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Sidhanth Bhatt· 2 साल पहले
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वीर रस किसे कहते हैं? इसके लक्षण और प्रमुख उदाहरण क्या हैं?

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जवाब दिया गया03/07/26

जब किसी काव्य को पढ़ने या सुनने से मन में उत्साह (Enthusiasm) का भाव जाग्रत होता है, तो उसे वीर रस कहा जाता है। इसका स्थायी भाव 'उत्साह' है। जब युद्ध, कठिन कार्य या दीन-दुखियों की रक्षा के लिए मन में जोश और साहस उमड़ता है, तब वीर रस की उत्पत्ति होती है।

वीर रस के प्रमुख अंग:

  • स्थायी भाव: उत्साह।

  • आलंबन: शत्रु या अत्याचारी व्यक्ति।

  • उद्दीपन: रणभेरी, शत्रु की ललकार या वीरतापूर्ण बातें।

उदाहरण: "बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।"

यह रस राष्ट्रभक्ति और वीरता की भावनाओं को जगाने में अत्यंत प्रभावशाली होता है।

Ramesh Kumar
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अपडेट किया गया03/06/26

चलिए हम आपको बताते हैं की वीर रस किसे कहते हैं।

वीर रस -जब किसी रचना या वाक्य को पढ़कर मन में वीरता जैसे भाव उत्पन्न हो तो उसे वीर रस कहा जाता है। वीर रस से वीरता जैसे स्थाई भाव की अनुभूति होती है। वीर रस का हिस्सा स्थाई भाव उत्साह होता है। कहने का मतलब है कि युद्ध अथवा किसी भी कार्य को करने के लिए हमारे हृदय में जो उत्साह का भाव जागृत होता है उसे वीर रस कहते हैं। आपने अक्सर देखा होगा कि जब भी आप किसी कविता को पढ़ते हैं या किसी नाटक इत्यादि को देखते हैं तो आपके मन मे भी वीरता का उत्साह जागृत होता होगा और जो आपके मन में वीरता का उत्साह जागृत होता है उसी को वीर रस कहते हैं।

वीर रस के उदाहरण - खूब लड़ी मर्दानी थी वह तो झांसी वाली रानी थी।, वह दौड़ रहा अरि मस्तक पर राणा प्रताप का घोड़ा था।

 इन लाइनों को पढ़कर आपके मन में भी वीरता का भाव जागृत होता होगा और लगता होगा कि हम भी झांसी की रानी के जैसे बन जाए।आपके मन में इस लाइन को पढ़कर अत्यधिक उत्साह का भाव जागृत होता होगा और जो आपके मन में यह उत्साह और वीरता के भाव जागृत होते हैं इसी को वीर रस कहते हैं।

चलिए हम आपको बताते हैं कि रस कितने प्रकार के होते हैं।

रस 11 प्रकार होते हैं जिनके नाम निम्नलिखित हैं -

  1.  श्रृंगार रस।
  2.  हास्य रस।
  3.  करुण रस।
  4.  रौद्र रस।
  5.  अद्भुत रस।
  6.  वीभत्स रस।
  7.  वीर रस।
  8.  वात्सल्य रस।
  9.  भक्ति रस।
  10.  भयानक रस।
  11.  शांत रस।

 इन रसों के अलग-अलग परिभाषा होती है। जैसे कि हास्य रस के बात करूं तो हास्य रस में जब किसी कविता या नाटक को देखकर हास्य का अनुभव होता है तो उसे हास्य रस कहते हैं। प्रकार अलग-अलग रसों के उनके नाम के अनुसार परिभाषा भी है।

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