तो दोस्तों चलिए आज हम आपको चंद्रशेखर आजाद के बारे में बताते हैं और यह भी बताएंगे कि महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद ने कौन सा नारा दिया था। दोस्तों आजाद चंद्रशेखर के बारे में तो आप सभी ही जानते क्योंकि वह एक महान क्रांतिकारी थे उनका हमेशा से एक ही कहना था कि वह आजाद थे आजाद है और आजाद रहेंगे कभी भी जीते जीत अंग्रेजी हुकूमत के हाथों में नहीं आएंगे। इसके अतिरिक्त चंद्रशेखर आजाद ने एक नारा भी दिया था और वह नारा इंकलाब जिंदाबाद का था जो स्वतंत्रता के संघर्ष के समय बहुत प्रसिद्ध हो गया था और लोगों ने उनके वीरता और उनके संघर्ष की भावना को उत्तेजित कर दिया था। चंद्रशेखर आजाद मात्र 24 साल की उम्र में स्वतंत्रता के संग्राम में लड़ते-लड़ते शहीद हो गए थे।लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि वह अंग्रेजों के हाथों शहीद नहीं हुए थे जब उन्हें लगा कि अब मै अंग्रेज के हाथों में पकड़ आ जाऊंगा और वह मुझे अपने हाथों मार देंगे जैसा कि आप जानते हैं कि वह अंग्रेजों के हाथों नहीं मरना चाहते थे इस कारण उन्होंने खुद अपने हाथों से मस्तिष्क में गोली मारकर शहीद हो गए थे।
चलिए हम आपको चंद्रशेखर से जुड़ी कुछ और जानकारियां देते हैं :-
चंद्रशेखर आजाद का जन्म 28 जुलाई 1906 को अलीराजपुर के भवर गांव में एक ब्राह्मण के परिवार में हुआ था। चंद्रशेखर आजाद का जन्म का नाम चंद्रशेखर तिवारी था लेकिन असहयोग आंदोलन के दौरान उन्होंने अपने नाम के आगे आजाद जोड़ लिया था।चंद्रशेखर आजाद एक ऐसे महान और युवा क्रांतिकारी थे जो अपने देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते अपनी जान दे दिए थे कम उम्र में देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि चंद्रशेखर आजाद की मृत्यु 27 फरवरी 1931 को प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क में हुई थी।




