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Updated on Mar 18, 2024others

माता दुर्गा किसका अवतार थीं ?

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Modern India Explorer
Answered on Mar 18, 2024

चलिए दोस्तों अब हम आपको बताते हैं की माता दुर्गा किसका अवतार थी।

 दोस्तों आप सभी जानते हैं की नवरात्रि हर वर्ष मे दो बार आती है। नवरात्रि में माता दुर्गा की पूजा की जाती है ऐसा माना जाता है कि इस समय माता दुर्गा हर स्थान पर विराजमान होती है इसलिए लोग अपने-अपने घरों में मां दुर्गा की मूर्ति रखते हैं और नियम अनुसार पूजा,पाठ, आरती करते हैं। इतना ही नहीं यहां तक की कई घर के लोग तो नवरात्री मे मां दुर्गा का व्रत भी रखते हैं। मा दुर्गा के लाखों करोड़,श्रद्धालु होते हैं। दोस्तों मां दुर्गा की पूजा तो सभी कोई करता है पर किसी को यह नहीं पता होता है की मां दुर्गा किसका अवतार थीं।

 

मां दुर्गा माता पार्वती की अवतार थी। इसलिए माता दुर्गा जब भी अवतार लेती है भगवान शिव जी से विवाह करते हैं। मां दुर्गा भगवान शिव की शक्ति है और उनकी अर्धांगिनी भी हैं।

 

इसके अतिरिक्त मां दुर्गा ने नौ अवतार लिए हैं और वह नौ अवतार अलग-अलग रूपों में ली है। चलिए हम मां दुर्गा के नव अवतारों के बारे में बताते हैं-

 मां दुर्गा का पहला अवतार शैलीपुत्री के रूप में हुआ था और यह अवतार सती के रूप में माना जाता है।

 मां दुर्गा का दूसरा अवतार ब्रह्मचारिणी के रूप में हुआ था।

 दुर्गा का तीसरा अवतार चंद्रघंटा के रूप में हुआ था इसका मतलब उनके मस्तक पर चंद्र के आकार का तिलक है।

 मां दुर्गा का चौथा अवतार कुष्मांडा के रूप में हुआ था। मां दुर्गा का कुष्मांडा नाम इसलिए रखा गया क्योंकि वह उदर से अंड तक अपने अंदर ब्रह्मांड को समेटी हुई है।

 मां दुर्गा का पांचवा अवतार स्कंदमाता के रूप में हुआ। स्कंदमाता का मतलब हुआ कि वह स्कंद की माता है इसलिए उनका नाम स्कंदमाता  है।

 मां दुर्गा का छटवा अवतार कात्यानी के रूप में हुआ था।

 मां दुर्गा का सातवां अवतार कालरात्रि के रूप में हुआ। इनका नाम कालरात्रि इसलिए है क्योंकि,यह हर संकट, हर काल का विनाश कर देती हैं।

 मां दुर्गा का आठवां अवतार महागौरी के रूप मे हुआ।

नौवा अवतार सिद्ध रात्रि के रूप में हुआ था।

 

 

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Answered on Mar 18, 2024

हिंदू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व है और हर देवी देवताओं का भी एक विशेष महत्व है। 

सतयुग मे भगवान के जन्म ना होकर वह अवतार ले कर असुरो का विनाश करते थे । भगवान शिव ने रुद्र अवतार लेकर दूषण असुर का वध किया था। रुद्र अवतार को भगवान शिव का प्रथम अवतार माना जाता हैं। इसी प्रकार भगवान शिव ने त्रेता युग में कुल 10 अवतार लिए और असुरो का नाश किया। 

भगवान शिव ने राजा हिमालय की पुत्री पार्वती से विवाह कर उन्हे अपनी जीवन संगिनी बनाया था। 

माता पार्वती ने भी असुरो के नाश और सृष्टि का कल्याण करने के लिए 9 रूपों मे अवतार लिया। वह नौ रूपों की पूजा हम नौ रात्रि मे करते है। 

 

प्रथम शैलपुत्री, द्वितीय ब्रहमचारिणी, तृतीय चंद्रघंटा, चतुर्थ कुष्मांडा, पंचम स्कन्दमाता, षष्टि कत्यायिनी, सप्तम कालरात्रि, अष्टम महागौरी, नवम सिद्धिदात्री। 

लेकिन हिमानी जी के प्रश्न अनुसार के माता दुर्गा किसका रूप है तो उनके प्रश्नानुसार, माता दुर्गा भी शिव जी पत्नी माता पार्वती का ही एक रूप है । 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिषासुर ने ब्रह्मा जी तपस्या करके यह वरदान माँग लिया था कोई भी उसका वध नही कर पाए । उसका वध केवल अजन्मि और अविवाहित स्त्री के द्वारा ही हो। ब्रह्मा जी ने उसे वरदान दे दिया। इसके बाद महिषासुर ने सृष्टि पर अत्याचार करना प्रारंभ कर दिया। 

सभी देवगण और ऋषि, मुनि अपना बचाव करने के लिए शिव जी और माता पार्वती के पास आये और अपनी समस्या बतायी। 

तब शिव और पार्वती ने एक होकर अर्धनारिश्वर का रूप धारण किया और माता पार्वती के अंग से स्त्री अंश को निकाल दिया। 

और जो स्त्री अंश निकला उससे माँ दुर्गा का अवतरण हुआ। माँ दुर्गा का जन्म ना होकर उनका अवतरण हुआ था इसलिए वह महिषासुर का वध कर सकती थी। 

सभी देवताओ ने उन्हे अस्त्रों की भेंट दी और महिषासुर का वध करने के लिए भेजा और माँ दुर्गा ने जाकर असुर  महिषासुर का वध कर दिया। 

 

 

 

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