निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय, बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय। इस दोहे का क्या अर्थ है? - letsdiskuss
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System Engineer IBM | पोस्ट किया | शिक्षा


निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय, बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय। इस दोहे का क्या अर्थ है?


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blogger | पोस्ट किया


"निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय।

बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय" ।।




कबीर दास जी कहते हैं कि जो हमारी निंदा करता है उ।से हमें अपने पास ही रखना चाहिए मैं। तो बिना साबुन और पानी के हमारी कमियां बता कर। हमारे स्वभाव को ही शुद्ध करता।




संत कबीर दोहे #32


"कबीरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर।


ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर"।।. <a href="https://www.apnadesigyan.com">click here </a>.और पड़े 




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