चंद्रयान 2 भारत के स्पेस मिशन का एक सबसे इम्पोर्टेन्ट मिशन माना जाता है। इस मिशन में चंद्रयान के जरिये विक्रम को चंद्र के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करना था जिस में एक रोवर प्रज्ञान था जो की चंद्र के इस भूभाग पर घूमकर वहां की ज़मीं पर पड़ताल करनी थी। सब कुछ प्लान के मुताबिक़ ही चल रहा था और इसी प्लान के चलते 6 सितम्बर रात 1.30 से 2.30 बजे के बीच विक्रम को चंद्र पर लैंड करना था।
सौजन्य: जनसत्ता
इस ऐतिहासिक मौके के साक्षी बनने देश के प्रधानमंत्री खुद इसरो के बैंगलोर कार्यालय पर मौजूद थे।
चंद्रयान अभी चंद्र के सतह से करीब 2.5 किलोमीटर ही दूर था की अचानक कुछ टेक्निकल गड़बड़ी के चलते विक्रम से इसरो का संपर्क टूट गया। वैज्ञानिक काफी मायूस हो गए और इस बात की जानकरी प्रोजेक्ट इंचार्ज और इसरो के अध्यक्ष के सिवन ने प्रधानमंत्री को दी। उसके बाद आधिकारिक तौर पर उन्होंने बयान दिया की विक्रम से इसरो का संपर्क टूट गया है। प्रधानमंत्री और पुरे देश ने इन वैज्ञानिको की महेनत की फिर भी तारीफ की। हालाँकि ऐसा बिलकुल नहीं है की विक्रम से वापिस संपर्क नहीं हो सकता पर कब होगा यह कहना मुश्किल है।
