Golf को अक्सर “अमीरों का खेल” कहा जाता है, और इसके पीछे कई ऐतिहासिक, आर्थिक और सामाजिक कारण हैं। यह खेल जितना शांत और तकनीकी है, उतना ही महंगा और सुविधाजनक भी माना जाता है।
सबसे बड़ा कारण है इसकी खेलने की लागत। गोल्फ खेलने के लिए बड़े और हरे-भरे मैदान (golf course) की जरूरत होती है, जिन्हें बनाए रखना बहुत महंगा होता है। इन कोर्स में घास की देखभाल, पानी, स्टाफ और मेंटेनेंस पर बहुत खर्च आता है। इसलिए ये आमतौर पर बड़े क्लब्स या प्राइवेट प्रॉपर्टीज में ही पाए जाते हैं, जहां सदस्यता फीस काफी ज्यादा होती है।
दूसरा कारण है इसका उपकरण। गोल्फ खेलने के लिए खास तरह के क्लब्स (sticks), गेंद और बैग की जरूरत होती है, जो काफी महंगे होते हैं। प्रोफेशनल लेवल पर यह खर्च और भी बढ़ जाता है क्योंकि खिलाड़ी कई तरह के अलग-अलग क्लब्स इस्तेमाल करते हैं।
तीसरा कारण है क्लब मेंबरशिप और एंट्री फीस। गोल्फ क्लब्स में खेलने के लिए सदस्य बनना पड़ता है, जिसकी फीस आम लोगों के लिए काफी ऊंची होती है। कई देशों में यह खेल निजी क्लबों तक सीमित रहा है, जिससे यह एक “एलीट स्पोर्ट” की छवि बन गई।
इतिहास की बात करें तो गोल्फ की शुरुआत यूरोप में हुई थी और यह लंबे समय तक राजा-महाराजाओं और उच्च वर्ग के लोगों का खेल माना जाता रहा। इसी वजह से इसकी छवि आज भी “अमीरों के खेल” के रूप में बनी हुई है।
इसके अलावा गोल्फ खेलने के लिए समय भी बहुत चाहिए होता है। एक पूरा गेम कई घंटों तक चलता है, इसलिए यह उन लोगों के लिए ज्यादा आसान होता है जिनके पास फ्री टाइम और सुविधाएं होती हैं।
हालांकि आज के समय में स्थिति बदल रही है। कई देशों में गोल्फ को अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए स्कूल, ट्रेनिंग सेंटर और सस्ते कोर्स बनाए जा रहे हैं। भारत जैसे देशों में भी यह खेल धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहा है।
अगर आसान भाषा में समझें तो गोल्फ को अमीरों का खेल इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें महंगे मैदान, महंगे उपकरण, क्लब मेंबरशिप और ज्यादा समय की जरूरत होती है। लेकिन आज यह खेल धीरे-धीरे हर वर्ग के लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है और इसकी छवि बदल रही है।