समुद्र मंथन से कौन सा भयानक विष निकला था?
हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार सागर मंथन असुरों और देवताओं द्वारा संपन्न किया गया था। इस मंथन में अनेक प्रकार के रतन सागर से निकले। इन्हीं रत्नों में से हलाहल विष को माना जाता है। इस रतन के निकलते ही संपूर्ण ब्रह्मांड में हाहाकार मच गया देवताओं असुरो द्वारा प्रार्थना करने पर भगवान शिव द्वारा इसे अपने कंठ में धारण किया गया और इसके प्रभाव से भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया और भगवान शिव नीलकंठ कहाए।
जैसा कि आप सभी जानते हैं कि समुद्र मंथन सावन के महीने में हुआ था क्या आप जानते हैं कि समुद्र मंथन में कौन सा भयानक विष निकला था शायद आपको इसकी जानकारी नहीं होगी तो चलिए हम आपको बताते हैं कि उस भयानक जिसका नाम हलाहल नामक विष निकला था जिसकी ज्वाला इतनी भयानक थी कि सभी देवी देवता दैत्य राक्षस उसकी तेज वाला को देखकर चलने लगे थे तभी सभी देवी देवता और दैत्य भगवान शिव जी के पास मदद लेने गए तभी भगवान शिव जी ने उस हलाहल को पीकर अपने कंठ में धारण कर लिया तबसे भगवान शिव जी का नाम नीलकंठ पड़ गया।
