अगर कर्ण कुरुक्षेत्र युद्ध में नहीं लड़ते, तो महाभारत की पूरी कहानी काफी बदल सकती थी।
सबसे बड़ा असर यह होता कि कौरव पक्ष काफी कमजोर पड़ जाता, क्योंकि कर्ण उनके सबसे शक्तिशाली योद्धाओं में से एक थे। Karna की गैरमौजूदगी में Duryodhana को बड़ा नुकसान होता और पांडवों की जीत आसान हो सकती थी।
दूसरी तरफ, अगर कर्ण युद्ध में नहीं लड़ते या पांडवों का साथ दे देते (क्योंकि वह असल में कुंती के पुत्र थे), तो कहानी पूरी तरह पलट सकती थी। उस स्थिति में Arjuna और कर्ण आमने-सामने नहीं आते और कौरव जल्दी हार सकते थे।
साथ ही, कर्ण की वजह से युद्ध में जो बड़े-बड़े मोड़ आए, जैसे अर्जुन के साथ उनका युद्ध, वो नहीं होते, जिससे युद्ध छोटा और कम विनाशकारी हो सकता था।
कर्ण का युद्ध में होना ही कौरवों की सबसे बड़ी ताकत था—अगर वो नहीं होते, तो पांडवों की जीत और भी जल्दी और आसान हो जाती।





