शाम होते ही क्यों बंद हो जाते हैं, निधिवन के द्वार, फिर कोई क्यों नहीं जाता निधिवन ? - letsdiskuss
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Brij Gupta

Optician | पोस्ट किया |


शाम होते ही क्यों बंद हो जाते हैं, निधिवन के द्वार, फिर कोई क्यों नहीं जाता निधिवन ?


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Content Writer | पोस्ट किया


भारत में कई रहस्य हैं, जो अभी सुलझे नहीं है | ऐसा ही एक रहस्य है, जो अभी तक उलझा हुआ | आज आपको बताते हैं, निधिवन के बारें में, जहाँ आज भी शाम होते ही मंदिर में ताला लग जाता है, और उसके बाद कोई भी निधिवन के आस-पास भी नहीं रहता |

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जैसा कि सभी जानते हैं, मथुरा कृष्ण भगवान की जन्म भूमि है | मथुरा में वृंदावन मंदिर जहाँ लोगों की अपार श्रद्धा है | निधिवन वृंदावन में ही स्थित है और यहां के लोगों की मान्यता है, कि यहां आज भी हर रात भगवान कृष्णा और गोपियाँ निधिवन में रास लीला करते हैं |

यहां पर कोई रात्रि के समय नहीं रुकता | कहा जाता है, जो भी यहां रुकता है, या तो वो अपनी जान से हाथ धो बैठता है, या फिर वो पागल हो जाता है | परन्तु वो उस जगह की सच्चाई किसी को नहीं बता पाता कि उसने क्या देखा | बस यही कारण है, कि संध्या आरती के बाद निधिवन के द्वार बंद हो जाते हैं, फिर यहां पर किसी का आगमन नहीं होता | सबसे बड़ी और सोचने वाली बात तो यह है, कि निधिवन में कोई पक्षी भी रात के समय उस स्थान पर नहीं रहता |

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निधिवन के अंदर "रंग महल " है, जिसकी मान्यता यह मानी गई है, कि यहाँ पर राधा और कृष्णा रोज रात को आते हैं | "रंग महल" में राधा और कृष्णा के लिए चंदन की पलंग को रोज शाम सात बजे के पहले सजा के रख दिया जाता है। एक लोटा जल, राधाजी के लिए सारा श्रृंगार का सामान,दातुन और पान रख दिया जाता है।

सुबह पांच बजे जब ‘रंग महल’ का पट खुलता है, तो लोटे का पानी खाली, दातुन दांतों से कुचली हुई,पान खाया हुआ मिलता है। यह भी एक रहस्य है, कि ऐसा क्यों होता है ?


निधिवन के कुछ पेड़ जो कि पूरे सूखें हुए हैं, परन्तु उनमें अभी भी जान जीवित है, सुखी हुई पेड़ की शाख से हरी पत्तियां निकली हुई हैं | यहाँ के पेड़ों की एक और खास बात है, वैसे तो पेड़ जब बढ़ता है, तो वो आसमान की तरफ से बढ़ता है, परन्तु यह पेड़ ज़मीन की तरफ बढ़ते हैं |

बड़ा ही रहस्यमय है ये मंदिर | ऐसे और भी कई रहस्य है, इस दुनिया में जिसको कोई जानता भी नहीं है |


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