गजल और गीत दोनों ही साहित्य और संगीत की बेहद खूबसूरत विधाएं हैं, लेकिन इनकी बनावट और आत्मा में गहरा अंतर होता है।
गजल (Ghazal): गजल मुख्य रूप से अरबी और फारसी साहित्य से आई है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका हर एक 'शेर' (Couplet) अपने आप में स्वतंत्र होता है। यानी एक गजल के पहले शेर में अगर मोहब्बत की बात है, तो दूसरे शेर में राजनीति या दर्शन की बात हो सकती है। गजल के लिए 'बह्र' (Meter), 'काफिया' (Rhyme) और 'रदीफ' के सख्त नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।
गीत (Geet): इसके विपरीत, गीत एक निरंतर प्रवाह में होता है। गीत का एक 'मुखड़ा' होता है और कई 'अंतरे' होते हैं, जो सभी एक ही विषय या भाव (Theme) से जुड़े होते हैं। गीत में भावनाओं का विस्तार होता है और यह शुरू से अंत तक एक ही कहानी या स्थिति को बयां करता है। गीत की भाषा अक्सर सरल और लोक-प्रधान होती है, जबकि गजल में शब्दों के चयन और गहराई पर अधिक ध्यान दिया जाता है।
सरल शब्दों में कहें तो, गजल मोतियों की एक माला है जहाँ हर मोती अलग रंग का हो सकता है, जबकि गीत एक नदी की तरह है जो एक ही दिशा में बहती है।