Krishna Patel
Krishna Patel· 3 साल पहले
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कौन सा अंग आग में नहीं जलता है?

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जवाब दिया गया09/09/23

यहाँ पर बहुत ही रोचक प्रश्न पूछा गया है कि शरीर का कौन सा अंग आग में नहीं जलता है? क्योंकि इस तरह के प्रश्नों को सुनने के बाद इनका जवाब दे पाना थोड़ा मुश्किल होता है, तो चलिए हम आपको इस प्रश्न का जवाब बहुत ही मुश्किल से ढूढ़ कर लाये है वह अंग नाख़ून है जो आग मे भी नहीं जलता है, किसी व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात् उसको अग्नि दी जाती है, लेकिन उसके नाख़ून नहीं जलते है तो अस्थियो के साथ उसके नाख़ून को भी गंगा नदी मे प्रवाहित कर दिया जाता है।Letsdiskuss

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जवाब दिया गया10/23/23

जब इंसान की मृत्यु होती है तो अंतिम संस्कार में मनुष्य के शरीर को जला दिया जाता है जिसमें मनुष्य के शरीर का कुछ हिस्सा जल कर राख हो जाता है तो कुछ ऐसे हिस्से होते हैं जो आज में भी नहीं जलते हैं तो चलिए जानते हैं कि शरीर के कौन से हिस्से हैं जो आग में नहीं जलते हैं।बता दे कि शरीर में दांत वो हिस्सा होता हैं, जो आग में नहीं जलता हैं। चिता जलने के बाद भी जब अस्थियां इकट्ठी की जाती हैं, तो वहाँ दांत भी मिलते हैं, आग का इनपर मामूली असर ही होता हैं। ये मनुष्य के शरीर का सबसे अविनाशी घटक माना जाता है। इसके अलावा मनुष्य के शरीर का दूसरा हिस्सा नाखून है जो आग में नहीं जलता है। लेकिन फिर भी अस्थियों के साथ ही से गंगा नदी में बहा दिया जाता है।

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Aanya  Singh
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जवाब दिया गया09/11/23

यहां पर बहुत ही आश्चर्यचकित कर देने वाला सवाल पूछा गया है कि इंसान के शरीर पर वह कौन सा अंग है जो आग में भी नहीं चलता है अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा हो ही नहीं सकता लेकिन आज मैं आपको बताने जा रही हूं कि इंसान के शरीर कैसा कौन सा अंग है जो आग में भी नहीं जलता दोस्तों इंसान के शरीर का वह अंग है जो आग में भी नहीं ज लता नाखून, और दांत आग में भी नहीं चलते हैं आपने देखा होगा कि जब इंसान का अंतिम संस्कार किया जाता है तो उनके शरीर का सभी हिस्से जल जाते हैं लेकिन दांत और नाखून बिल्कुल भी नहीं जलते हैं लेकिन फिर भी जब उनकी अस्थियों को इकट्ठा करके गंगा में प्रवाहित करने के लिए ले जाते हैं तो दांत और नाखून को भी उसमें इकट्ठा कर लेते हैं और उन्हें बहा देते हैं।

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Krishna Patel
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जवाब दिया गया03/19/26

यह सवाल अक्सर लोगों के बीच सुनने को मिलता है, लेकिन इसके पीछे सही जानकारी समझना जरूरी है।

मानव शरीर का कोई भी अंग पूरी तरह आग से सुरक्षित नहीं होता। शरीर के सभी हिस्से ऊतकों (tissues) से बने होते हैं, जो तेज गर्मी या आग में जल सकते हैं।

दांत (teeth) हड्डियों से बने होते हैं और काफी कठोर होते हैं, इसलिए वे आसानी से नहीं जलते बल्कि लंबे समय तक सुरक्षित रह सकते हैं।

इसी तरह हड्डियां भी जल्दी नहीं जलतीं, लेकिन बहुत अधिक तापमान पर वे भी प्रभावित हो सकती हैं।इसलिए कोई अंग नहीं जलता यह पूरी तरह सही नहीं है, बल्कि कुछ अंग देर से प्रभावित होते हैं। यह एक मिथक है कि कोई अंग बिल्कुल नहीं जलता, लेकिन कुछ हिस्से ज्यादा देर तक टिके रह सकते हैं।

Tara Verma
Ten years in the classroom, shaping minds — bringing the same clarity and purpose to every piece she writes about education.
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Tara Verma is a practising teacher and education content writer with over 10 years of classroom experience across primary and secondary levels. She holds a Master's degree in Education (M.Ed.) from Delhi University and a Bachelor of Education (B.Ed.) from Jamia Millia Islamia — qualifications that ground her writing in both pedagogical theory and the day-to-day realities of teaching in India. Her content covers exam preparation strategies, learning methodologies, curriculum guidance, student mental health, career counselling for students, and the evolving state of school and higher education in India. Her work has appeared on platforms including TeacherVision India, Jagran Josh, and Careers360, where she writes for students, parents, and fellow educators who need content built on actual teaching experience — not theory alone. Over a decade of working directly with students across age groups and learning levels has given Tara a practical understanding of how education content should be written — clearly, accessibly, and with genuine awareness of the challenges students and teachers face on the ground. She has taught 1,000+ students, contributed to school curriculum development initiatives, and published 250+ articles on education across digital platforms. She is an active member of the National Council of Teachers of English (NCTE) India. Across all her writing, every recommendation is classroom-tested, every insight comes from direct teaching experience, and every article is held to the same standard she applies in her own classroom — accuracy, clarity, and genuine usefulness for the reader.

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जवाब दिया गया08/14/20

सोने की लंका जलने से पहले ही कुबेर ने ले ली थी। जब कुबेर को पता चला कि रावण अंत में ब्रह्मा से अजेयता का वरदान प्राप्त करने में कामयाब रहा है, तो वह जानता था कि यक्षों के स्वामी के रूप में स्वर्ण लंका पर उसके दिन समाप्त हो गए थे। क्योंकि उसका भाई जल्द ही हिमालय से आ जाएगा और उसे पैकिंग पर भेज देगा। इसलिए, कुबेर अपने और रावण के पिता, महान ऋषि विश्रवा के पास गए और सलाह मांगी। विश्रव ने कुबेर को सलाह दी कि वे अपने धन को ले जाएं और कैलाश की ओर भाग जाएं, इसका एक हिस्सा मा अन्नपूर्णा को दे दें, क्योंकि वह दुनिया को खिला रही है, और शेष को कैलाश के उत्तर में एक जगह पर छिपा रही है। कुबेर ने उसके अनुसार किया, और उन्होंने अपने यक्षों के साथ तिब्बत में उस स्थान पर धन के साथ सोना छिपा दिया। बाद में इस स्थान पर शांगरी-ला या शम्बाला या ज्ञानगंज के रूप में जाना जाने लगा। यह जगह असली है। कई ऋषि वहां गए हैं। स्वामी राम और अन्य लोगों ने इसके बारे में लिखा है कि उन धन को देखने के बाद। यक्ष आज भी उस स्थान की रक्षा करते हैं। उन्हें अक्सर लामास के रूप में प्रच्छन्न किया जाता है। भारत और चीन दोनों की सरकारों ने कई मौकों पर जगह खोजने की कोशिश की, लेकिन हर बार विफल रही। सोना पवित्र है। यह केवल ऋषियों और अभिभावकों के लिए उपयोग करने के लिए है। जब तक किसी को नहीं बुलाया जाता, कोई भी उस जगह का दौरा नहीं कर सकता। यह एक कारण है, ऋषि चाहते हैं कि अरुणाचल प्रदेश भारत के साथ हो, क्योंकि एक मार्ग इसके माध्यम से जाता है। जानकार जानते हैं कि बीएचयू के एक विभाग में एक विशेष स्कूल ज्ञानगंज के अभिभावकों के लिए एक नाली के रूप में कार्य करता है, जो किसी व्यक्ति को जगह पर जाने के लिए बुलाता है। यह बहुत गोपनीय है। केवल वे जो धन या धन की कोई इच्छा नहीं रखते, उन्हें ज्ञानगंज की यात्रा के लिए बुलाया जाता है।



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जवाब दिया गया03/10/26

वैज्ञानिक और जैविक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो मनुष्य के शरीर का वह अंग जो आग में सबसे कम प्रभावित होता है और पूरी तरह नहीं जलता, वह है दांत (Teeth)।

दांतों के न जलने के मुख्य कारण:

  • इनेमल की कठोरता: दांतों की सबसे बाहरी परत, जिसे इनेमल (Enamel) कहा जाता है, मानव शरीर का सबसे कठोर ऊतक (Tissue) है। यह मुख्य रूप से 'हाइड्रॉक्सीपैटाइट' नामक खनिज से बना होता है।
  • उच्च ताप सहने की क्षमता: इनेमल और उसके नीचे की परत 'डेंटिन' अत्यधिक उच्च तापमान (लगभग 1000 से 1100 डिग्री सेल्सियस तक) को सहन कर सकते हैं। चिता की अग्नि या सामान्य आग का तापमान अक्सर इससे कम होता है, जिससे शरीर का मांस और हड्डियाँ तो राख हो जाती हैं, लेकिन दांत सुरक्षित बच जाते हैं।
  • फॉरेंसिक महत्व: इसी विशेषता के कारण, दुर्घटनाओं या आगजनी की घटनाओं में जब शव की पहचान करना मुश्किल होता है, तब फॉरेंसिक विशेषज्ञ दांतों (Dental Records) का उपयोग करके ही व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करते हैं।

नाखूनों के बारे में भ्रम: कुछ लोग 'नाखून' को भी इसका उत्तर मानते हैं, लेकिन यह गलत है। नाखून किरेटिन (Keratin) प्रोटीन से बने होते हैं और आग के संपर्क में आते ही बहुत जल्दी जलकर राख हो जाते हैं।

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