जरूरत ´ एक ऐसा शब्द है। जिससे आज हर कोई परिचित है। आज जरूरत के बिना आवश्यकता जीवन का एक भी दिन निर्वहन नहीं हो सकता इसलिए कहा गया है कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है। हमारे जीवन की मूलभूत जरूरत रोटी, कपड़ा और मकान है।
जब मनुष्य को अपनी जरूरतें महसूस होने लगी तभी उसने चीजों को खोजना सूरु किया जिससे उसकी जरूरत पूरी हो सके।
हम अपने दैनिक जीवन में देख सकते हैं कि लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग कार्य करते हैं। कुछ लोग कृषि करते हैं, कुछ लोग कार्यालयों में कार्य करते हैं,कुछ सब्ज़ियां बेचते हैं, कुछो के पास विभिन्न प्रकार की दुकानें हैं आदि। पैसा कमाने के लिए विभिन्न प्रकार के कार्य करते हैं। जिससे यह अपनी और अपने परिवारों की जरूरतों को पूरा करते हैं। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए मानव निर्मित तथा प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करते हैं। क्योंकि जरूरत असीमित है परंतु संसाधन सीमित हैं।


