बात 1761 ईस्वी की है जब पानीपत का तीसरा युद्ध चल रहा था । कहा जाता है कि इस युद्ध में मराठा हार गए थे जिसके बाद अहमद शाह अब्दाली 22 हजार मराठा औरतों को किडनैप कर अफगानिस्तान लेकर जा रहा था । जो सिक्खों को किसी भी तरह से गवारा नहीं था । यह बात किसी तरह से सिक्ख तक पहुंची और उन्होंने अपने औरतों को छुड़ाने का प्लान बनाया ।

अहमद शाह अब्दाली इन औरतों को लेजाकर अफगानिस्तान में बेचना चाहता था । साथ ही अपने सैनिकों का हवस भी पूरी करवाना चाहता था । हमारे देश के सिक्ख सैनिकों ने बड़ी ही सूझ बूझ से एक जत्था बनाया और अफगानी पर हमला कर दिया । जिसके बाद यह हुआ कि अफगानी सैनिकों को हार माननी पड़ी और वे स्त्रियों सहित लूटा हुआ धन छोड़कर दूर भाग खड़े हुए ।
अहमद शाह अब्दाली सिक्खों से इस लड़ाई में पराजय के बाद बहुत ही नाराज था । जिसका बदला लेने के लिए उसने फिर से अपनी एक विशाल सेना तैयार की और सियालकोट के किले पर आक्रमण बोल दिया । यह युद्ध चेनाब नदी के किनारे हो रहा था । अचानक से हुए इस युद्ध में सिक्ख सैनिक बहुत ही कम संख्या में थे । लेकिन सिक्ख सैनिक अपनी वीरता का परिचय देते हुए लड़ें और एक बार फिर उन्हे भगाने में कामियाब हुए । नसीरुद्दीन इस लड़ाई से इतना डर गया था कि अपने सैनिकों के साथ वह देश छोड़ने में ही भलाई समझा ।

यह सभी लड़ाई पानीपत के तृतीय युद्ध के बाद ही हो रही थी। बताया जाता है कि उस समय अपने देश में सबसे शक्ति शाली सेना सिक्खों के पास थी । जिसने एक बार नही बल्कि कई बार अफगान सैनिक को पराजित किया था । बाजीराव पेशवा उस समय के मराठा सैनिक का नेतृत्व कर रहें थे ।


