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Sks Jain

Mar 12, 2026entertainment

गजल और गीत में क्या फर्क है?

6 Answers
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@rajivkumar3910Nov 4, 2025

गजल = गजल एक ही बहर और वजन के साथ लिखे गए शेरों का समूह है हर ग़ज़ल को बगैर गीत गाया जा सकता है|

गजल में मिश्र, शेर, मुक्ता, मतला और बहर आदि का प्रयोग किया जाता है गजल कवियों को संगीत के बारे में अधिक जानने की जरूरत नहीं होती हैं|

गीत = स्वर और ताल से युक्त जो गाना होता है उसे गीत कहते हैं साहित्य की एक लोकप्रिय वीधी हैं इसमें एक मुख्य अंतर होता है गीत को सिर्फ गाया जाता है सुनाया नहीं जाता क्योंकि यह गाने के रूप में लिखा जाता है|

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@aanchalsingh1985Nov 4, 2025

हम हर गजल को बातोर और गीत गाया जा सकता है पर मगर हर गीत को गजल बना कर नहीं लाया जा सकता है। और गीत में छंद युक्त छंद मुक्त कुछ भी हो सकता है पर मगर लाय होना जरूरी होता है। और गजल कड़ाई से शुरू से अंत तक एक परिभाषित काव्य मीटर पर आधारित है। वहीं दूसरी तरफ गीत एक राग पर आधारित है जो गजल में व्यक्ति अपने सभी दोहे में अलग-अलग विचार ला सकता है लेकिन गीत में मोगुस जीत नहीं है.।

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@preetipatel2612Nov 4, 2025
हम ग़ज़ल को गीत के बिना गा सकते हैं लेकिन गीत को गजल बना कर नहीं गा सकते है। गीत -गीत छंद युक्त या छंद मुक्त किसी भी प्रकार की हो सकती है! पर इसमें लय होना अति आवश्यक है । गीत में सुर का होना भी वांछित है। लेकिन ग़ज़ल हज़ारों छंदों में से कुछ मुख्य छंदों को ही कहा जाता है। गीत बहुत लोकप्रिय होती है और गजल हमेशा दिल से गई जाती है!
 
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@poonampatel5896Nov 4, 2025

हम आपको गजल और गीत में फर्क बताते हैं हम ग़ज़ल को गीत के बिना गा सकते हैं लेकिन गीत का ग़ज़ल बनाकर नहीं गा सकते। हर गजल को बतौर गीत लगाया जा सकता है पर हर भी तो ग़ज़ल नहीं बनाया जा सकता है।

गीत : छंद युक्त या छंद मुक्त कुछ भी हो सकता है। पर लय होना जरूरी है। गीत में राग होना भी वंछित है।

पर गजल हजारों छंदों में से कुछ खास किस्म के छंद को ही कहा जाता है गजल के छंद को बहर कहते हैं जिसमे मतला, रदीफ , क़फिया और एक खास लघु गुरु क्रम होता है।

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@krishnapatel8792Nov 4, 2025

आप सभी ने गजल और गीत का नाम तो सुना ही होगा और बहुत से लोग यह समझते हैं कि गजल और गीत एक होता है तो मैं उनके जानकारी के लिए बता दूं कि गजल और बीच में फर्क होता है।

दोस्तों हम ग़ज़ल को गीत के बिना गा सकते हैं लेकिन गीत को गजल बना कर नहीं गा सकते हैं।

गीत में सुर का होना वांछित है लेकिन गजल हजारों छंदों में से कुछ मुख्य छंदों को भी कहा जा सकता है। इस प्रकार ग़ज़ल और गीत में काफी अंतर पाया जाता है।

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@rajeshyadav9188Mar 11, 2026

गजल और गीत दोनों ही साहित्य और संगीत की बेहद खूबसूरत विधाएं हैं, लेकिन इनकी बनावट और आत्मा में गहरा अंतर होता है।

गजल (Ghazal): गजल मुख्य रूप से अरबी और फारसी साहित्य से आई है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका हर एक 'शेर' (Couplet) अपने आप में स्वतंत्र होता है। यानी एक गजल के पहले शेर में अगर मोहब्बत की बात है, तो दूसरे शेर में राजनीति या दर्शन की बात हो सकती है। गजल के लिए 'बह्र' (Meter), 'काफिया' (Rhyme) और 'रदीफ' के सख्त नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।

गीत (Geet): इसके विपरीत, गीत एक निरंतर प्रवाह में होता है। गीत का एक 'मुखड़ा' होता है और कई 'अंतरे' होते हैं, जो सभी एक ही विषय या भाव (Theme) से जुड़े होते हैं। गीत में भावनाओं का विस्तार होता है और यह शुरू से अंत तक एक ही कहानी या स्थिति को बयां करता है। गीत की भाषा अक्सर सरल और लोक-प्रधान होती है, जबकि गजल में शब्दों के चयन और गहराई पर अधिक ध्यान दिया जाता है।

सरल शब्दों में कहें तो, गजल मोतियों की एक माला है जहाँ हर मोती अलग रंग का हो सकता है, जबकि गीत एक नदी की तरह है जो एक ही दिशा में बहती है।

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