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chhavi tyagi

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नवरात्री के पवन पर्व में गरबा क्यों खेला जाता है ?


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नवरात्रि के नौ दिनों में रंगबिरंगे कपड़े और देवी पूजन और सबसे महत्वपूर्ण है गरबा । वर्तमान समय में लोग नवरात्री का इन्तजार करते हैं, ताकि वह ख़ुशी से और उत्साह के साथ गरबा खेल सके । नवरात्रि के इन नौ दिनों में गरबा खेलने का अलग ही उत्साह होता है । अलग-अलग रंग की पोषक पहनी जाती है । वैसे तो गरबा गुजरात का प्रसिद्द खेल या नृत्य भी कहा जा सकता है, है परन्तु अब इसकी भारत ही नहीं बल्कि विश्व में कई जगह अच्छी धाक बन गई है ।


Letsdiskuss(Image - Giphy )


नवरात्रि में गरबा क्यों खेला जाता है ? 

पहले भगवान को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की जाती है और अगर भगवान प्रसन्न न हो तो उनके सामने नृत्य कर उन्हें प्रसन्न किया जाता था । माता की पूजा करने के साथ-साथ नृत्य करना भी पूजा का एक हिस्सा माना जाता है । गरबा गुजरात का प्रसिद्द नृत्य है और गुजरात के लोगों का मानना है कि गरबा से माँ अम्बे प्रसन्न होती हैं इसलिए गरबा किया जाता है ।

(IMAGE - YOUTUBE)

गरबा को गर्भ - दीप कहते हैं ,और गर्भ का अर्थ उत्पत्ति और दीप का अर्थ उजाले का प्रतीक होता है । कहते हैं माँ से संसार की उत्पत्ति हुई है और हमारी दुनिया माँ के चारों और घूमती रहती है । इंसान का जन्म लेना और उसकी मृत्यु यह दोनों इसी धरती का सबसे बड़ा सच है, और मानव का सम्पूर्ण जीवन माँ के चारों और है , इसलिए माँ अम्बे की उपासना करने के लिए गरबा खेला जाता है और इस खेल में माता के चारों और चक्कर लगाया जाता है ।

गरबा करती हुई महिलाओं को देखा होगा वो हमेशा ताली तीन बार मारती है । पहली ताली ब्रह्म देव के लिए है, जिसका अर्थ इच्छा ,वहीँ दूसरी ताली का अर्थ विष्णु से माना गया है , जिसका अर्थ मनुष्य के जीवन शक्ति के रूप में माना गया है और तीसरी ताली भगवान शिव जो कि ज्ञान रुपी वरदान के रूप में माने गए हैं ।

सभी बातों को ध्यान में रखते हुए , आज के समय में गरबा मनोरंजन का साधन बन गया है । 




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