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preeti  patel's avatar
Mar 11, 2026education

रहस्यवाद एवं छायावाद में अंतर लिखिए!

3 Answers
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@preetipatel2612Nov 15, 2021

छायावादऔर रहस्यवाद -(1) इसने कल्पना की प्रधानता होती है! इसमें चिंतन की प्रधानता होती हैं!
(2) इसमें भावना की प्रधानता होती है जिसमें भाव व्यक्त होते हैं! रहस्यवाद में ज्ञान एवं बुद्धि की प्रधानता होती हैं!
(3) छायावाद में प्राकृतिक मूलांक है! और रहस्यवाद में प्राकृतिक दर्शनी होती है!
(4) छायावाद कविता में प्रेम और सौंदर्य का अति सूक्ष्म अंकन होता है! रहस्यवाद में विरह वेदना की अभिव्यक्ति होती है!
(5) सुमित्रानंदन पंत,सूर्यकांत त्रिपाठी, यह सभी छायावाद के प्रमुख कवि हैं! आचार्य रामचंद्र शुक्ल, बाबू गुलाब राय, रहस्यवाद के प्रमुख कवि माने जाते हैं!Article image

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@poonampatel5896Oct 28, 2023

छायावाद और रहस्यवाद में अंतर-

  • छायावाद में प्रकृति मूलक होती है प्रकृति मूलक होने से तात्पर्य जिस घटना का छायावाद में चित्रण किया जाता है उसकी प्रकृति अथवा स्वभाव को घटना में जरूर बताया जाता है जबकि, रहस्यवाद में घटनाओं की प्रकृति को दार्शनिक तरीके से बताया जाता है।
  • छायावाद कविता में प्रेम और सौंदर्य के अति सूक्ष्म अंकन होता है। जबकि रहस्यवाद में विरह वेदना की अभिव्यक्ति होती है।
  • छायावाद में जिस घटना का वर्णन किया जाता है,इसमें आत्मा को रूबरू किया जाता है।अर्थात आत्मा के दर्शन होते हैं। आप कर सकते हैं कि छायावाद में किसी घटना को आत्मा से दूसरी आत्मा तक काल्पनिक तरीके से पहुंचाया जाता है, जबकि रहस्यवाद में ईश्वर की आभा के दर्शन होते हैं आभा से तात्पर्य ईश्वर का आभास होता है।
  • छायावाद में स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह के बारें में वर्णन किया गया है, जबकि रहस्यवाद में घटना के कण -कण में ईश्वर के होने का आभास के बारें में बताया गया है।

Letsdiskuss

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@rajeshyadav9188Mar 11, 2026

हिंदी साहित्य के आधुनिक काल में छायावाद और रहस्यवाद दो ऐसी प्रमुख काव्य धाराएं हैं जो देखने में एक जैसी लगती हैं, लेकिन इनकी आत्मा और अभिव्यक्ति में गहरा अंतर है। इन दोनों के सूक्ष्म भेद को समझना साहित्य के विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य है।

छायावाद और रहस्यवाद के बीच मुख्य अंतर:

  • विषय वस्तु (Subject Matter): छायावाद मुख्य रूप से लौकिक (Worldly) प्रेम और प्रकृति के मानवीकरण पर आधारित है। इसमें कवि अपनी व्यक्तिगत खुशियों, दुखों और सौंदर्य को प्रकृति के माध्यम से व्यक्त करता है। इसके विपरीत, रहस्यवाद अलौकिक (Divine) प्रेम की अभिव्यक्ति है, जहाँ कवि अपनी आत्मा का मिलन उस अज्ञात 'परमात्मा' से कराने की तड़प दिखाता है।

  • दृष्टिकोण (Perspective): छायावाद में कल्पना और सौंदर्यबोध की प्रधानता होती है; यह 'स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह' है। रहस्यवाद में 'जिज्ञासा' और 'साधना' मुख्य होती है। छायावादी कवि प्रकृति में खुद को देखता है, जबकि रहस्यवादी कवि प्रकृति के कण-कण में उस अदृश्य ईश्वर की सत्ता को खोजता है।

  • अनुभूति और अभिव्यक्ति: छायावाद व्यक्तिपरक (Subjective) होता है, जिसमें मानवीय प्रेम की प्रधानता है। रहस्यवाद आध्यात्मिक (Spiritual) होता है, जिसमें कबीर जैसी 'भावात्मक रहस्यवाद' की झलक मिलती है। महादेवी वर्मा के काव्य में इन दोनों का सबसे सुंदर मिश्रण देखा जा सकता है।

निष्कर्ष: संक्षेप में, छायावाद 'हृदय की अनुभूति' का विस्तार है जो प्रकृति तक जाता है, जबकि रहस्यवाद 'आत्मा की खोज' है जो सीधे परमात्मा तक पहुँचती है।

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