर्न से होता है और बड़े-बड़े डीजे साउंड की वजह से भी होता है ध्वनि प्रदूषण ज्यादातर शहरों में होता है क्योंकि वहां प्रतिदिन गाड़ियां चलती हैं।

4) मृदा प्रदूषण:- मृदा प्रदूषण का कारण रासायनिक खाद्य जो मिट्टी को दूषित करते हैं जो आजकल ज्यादा ही प्रयोग किया जाता है इसी के कारण मिट्टी मिट्टी प्रदूषित होती है। मृदा प्रदूषण कहलाता है।Article image

2 Comments
S

@sapnapatel2495 | Posted on November 2, 2023

प्रदूषण के प्रकार के बारे में बताएंगे।

  1. वायु प्रदूषण
  2. जल प्रदूषण
  3. भूमि प्रदूषण
  4. ध्वनि प्रदूषण
  5. प्रकाश प्रदूषण

  • वायु प्रदूषण : - वायु प्रदूषण अर्थात हवा में ऐसे अब अवांछित गैसों धूल के कणों आदि में उपस्थित जो लोगों तथा प्रकृति दोनों के लिए खतरे का कारण बन जाए। वायु में ऐसे तत्वों में उपस्थित जो मनुष्य और जीव जंतु के स्वास्थ्य अथवा कल्याण हेतु हानिकारक हो वायु प्रदूषण कहलाती है
  • जल प्रदूषण :- जल प्रदूषण का अर्थ है अर्थ है पानी में अवांछित तथा घातक तत्वों में उपस्थित से पानी का दूषित हो जाना जिससे कि वह पीने योग्य नहीं रहता है नदियों में कूड़े कचरे मानव स्रोतों और पारंपरिक प्रथाओं का पालन करते हुए उपयोग में आने वाले प्रत्येक घरेलू सामग्री का समीप के जाल में स्रोत में विसर्जन।
  • भूमि प्रदूषण :- भूमि प्रदूषण से अभी प्रिया जमीन पर जहरीले अवांछित और अनुपयोगी पदार्थ के भूमि में विसर्जित करने से हैं क्योंकि इससे भूमि का नवीनीकरण होता है तथा मिट्टी के गुणवत्ता प्रभावित होती है लोगों की भूमि के प्रति बढ़ती लापरवाही के कारण भूमि प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा हैकागज तथा चीनी मिलों से निकलने वाले पदार्थ का निपटान जो मिट्टी द्वारा अवशोषित नहीं हो पाए प्लास्टिक की थैलियां का अधिक उपयोग जो जमीन में दबाकर दबकर नहीं गलती है।
  • ध्वनि प्रदूषण :- अनियंत्रित अत्यधिक तीव्र एवं असहनीय ध्वनि को ध्वनि प्रदूषण कहते हैं ध्वनि प्रदूषण की तीव्रता को डेसीबल इकाई में मापा जाता है

शहरों एवं गांव में किसी भी त्यौहार व उत्सव में राजनीतिक दलों के चुनाव प्रचार व रैली में लाउडस्पीकर का अनियंत्रित इस्तेमाल करना

  • प्रकाश प्रदूषण :- बढ़ती बिजली की जरूर और काम के लिए बढ़ती प्रकाश की जरूरत इस प्रकाश प्रदूषण का कारण बन सकता हैआंखों के आगे अंधकार का छा जाना जो गाड़ी चलाते समय एक्सीडेंट का कारण बन सकता है

सर दर्द होना मनुष्य का अंधा होन|Letsdiskuss

2 Comments
A

@aanyasingh3213 | Posted on November 3, 2023

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको बताएंगे कि प्रदूषण कितने प्रकार के होते हैं यदि आप प्रदूषण से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारे लेख को एक बार पूरा अवश्य पढ़े।

आज हमारा पर्यावरण इतना अधिक प्रदूषित हो गया है कि जिसकी वजह से मनुष्य और जीव जंतुओं का जीवन खतरे में पड़ गया है क्योंकि प्रदूषण की वजह से हम अच्छी तरह से सांस भी नहीं ले पाते हैं। प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनकर हमारे सामने खड़ी हो गई है। यदि हम समय रहते प्रदूषण को कम नहीं कर पाएंगे तो एक दिन इस पृथ्वी पर मनुष्य का जीवन धीरे-धीरे करके समाप्त होने लगेगा इसलिए प्रदूषण को रोकने के उपाय अपनाने होंगे।

प्रदूषण के प्रकार:-

दोस्तों हम आपको बता दें कि प्रदूषण चार प्रकार के होते हैं।

  • जल प्रदूषण
  • वायु प्रदूषण
  • ध्वनि प्रदूषण
  • मृदा प्रदूषण

यहां पर हमने आपको प्रदूषण के प्रकार के बारे में बता दिया है। जानकारी अच्छी लगी हो तो हमारे पोस्ट को लाइक अवश्य करें

Letsdiskuss

2 Comments
S

@shwetarajput8324 | Posted on November 3, 2023

प्रदूषण को स्रोतों, प्रभावित पर्यावरणीय मीडिया और इसमें शामिल प्रदूषकों की प्रकृति के आधार पर विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है। यहाँ प्रदूषण के कुछ प्राथमिक प्रकार हैं:

1. वायु प्रदूषण: इस प्रकार का प्रदूषण हानिकारक गैसों, पार्टिकुलेट मैटर और अन्य पदार्थों के वायुमंडल में छोड़े जाने के कारण होता है। यह वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक प्रक्रियाओं, जीवाश्म ईंधन जलाने और प्राकृतिक घटनाओं के कारण होता है। वायु प्रदूषण से श्वसन संबंधी बीमारियाँ, स्मॉग और जलवायु परिवर्तन हो सकता है।

  • पार्टिकुलेट मैटर (पीएम): हवा में निलंबित छोटे ठोस या तरल कण, जो अक्सर औद्योगिक प्रक्रियाओं और जीवाश्म ईंधन के दहन से उत्पन्न होते हैं।
  • ग्राउंड-लेवल ओजोन (O3): सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCs) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) की प्रतिक्रिया से बनने वाला एक हानिकारक द्वितीयक प्रदूषक।
  • कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ): कार्बन युक्त ईंधन के अधूरे दहन से उत्पन्न एक रंगहीन, गंधहीन गैस।
  • सल्फर डाइऑक्साइड (SO2): सल्फर युक्त जीवाश्म ईंधन को जलाने से उत्सर्जित होता है, जिससे अम्लीय वर्षा और श्वसन संबंधी समस्याएं होती हैं।
  • नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स): मुख्य रूप से वाहन उत्सर्जन और औद्योगिक प्रक्रियाओं से प्रदूषकों का एक समूह जो स्मॉग गठन और श्वसन समस्याओं में योगदान देता है।

2. जल प्रदूषण: यह प्रदूषण तब होता है जब संदूषक जल निकायों जैसे नदियों, झीलों, महासागरों और भूजल में प्रवेश करते हैं। स्रोतों में औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि अपवाह, सीवेज और रसायनों का अनुचित निपटान शामिल हैं। जल प्रदूषण जलीय जीवन, मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को बाधित करता है।

  • रासायनिक प्रदूषण: इसमें भारी धातुओं, कीटनाशकों और औद्योगिक रसायनों जैसे खतरनाक पदार्थों को जल निकायों में छोड़ा जाता है।
  • पोषक तत्व प्रदूषण: कृषि अपवाह और सीवेज से पोषक तत्वों (मुख्य रूप से नाइट्रोजन और फास्फोरस) की अधिकता, जिससे यूट्रोफिकेशन और हानिकारक शैवाल खिलता है।
  • सूक्ष्मजैविक प्रदूषण: बैक्टीरिया, वायरस और परजीवियों जैसे रोगजनक सूक्ष्मजीवों से पानी का संदूषण, जिससे जलजनित बीमारियाँ होती हैं।
  • तलछट प्रदूषण: तब होता है जब कटी हुई मिट्टी और मलबा जल निकायों में प्रवेश करते हैं, जिससे पानी गंदा हो जाता है और जलीय जीवन को नुकसान पहुंचता है।

3. मृदा या भूमि प्रदूषण: भूमि प्रदूषण में अनुचित अपशिष्ट निपटान, औद्योगिक गतिविधियों, वनों की कटाई और कीटनाशकों और उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग के कारण पृथ्वी की सतह का क्षरण शामिल है। इस प्रकार का प्रदूषण मिट्टी को बंजर बना सकता है, पौधों की वृद्धि को प्रभावित कर सकता है और भूजल में रिसकर उसकी गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

  • दूषित मिट्टी: अक्सर औद्योगिक गतिविधियों, अनुचित अपशिष्ट निपटान और कीटनाशकों और शाकनाशियों के उपयोग के परिणामस्वरूप होती है। भारी धातुएँ, कार्बनिक प्रदूषक और हानिकारक रसायन मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।
  • अम्लीकरण: वायुमंडल से अम्लीय प्रदूषकों के जमाव के कारण मिट्टी अम्लीय हो सकती है, जिससे पौधों की वृद्धि और मिट्टी के जीव प्रभावित होते हैं।

4. ध्वनि प्रदूषण: ध्वनि प्रदूषण अत्यधिक या विघटनकारी शोर की उपस्थिति है जो औद्योगिक मशीनरी, परिवहन, निर्माण गतिविधियों और शहरीकरण के कारण हो सकता है। उच्च स्तर के शोर के लंबे समय तक संपर्क में रहने से तनाव, सुनने की हानि और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

  • शहरी शोर: यातायात, औद्योगिक मशीनरी और निर्माण गतिविधियों जैसे विभिन्न स्रोतों के परिणामस्वरूप, यह तनाव, सुनने की हानि और नींद में खलल पैदा कर सकता है।
  • प्राकृतिक शोर: इसमें गड़गड़ाहट, ज्वालामुखी विस्फोट और वन्य जीवन की आवाज़ जैसी प्राकृतिक घटनाएं शामिल हैं लेकिन फिर भी कुछ मामलों में प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

5. प्रकाश प्रदूषण: इस प्रकार का प्रदूषण शहरी क्षेत्रों में अत्यधिक कृत्रिम प्रकाश के कारण होता है, जिससे प्राकृतिक प्रकाश चक्र बाधित होता है। यह वन्य जीवन को प्रभावित करता है, पारिस्थितिकी तंत्र को परेशान करता है और नींद में खलल सहित मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

  • स्काईग्लो: अत्यधिक और गलत दिशा वाली कृत्रिम रोशनी के कारण आबादी वाले क्षेत्रों में रात के आकाश का चमकना।
  • चकाचौंध: अत्यधिक चमक जो दृश्य असुविधा का कारण बनती है।
  • अव्यवस्था: प्रकाश स्रोतों का अत्यधिक समूहन, जैसे संकेत और विज्ञापन, जो ध्यान भटका सकते हैं और प्रकाश प्रदूषण में योगदान कर सकते हैं।

6. थर्मल प्रदूषण: यह मानवीय गतिविधियों के कारण प्राकृतिक जल निकायों के तापमान में अचानक वृद्धि या कमी के परिणामस्वरूप होता है। बिजली संयंत्र और औद्योगिक प्रक्रियाएं जो शीतलन के लिए पानी का उपयोग करती हैं, गर्म पानी को नदियों और झीलों में छोड़ सकती हैं, जिससे जलीय जीवन और पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकते हैं।

  • औद्योगिक प्रक्रियाओं या बिजली संयंत्रों से गर्म पानी को प्राकृतिक जल निकायों में छोड़ना, जो जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को बाधित कर सकता है और मछली और विशिष्ट तापमान सीमाओं के अनुकूल अन्य जीवों को नुकसान पहुंचा सकता है।

7. रेडियोधर्मी प्रदूषण: यह आमतौर पर परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से पर्यावरण में रेडियोधर्मी पदार्थों के निकलने, रेडियोधर्मी कचरे के अनुचित निपटान या दुर्घटनाओं के कारण होता है। रेडियोधर्मी प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर और लंबे समय तक चलने वाला प्रभाव हो सकता है।

  • परमाणु दुर्घटनाओं, रेडियोधर्मी कचरे के अनुचित निपटान, या परमाणु हथियारों के परीक्षण के कारण पर्यावरण में रेडियोधर्मी सामग्रियों की रिहाई के कारण। यह गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय जोखिम पैदा करता है।

8. प्लास्टिक प्रदूषण: पर्यावरण में, विशेषकर महासागरों और जल निकायों में प्लास्टिक कचरे का संचय, जिससे समुद्री जीवन और पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान होता है। माइक्रोप्लास्टिक्स, छोटे प्लास्टिक कण भी एक महत्वपूर्ण खतरा पैदा करते हैं।

9. जैविक प्रदूषण:पारिस्थितिक तंत्र में गैर-देशी प्रजातियों का प्रवेश, जो देशी प्रजातियों से प्रतिस्पर्धा कर सकता है या उनका शिकार कर सकता है, जिससे पारिस्थितिक असंतुलन हो सकता है। इसे अक्सर आक्रामक प्रजाति या जैव आक्रमण के रूप में जाना जाता है।

10. कूड़ा-कचरा करना:पैकेजिंग सामग्री और एकल-उपयोग प्लास्टिक जैसे ठोस कचरे का अनुचित निपटान, जो न केवल पर्यावरण के सौंदर्य को खराब करता है बल्कि वन्यजीवों के लिए भी खतरा पैदा करता है।

प्रत्येक प्रकार के प्रदूषण के अपने कारण, प्रभाव और शमन रणनीतियाँ होती हैं। मानव स्वास्थ्य की रक्षा, पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने और एक स्थायी भविष्य सुनिश्चित करने के लिए प्रदूषण से निपटना महत्वपूर्ण है। प्रदूषण को कम करने के प्रयासों में आमतौर पर सख्त नियम, स्वच्छ प्रौद्योगिकियाँ, सार्वजनिक जागरूकता और जिम्मेदार व्यक्तिगत व्यवहार शामिल हैं।


Letsdiskuss

2 Comments
logo

@kanchanpatel4206 | Posted on November 3, 2023

क्या आप जानते हैं कि प्रदूषण कितने प्रकार के होते हैं आमतौर पर तो प्रदूषण चार ही प्रकार के होते हैं। आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से बताते हैं कि प्रदूषण चार प्रकार के होते हैं।

1. वायु प्रदूषण।

2. जल प्रदूषण।

3.ध्वनि प्रदूषण।

4. मृदा प्रदूषण।

वायु प्रदूषण -

फैक्ट्री और कारखानों से निकलने वाला धुआं गाड़ियों और ट्रकों से निकलने वाला धुआं घरों से निकलने वाला धुआं जो सीधे जाकर वायु को दूषित करता है वायु प्रदूषण कहलाता है।

जल प्रदूषण-

जल के कारण होने वाला प्रदूषण फैक्ट्रियों से जो कचरा निकलता है। पाइप के द्वारा नदी में प्रवाहित होता है। और उसी पानी का उपयोग खाना बनाने में पीने में उपयोग किया जाता है। जल प्रदूषित होता ही है। साथ में बीमारियां भी खेलती यही है जल से प्रदूषण का कारण।

ध्वनि प्रदूषण -

ध्वनि प्रदूषण ट्रैकों से निकलने वाले हॉर्न गाड़ियों से निकलने वाले हॉर्न से होता है और बड़े-बड़े डीजे साउंड की वजह से भी होता है ध्वनि प्रदूषण ज्यादातर शहरों में होता है क्योंकि वहां प्रतिदिन गाड़ियां चलती हैं।

मृदा प्रदूषण-

मृदा प्रदूषण का कारण यह है कि मिट्टी में डालने के लिए इतने रासायनिक पदार्थों का उपयोग किया जाता है जिसके कारण मिट्टी दूषित होती है। इसी से प्रदूषण बढ़ता है।

Letsdiskuss

2 Comments