दोस्तों आप संसद और विधायक के बारे में तो जानते ही हैं क्योंकि संसद मे मतदाताओं का प्रतिनिधित्व होता है वहीं अगर विधायक की बात करे तो विधायक सदन में नए कानून की योजना बनाते हैं और उन कानूनो को लागू करता है। तो चलिए हम आपको बताते हैं कि संसद और विधायक में क्या अंतर होता है। सांसद और विधायक में कई सारे फर्क होते हैं जो निम्न है -
- विधायक राज्य स्तर पर कार्य करता है जबकि सांसद केंद्रीय स्तर पर कार्य करता है।
- विधायक किसी राज्य या प्रांतीय निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता जबकि सांसद राष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट जिले का प्रतिनिधित्व करता है।
- विधायक केवल राज्य के विशिष्ट मुद्दों से निपटता है जबकि सांसद राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों से निपटता है।
- विधायक के चुनाव राज्य में समय-समय पर होते रहते हैं लेकिन संसद के चुनाव एक अंतराल पर होते हैं।
- विधायक की वोटिंग राज्य के विशिष्ट कानून पर होती है जबकि संसद की वोटिंग राष्ट्र के कानून के पर होती है।
- अगर विधायक की बात की जाए तो विधायक केवल राज्य या प्रांत के लिए कानून बताता बनता है लेकिन संसद पूरे देश के लिए कानून बनता है।
- विधायक मुख्यमंत्री बन सकता है लेकिन संसद प्रधानमंत्री बन सकता है।
- अगर इन दोनों में कोई कॉमन चीज है तो दोनों का कार्यकाल 5 साल तक का ही होता है।
- विधायक राष्ट्रीय मुद्दों में कम भागीदारी भूमिका निभाता है जबकि सांसद राष्ट्रीय मुद्दों में अधिक भागीदारी निभाते हैं।
- विधायक के निर्वाचन क्षेत्र छोटे होते हैं जबकि संसद के निर्वाचन क्षेत्र बड़े होते हैं। कहने का मतलब है की जिन स्थानों पर विधायक का निर्वाचन होता है वह स्थान सांसद की तुलना में छोटा होता है।
- विधायक केवल राज्य के बजट की योजना में भाग लेता है जबकि सांसद राष्ट्र बजट की योजनाओं में भाग लेता है। मतलब विधायक केवल राज्य के ही बजट योजना बनाते हैं लेकिन सांसद पूरे राष्ट्र की बजट योजना बनाता है।
इस प्रकार विधायक और संसद में मुख्य फर्क यह होता है कि विधायक केवल राज्य या प्रांत स्तर पर कार्य करता है लेकिन संसद पूरे राष्ट्रीय या पूरे देश मे कार्य करता है।


