निजी क्षेत्र और सार्वजनिक क्षेत्र में अंतर
निजी क्षेत्र:- निजी क्षेत्र की स्थापना निजी व्यक्तियों यह गैर सरकारी संस्थाओ द्वारा की जाती है। निजी क्षेत्र का प्रथम उद्देश्य लाभ कमाना होता है। इनका प्रबंधन और संचालन व्यक्तियों गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा होता है। इनकी स्थापना एकाकी व्यवसाय,साझेदारी कंपनी आदि के रूप में की जाती है।इनमें प्रबन्धकों का वित्तीय हित होता हैं। इस क्षेत्र के उद्योगों में सदैव व्यक्तिगत जोखिम बना रहता है।इस क्षेत्र में उद्योगों की सफलता अर्जित लाभ गणना से आकी जाती है।
सार्वजनिक क्षेत्र:- सार्वजनिक क्षेत्र की स्थापना केंद्र, राज्य स्थानीय लोक सत्ता द्वारा की जाती है। सार्वजनिक क्षेत्र का प्रथम उद्देश्य सेवा तथा द्वितीय उद्देश्य लाभ कमाना होता है।इनका प्रबंधन एवं संचालन सरकार के हाथ में होता है।इनकी स्थापना विभागीय आधार पर सरकारी एवं सूत्रधारी कम्पनियों, जन निगमों, मण्डलों आदि के रूप में की जाती है । इनमें प्रबंधकों का कोई वित्तीय हित नहीं होता है।




