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| Updated on April 12, 2024 | entertainment

महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद ने कौन सा नारा दिया था ?

4 Answers
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@kirankushwaha3551 | Posted on April 9, 2024

तो दोस्तों चलिए आज हम आपको चंद्रशेखर आजाद के बारे में बताते हैं और यह भी बताएंगे कि  महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद ने कौन सा नारा दिया था। दोस्तों आजाद चंद्रशेखर के बारे में तो आप सभी ही जानते क्योंकि वह एक महान क्रांतिकारी थे उनका हमेशा से एक ही कहना था कि वह आजाद थे आजाद है और आजाद रहेंगे कभी भी जीते जीत अंग्रेजी हुकूमत के हाथों में नहीं आएंगे। इसके अतिरिक्त चंद्रशेखर आजाद ने एक नारा भी दिया था और वह नारा  इंकलाब जिंदाबाद  का था जो स्वतंत्रता के संघर्ष के समय बहुत प्रसिद्ध हो गया था और लोगों ने उनके वीरता और उनके संघर्ष की भावना को उत्तेजित कर दिया था। चंद्रशेखर आजाद मात्र 24 साल की उम्र में स्वतंत्रता के संग्राम में लड़ते-लड़ते शहीद हो गए थे।लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि  वह अंग्रेजों के हाथों शहीद नहीं हुए थे जब उन्हें लगा कि अब मै अंग्रेज के हाथों में पकड़ आ जाऊंगा और वह मुझे अपने हाथों मार देंगे जैसा कि आप जानते हैं कि वह अंग्रेजों के हाथों नहीं मरना चाहते थे इस कारण उन्होंने खुद अपने हाथों से मस्तिष्क में गोली मारकर शहीद हो गए थे।

 

 चलिए हम आपको चंद्रशेखर से जुड़ी कुछ और जानकारियां देते हैं :-

 चंद्रशेखर आजाद का जन्म 28 जुलाई 1906 को अलीराजपुर के भवर गांव में एक ब्राह्मण के परिवार में हुआ था। चंद्रशेखर आजाद का जन्म का नाम चंद्रशेखर तिवारी था लेकिन असहयोग आंदोलन के दौरान उन्होंने अपने नाम के आगे आजाद जोड़ लिया था।चंद्रशेखर आजाद एक ऐसे महान और युवा  क्रांतिकारी थे जो अपने देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते अपनी जान दे दिए थे कम उम्र में देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि चंद्रशेखर आजाद की मृत्यु 27 फरवरी 1931 को प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क में हुई थी।

 

 

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@meenakushwaha8364 | Posted on April 9, 2024

महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद का नारा मै आजाद हूँ और आजाद ही रहूँगा।


चंद्रशेखर आजाद का जन्म सर्वप्रथम 23 जुलाई 1906 क़ो मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के भाबरा नामक गांव मे जन्म हुआ था,14साल की उम्र में चंद्रशेखर आजाद गांधी जी के असहयोग आंदोलन मे शामिल हो गये और देश  की आजादी के लिए चंद्रशेखर आजाद ने कुर्बानी दी और अंग्रेजो के कैद मे चंद्रशेखर आजाद आये तो उन्हें 15 कोड़े मारने की सज़ा मिली।

 

14 वर्ष की उम्र में ही चंद्रशेखर आज़ाद गिरफ्तार हो गये और जज ने चंद्रशेखर आज़ाद से पूछा कि आपके पिता का नाम क्या है तो चंद्रशेखर ने कहा मेरे पिता नाम 'स्वतंत्रता' है और जज ने पूछा कि आपके घर का पता क्या है तो उन्होंने पता जेल बताया।जज ने उनकी बात सुनकर चंद्रशेखर आज़ाद क़ो 15 कोड़े लगाने की सजा दी और उनके पीठ मे 15 कोड़े मारे गये और लेकिन चंद्रशेखर कोड़े खाते हुए वंदे मातरम् का नाम ले रहे थे।उसी दिन से सारे देशवासी चंद्रशेखर क़ो आज़ाद के नाम से पुकारने लगे।

 

सन 1928 में साइमन कमीशन के ब्रिटिश शासन द्वारा  लाठी चार्ज में ज़ब लाला लाजपत राय घायल होने कारण उनकी मौत हो गयी। तभी लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए सुखदेव ,राजगुरु ने षडयंत्र रचा  और चंद्रशेखर आजाद ने सुखदेव का साथ इस मिशन मे शामिल हुए।वही 17 दिसंबर, 1928 को लाहौ के पुलिस सॉन्डर्स क़ो दफ्तर मे जाकर उसको चारों तरफ से घेर कर राजगुरु, सुखदेव और चंद्रशेखर ने सॉन्डर्स पर गोली चलाकर लाला लाजपत राय की मौत का बदला ले लिया।

 

27 फरवरी वर्ष 1931 को ज़ब चंद्र शेखर आजाद इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अपने मित्रो के साथ आजादी के विषय मे बात कर रहे थे तो उसी वक़्त अंग्रेज सिपाहियों ने उनके मित्रो और चंद्रशेखर आज़ाद क़ोघेर लिये थे। तभी अंग्रेज सिपाहियों ने चंद्रशेखर आजाद पर गोली चलाये लेकिन चंद्रशेखर आजाद ने अंग्रेजो पर गोली चलायी। लेकिन चंद्रशेखर आज़ाद के मित्र सुखदेव अल्फ्रेड पार्क से भाग गये,चंद्रशेखर आजाद की बिस्तौल मे लास्ट गोली बची थी तो अंग्रेजों के हाथ आने से पहले ही चंद्रशेखर आज़ाद ने खुद क़ो गोली मारकर आत्महत्या कर ली।

 

 

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@krishnapatel8792 | Posted on April 10, 2024

जैसा कि आप जानते हैं कि हमारे भारत देश को आजाद करने के लिए कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी थी उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों में से एक है आजाद चंद्रशेखर। चंद्रशेखर आजाद का असली नाम चंद्रशेखर तिवारी था। चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई सन 1906 को मध्य प्रदेश के भाबरा गांव में हुआ था। चंद्रशेखर आजाद बचपन से ही काफी जिद्दी और विद्रोही स्वभाव के थे।

 

चलिए दोस्तों अब हम आपको बताते हैं कि महान क्रांतिकारी आजाद चंद्रशेखर ने कौन सा नारा दिया था:-

आजाद चंद्रशेखर का नारा था:- मैं आजाद हूं, आजाद रहूंगा और आजाद ही मारूंगा; दोस्तों यह नारा था भारत की आजादी के लिए अपनी जान की कुर्बानी देने वाले देश के महान क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद का।

 

आईऐ अब हम आपको बताते हैं कि चंद्रशेखर तिवारी को कैसे मिला आजाद का नाम:-

दोस्तों यह बात उसे समय की है जब 1921 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से जुड़ने के बाद उनकी गिरफ्तारी हुई थी। उसे समय जब उन्हें जज के सामने पेश किया गया,तोउनके जवाब सुनकर सबके होश उड़ गए थे क्योंकि जब उनसे नाम पूछा गया तो उन्होंने अपना नाम आजाद, और अपने पिता का नाम स्वतंत्रता बताया। चंद्रशेखर के इस जवाब से जज भी काफी नाराज हो गए थे और चंद्रशेखर आजाद को 15 कोड करने की सजा सुनाई। इस घटना के बाद से ही चंद्रशेखर तिवारी को दुनिया चंद्रशेखर आजाद के नाम से जानने लगे।

 

मैं आपको बताना चाहूंगी कि चंद्रशेखर आजाद कैसे शहीद हुए थे:-

दोस्तों यह बात 27 फरवरी सन 1931 की है जब आजाद चंद्रशेखर अंग्रेजों के साथ लड़ाई करते हुए हमेशा के लिए इतिहास में अपना नाम अमर कर गए। चंद्रशेखर आजाद का अंतिम संस्कार भी अंग्रेज सरकार ने बिना किसी सूचना के कर दिया। और जैसे ही लोगों को इस बात की जानकारी मिली तो सड़कों पर लोगों का जमावड़ा लग गया और हर व्यक्ति शोक की लहर में डूब गया।

 

 

 

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@janukushwaha3430 | Posted on April 11, 2024

तो चलिए दोस्तों आज हम आपको बताते हैं कि महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद ने कौन सा नारा लगाया था। चंद्रशेखर आजाद का नारा था कि आजाद हूं, आजाद रहूंगा, और आजाद मारूंगा। तो चलिए दोस्तों हम आपको बताते हैं कि चंद्रशेखर का जन्म कब हुआ- चंद्रशेखर का जन्म सर्वप्रथम 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के भाबरा नामक गांव में जन्म हुआ था, जैसे की 14 साल की उम्र में चंद्रशेखर आजाद गांधी जी के सहयोग आंदोलन में शामिल हो गए, और देश की आजादी के लिए चंद्रशेखर आजाद ने  कुर्बानी दी और अंग्रेजों के कैद मैं चंद्रशेखर आजाद आए तो उन्हें 15 कोड़े मारने  की सजा मिली। दोस्तों चंद्रशेखर आजाद के बारे में एक नारा और दिया था, और वह नारा इंकलाब जिंदाबाद का था। जो स्वतंत्रता के संघर्ष के समय बहुत प्रसिद्ध  हो गया था और लोगों नें उनके वीरता और उनके संघर्ष की भावना को उत्तेजित कर दिया था। और एक बात यह है कि चंद्रशेखर आजाद ने अंग्रेजों के हाथों नहीं मरना चाहते थे इस कारण उन्होंने खुद अपने हाथों से मस्तिक में गोली मार कर शहीद हो गए थे। चंद्रशेखर आजाद मात्र 24 साल की उम्र में स्वतंत्रता के संग्राम में लड़ते-लड़ते शहीद हो गए थे। दोस्तों एक बात और बता दूँ कि1928 मैं साइमन कमीशन के ब्रिटिश शान द्वारा लाठी चार्ज में जब लाला लाजपत राय घायल होने के कारण उनकी मौत हो गई। तभी लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए सुखदेव, राजगुरु ने षड्यंत्र रक्षा और चंद्रशेखर आजाद ने सुखदेव का साथ इस मिशन में शामिल हुए। तो चलिए दोस्तों मैं आपको एक और जानकारी देने जा रही हूं, चंद्रशेखर आजाद की मृत्यु कब हुई, चंद्रशेखर आजाद की मृत्यु 27 फरवरी 1931 को प्रयागराज के  अल्फ्रेड पार्क में हुई थी। चंद्रशेखर आजाद की पिस्तौल में लास्ट गोली बची थी तो अंग्रेजों के हाथ आने से पहले ही चंद्रशेखर आजाद ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली।

 

 

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