हिंदू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व है और हर देवी देवताओं का भी एक विशेष महत्व है।
सतयुग मे भगवान के जन्म ना होकर वह अवतार ले कर असुरो का विनाश करते थे । भगवान शिव ने रुद्र अवतार लेकर दूषण असुर का वध किया था। रुद्र अवतार को भगवान शिव का प्रथम अवतार माना जाता हैं। इसी प्रकार भगवान शिव ने त्रेता युग में कुल 10 अवतार लिए और असुरो का नाश किया।
भगवान शिव ने राजा हिमालय की पुत्री पार्वती से विवाह कर उन्हे अपनी जीवन संगिनी बनाया था।
माता पार्वती ने भी असुरो के नाश और सृष्टि का कल्याण करने के लिए 9 रूपों मे अवतार लिया। वह नौ रूपों की पूजा हम नौ रात्रि मे करते है।
प्रथम शैलपुत्री, द्वितीय ब्रहमचारिणी, तृतीय चंद्रघंटा, चतुर्थ कुष्मांडा, पंचम स्कन्दमाता, षष्टि कत्यायिनी, सप्तम कालरात्रि, अष्टम महागौरी, नवम सिद्धिदात्री।
लेकिन हिमानी जी के प्रश्न अनुसार के माता दुर्गा किसका रूप है तो उनके प्रश्नानुसार, माता दुर्गा भी शिव जी पत्नी माता पार्वती का ही एक रूप है ।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिषासुर ने ब्रह्मा जी तपस्या करके यह वरदान माँग लिया था कोई भी उसका वध नही कर पाए । उसका वध केवल अजन्मि और अविवाहित स्त्री के द्वारा ही हो। ब्रह्मा जी ने उसे वरदान दे दिया। इसके बाद महिषासुर ने सृष्टि पर अत्याचार करना प्रारंभ कर दिया।
सभी देवगण और ऋषि, मुनि अपना बचाव करने के लिए शिव जी और माता पार्वती के पास आये और अपनी समस्या बतायी।
तब शिव और पार्वती ने एक होकर अर्धनारिश्वर का रूप धारण किया और माता पार्वती के अंग से स्त्री अंश को निकाल दिया।
और जो स्त्री अंश निकला उससे माँ दुर्गा का अवतरण हुआ। माँ दुर्गा का जन्म ना होकर उनका अवतरण हुआ था इसलिए वह महिषासुर का वध कर सकती थी।
सभी देवताओ ने उन्हे अस्त्रों की भेंट दी और महिषासुर का वध करने के लिए भेजा और माँ दुर्गा ने जाकर असुर महिषासुर का वध कर दिया।

