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Sumil Yadav· 2 साल पहले
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हनुमान बाहुक का पाठ कितनी बार करना चाहिए?

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अपडेट किया गया03/16/26

चलिए हम आपको बताते हैं कि हनुमान बाहुक का पाठ कितनी बार करना चाहिए:-

मैं आपको बता दूं कि हनुमान बाहुक एक शक्तिशाली हनुमान मंत्र है। जो सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति दिलाता है। यह एक अष्टक है। जिसका अर्थ होता है इसमें आठ श्लोक है। मैं आपको बता दूं कि इस मंत्र की रचना गोस्वामी तुलसीदास के द्वारा किया गया था।

 हनुमान बाहुक में हनुमान जी को उनकी शक्तियों का स्मरण कराया जाता है। इसके अलावा इस मंत्र में हनुमान जी को अजर -अमर और सर्वशक्तिमान संकट मोचन कहा जाता है। कहां जाता है कि इस मंत्र का नियमित पाठ करने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और भक्त के सभी संकट दूर हो जाते हैं।

यदि आप हनुमान बाहुक का नियमित रूप से जब करते हैं तो इसके बहुत से लाभ प्राप्त होते हैं:-

  • इस मंत्र के जब से सभी संकट दूर हो जाते हैं।
  • यह मंत्र भय,चिंता और अवसाद को दूर करने में मदद करता है।
  • इस मंत्र के जब से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है।
  • यह मंत्र जीवन में सफलता और समृद्धि प्राप्त करने में मदद करता है।
  • बताया जाता है कि हनुमान बाहुक गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित है। जिसका नियमित 21 दिनों तक पाठ करने से असाध्य रोगों से मुक्ति मिल जाती है। और यदि आप विश्वास पूर्वक नियमित इसका पाठ करते हैं तो सभी प्रकार के शारीरिक एवं मानसिक  कष्टों का निवारण होता है।
  • यदि आप हनुमान बाहुक का नियमित रूप से पाठ करते हैं तो आपको गठिया, वात रोग, सर दर्द, गले में हो रहे दर्द, आदि शारीरिक कासन से मुक्ति मिलती है। लेकिन हां ध्यान रहे कि यह स्तुति कम से कम 21 या 26 दिनों तक लगातार करें। हनुमान बाहुक पाठ करने से शारीरिक कासन से मुक्ति तो मिलती ही है साथ ही ये पाठ जातक को भूत प्रेत जैसी बधाओं से भी दूर रखने में मदद करता है।

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Krishna Patel
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अपडेट किया गया03/16/26

कहा जाता है कि यदि भगवान का आशीर्वाद मिल गया तो सारे काम हो जाते है । 

पर यह आशीर्वाद मिलता कैसे है। हम भगवान के प्रति अपना समर्पण करते है बदले मे भगवान जी हम पर अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखते है। 

किसी भी मंत्र, जाप करने के लिए एकाग्रचित होना बहुत आवश्यक है। कलयुग मे हनुमान जी को चिरनजीवी बोला गया है। जो व्यक्ति  हनुमान जी की भक्ति पूरी श्रद्धा भाव के साथ करता है, हनुमान जी उसके सारे संकट दूर कर देते है। हनुमान जी प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा, हनुमान अष्टक , बजरंग बाण, हनुमान बाहुक आदि का पाठ करते है । 

प्रत्येक मंगलवार हनुमान जी का दिन माना जाता है। कहते है मंगलवार के दिन हनुमान बाहुक का पाठ करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है और हमारे सारे कष्ट और रोग दूर हो जाते है और हमे मानसिक और शारिरिक शांति मिलती हैं। 

 गोस्वामी तुलसीदास जी के द्वारा रचित हनुमान बाहुक रोगों से निजात दिलाता है। कहा जाता हैं की तुलसीदास को जब रोगों ने जकड़ लिया था वह वात रोग से पीड़ित हो गए थे तब गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमान बाहुक की रचना की जिससे उनके सारे रोग नष्ट हो गए और वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गए। 

हनुमान बाहुक का पाठ लगातार 21 दिनों तक करने की सलाह दी जाती हैं। हनुमान जी की कृपा से 21 दिनों मे ही मनुष्य रोगों से मुक्ति पा लेता है। और निरोगी हो जाता हैं। 

विधि विधान से हनुमान बाहुक का पाठ करने से हनुमान जी की विशेष कृपा होती हैं और जीवन के कष्टो से मुक्ति मिलती है। शारीरिक और मानसिक शांति की प्राप्ति होती हैं। 

माना जाता है कि हनुमान बाहुक का पाठ करने के लिए प्रत्येक मंगलवार को स्नान करके हनुमान जी के फोटो के आगे जल के कलश में तुलसी का पत्ता डाल कर हनुमान बाहुक का पाठ करना चाहिए उसके पश्चात तुलसी का पत्ता जल के साथ ग्रहण कर लेना चाहिए। ऐसा करने से तमाम कष्ट और बीमारी दूर हो जाती हैं। 

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जवाब दिया गया03/16/26

हनुमान बाहुक का पाठ कितनी बार करना चाहिए? हनुमान बाहुक एक प्रसिद्ध स्तोत्र है जिसकी रचना संत तुलसीदास ने की थी। यह भगवान हनुमान की स्तुति में लिखा गया है और माना जाता है कि इसका पाठ करने से मानसिक शांति और साहस प्राप्त होता है। परंपरा के अनुसार हनुमान बाहुक का पाठ श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाता है। कई लोग इसे रोज एक बार पढ़ते हैं, जबकि कुछ लोग विशेष मनोकामना के लिए 11, 21 या 40 दिनों तक नियमित पाठ भी करते हैं। पाठ की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण श्रद्धा, विश्वास और नियमितता को माना जाता है। इसलिए इसे शांत मन और पूरी भक्ति के साथ पढ़ना उचित माना जाता है।

Tara Verma
Ten years in the classroom, shaping minds — bringing the same clarity and purpose to every piece she writes about education.
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Tara Verma is a practising teacher and education content writer with over 10 years of classroom experience across primary and secondary levels. She holds a Master's degree in Education (M.Ed.) from Delhi University and a Bachelor of Education (B.Ed.) from Jamia Millia Islamia — qualifications that ground her writing in both pedagogical theory and the day-to-day realities of teaching in India. Her content covers exam preparation strategies, learning methodologies, curriculum guidance, student mental health, career counselling for students, and the evolving state of school and higher education in India. Her work has appeared on platforms including TeacherVision India, Jagran Josh, and Careers360, where she writes for students, parents, and fellow educators who need content built on actual teaching experience — not theory alone. Over a decade of working directly with students across age groups and learning levels has given Tara a practical understanding of how education content should be written — clearly, accessibly, and with genuine awareness of the challenges students and teachers face on the ground. She has taught 1,000+ students, contributed to school curriculum development initiatives, and published 250+ articles on education across digital platforms. She is an active member of the National Council of Teachers of English (NCTE) India. Across all her writing, every recommendation is classroom-tested, every insight comes from direct teaching experience, and every article is held to the same standard she applies in her own classroom — accuracy, clarity, and genuine usefulness for the reader.

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