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Entertainment & Lifestyleमोह और माया में क्या अंतर है?
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| Updated on March 10, 2026 | entertainment

मोह और माया में क्या अंतर है?

2 Answers
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@kirankushwaha3551 | Posted on March 10, 2026

चलिए दोस्तों आज हम आपको मोह और माया में अंतर बताते हैं।जैसा कि आप सब लोग जानते हैं कि लोग कहते हैं कि उसका मन मोह माया में है वह मोह माया को छोड़कर भगवान की भक्ति में लग जाए तो उसे भगवान के चरणों में मुक्ति मिलेगी। चलिए हम आपको आज इसी मोह माया के बीच अंतर बता रहे हैं। दरअसल मोह और माया के बीच अंतर होता है मोह अलग चीज है और माया अलग चीज होती है।

 चलिए पहले हम  आपको बताते हैं की मोह क्या होता है ;-

मोह -  जब हम अपने शरीर से प्रेम करने लगते हैं या किसी अन्य व्यक्ति से प्रेम करने लगते हैं मतलब कि वह व्यक्ति हमें जी जान से प्यार होता है और उस व्यक्ति को छोड़कर हम नहीं जा सकते हैं तो उसे व्यक्ति के प्रति हमें मोह हो जाता है इसी को हम वह कहते हैं। मतलब की कोई व्यक्ति हैं जिससे हम इतना प्रेम कर बैठते हैं कि उसे छोड़कर जाने का नाम ही नहीं लेते हैं यह जानते हुए भी कि वह व्यक्ति हमारा नहीं है फिर भी हम उसी के बारे में सोचते रहते हैं और उसी के साथ रहना चाहते हैं इसी को मोह कहते हैं। उदाहरण के लिए मान लीजिए  आप पढ़ाई करने के लिए दिल्ली जा रहे हैं और दिल्ली में पढ़ाई कर रहे हैं फिर जब आप वापस दिल्ली से घर आते हैं तो आपको अपने घर परिवार के प्रति मोहन हो जाता है और जब आपका दोबारा दिल्ली जाने का नंबर आता है तो घर परिवार को छोड़कर जाने में थोड़ा संकोच करते हैं क्योंकि आप घर परिवार से मोह लगा बैठेते हैं। इसी प्रकार आप दुनिया के रिश्तेदारी के बारे में सोचते हैं और दुनिया के रिश्तेदारी जोड़ते हैं। पर आप कभी भी भगवान के बारे में नहीं सोचते हैं और ना ही भगवान को रिश्तेदार मानते हैं ऐसे में अगर आप मोह को छोड़कर केवल भगवान के चरणों में अपने आप को अर्पित कर दीजिए तो आपका कल्याण होगा। आप अपने पिता, माता,भाई,बहन, बच्चे,इत्यादि के प्रति ज्यादा मोहित होते हैं और आपको अपने बच्चों के प्रति ज्यादा मोह होता है।

माया- माया का मतलब होता है किसी धन संपत्ति या चीज से लगाव होना। उदाहरण के लिए मान लीजिए कि आपके घर में बहुत सारी करोड़ की संपत्ति है और घर में भी बहुत सारा धन रखा हुआ है इस प्रकार आप बाहरी दुनिया में ध्यान नहीं देते हैं केवल अपने घर की धन संपत्ति के बारे में सोचते हैं इसी को माया कहते हैं यानी कि आपको अपने घर की धन संपत्ति में माया लगी होती है।

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@krishnapatel8792 | Posted on March 10, 2026

अक्सर देखा जाता है कि साधु संत का कहना होता है कि मोह माया को त्याग देना चाहिए और भगवान के भक्ति में लीन हो जाना चाहिए लेकिन क्या आप जानते हैं कि अक्सर साधु संत ऐसा क्यों कहते हैं आखिर क्या है मोह, मायाशायद आपको जानकारी नहीं होगी कि मोह माया क्या है तो चलिए हम आपको बताते हैं मोह माया क्या होता है।

 दोस्तों आज मैं आपके मोंह और माया में अंतर बताने वाली हूं:-

दोस्तों मैं आपको बता दूं कि मोंह का मतलब होता है जादू जैसे कि किसी ने आपकी चेतना, आपकी बुद्धि पर पर्दा डाल दिया हो उसको मोह कहते हैं। यह हुई मोंह की परिभाषा चलिए अब हम आपको बताते हैं की माया क्या है।

 माया उसे कहते हैं जो पारंपरिक रूप से बाहरी चीजों को बोला जाता है तो इसलिए जब बाहर सब धुंधला दिखाई देने लगे तो उसको कहते हैं माया।

 चलिए दोस्तों हम आपके मोंह का एक उदाहरण बताते हैं जिसके जरिए आप आसानी से समझ सकते हैं कि मोह क्या है :-

मान लीजिए यदि आप अपने बच्चों को छोड़कर घूमने के लिए जाते हैं और हर जगह उसी के बारे में सोचते हैं तो यह मोह कहलाती है।

 चलिए दोस्तों अब हम आपको माया का एक उदाहरण बताते हैं जिसके जरिए आप समझ पाएंगे की माया क्या है:-

जैसा कि मान लीजिए आप मेरा घर मेरी जमीन, मेरा धन,मेरा सोना, चांदी, हीरे,जवाहरात आदि चीजों से स्नेह रखना माया कहलाती है।

 दोस्तों  मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मोह माया को त्याग देना चाहिए क्योंकि जब तक आप जिंदा है तब तक ही यह आपका है और करने के बाद मोह माया सब मिट्टी में मिल जाती है इसलिए मोह माया के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोचना चाहिए। क्योंकि यह नश्वर है एक न एक दिन इसे नष्ट होना ही है।

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