छायावाद और रहस्यवाद में अंतर-
- छायावाद में प्रकृति मूलक होती है प्रकृति मूलक होने से तात्पर्य जिस घटना का छायावाद में चित्रण किया जाता है उसकी प्रकृति अथवा स्वभाव को घटना में जरूर बताया जाता है जबकि, रहस्यवाद में घटनाओं की प्रकृति को दार्शनिक तरीके से बताया जाता है।
- छायावाद कविता में प्रेम और सौंदर्य के अति सूक्ष्म अंकन होता है। जबकि रहस्यवाद में विरह वेदना की अभिव्यक्ति होती है।
- छायावाद में जिस घटना का वर्णन किया जाता है,इसमें आत्मा को रूबरू किया जाता है।अर्थात आत्मा के दर्शन होते हैं। आप कर सकते हैं कि छायावाद में किसी घटना को आत्मा से दूसरी आत्मा तक काल्पनिक तरीके से पहुंचाया जाता है, जबकि रहस्यवाद में ईश्वर की आभा के दर्शन होते हैं आभा से तात्पर्य ईश्वर का आभास होता है।
- छायावाद में स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह के बारें में वर्णन किया गया है, जबकि रहस्यवाद में घटना के कण -कण में ईश्वर के होने का आभास के बारें में बताया गया है।




