मजदूर और एक प्राइवेट नौकरी करने वाले के बीच बहुत ज्यादा फर्क होता है, क्योंकि मजदूर की जिंदगी दुसरो की गुलामी करने मे निकल जाती है उनको दो वक्त की रोटी के लिए रोज कोई ना कोई काम ढूंढना पडता है क्योंकि उनकी नौकरी कंटिन्यू नहीं रहती है।
उनको काम को लेकर इधर -उधर भटकना पडता हैं, और साथ ही उनको एक दिन मजदूरी 100से लेकर 200₹ तक मिलता हैं इतने उनका घर नहीं चल पता हैं।
अब बात आती है प्राइवेट नौकरी करने वालो व्यक्तियों की जो लोग किसी फैक्ट्री मे मैनेजर की जॉब, जेसीबी प्राइवेट कम्पनी काम करते है तो ऐसे मे उनको महीने 20,00₹ मिलता है फिर भी उनको घर खर्च प्रॉब्लम होती है लेकिन मजदूरों से तो अच्छी वेतन प्राइवेट नौकरी करने वालो की होती है भले ही वेतन कम मिलती है लेकिन काफ़ी हद तक सही है ।






