दोस्तों आप सब जानते हैं कि भारतीय सेना के जवान बहुत ही सक्षम और ताकतवर है। भारतीय सेना ने अलग-अलग देश में जाकर कई तरह के खतरनाक ऑपरेशन किए हैं और उस ऑपरेशन में सफलता हासिल की है। इसी तरह का एक ऑपरेशन मालदीव में भारतीय सेना द्वारा 3 नवंबर 1988 में किया गया था। जिसका नाम "ऑपरेशन कैक्टस" था। आज के इस आर्टिकल में हम आपको नवंबर 1988 में किए जाने वाले "ऑपरेशन कैक्टस" के बारे में विस्तार पूर्वक बताएंगे। अतः आर्टिकल को अंत तक अवश्य पढ़े।
जानकारी के अनुसार मालदीव में पहली बार 1978 में चुनाव हुआ था क्योंकि 1978 तक मालदीव में ब्रिटिश सरकार का राज चलता था। 1978 में आजादी मिलने के बाद चुने गए सरकार को हटाने के लिए कई बार मालदीव पर विरोधियों द्वारा हमला किया गया और 1988 में मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल गयूम को हटाने और मालदीव में तख्तापलट पलट करने के लिए राष्ट्रपति अब्दुल गयूम पर हमला किया गया। टूरिस्ट के रूप में हजारों आतंकवादी मालदीव में घुसे और मालदीव पर हमला बोल दिया। हमला होने के ठीक पहले अब्दुल गयूम को भारत दौरे के लिए निकलना था लेकिन किसी कारणवश उन्होने अपना भारत दौरा रद्द कर दिया था। आतंकवादियों का प्लान था कि वह राष्ट्रपति की गैर-मौजूदगी में मालदीव पर हमला करके मालदीव पर कब्जा कर लेंगे लेकिन राष्ट्रपति के भारत दौरे को रद्द करने के बाद आतंकवादियों ने मालदीव के सरकारी इमारत पर हमला बोल दिया और मालदीव पर कब्जा करने की कोशिश की। मालदीव सरकार ने देश के सभी बड़े देशों के सरकार से सैन्य मदद के लिए गुहार लगाई लेकिन सभी देशों ने मदद करने से इनकार कर दिया। अंत में मालदीव सरकार ने भारत से मदद की गुहार लगाई तो भारत सरकार ने तुरंत भारतीय सैनिकों को मालदीव की रक्षा करने के लिए भेजा और भारतीय सैनिकों ने मिलकर ऑपरेशन कैक्टस चलाया।
"ऑपरेशन कैक्टस" के जरिये राष्ट्रपति अब्दुल गयूम को सुरक्षित आतंकवादियों से बचाकर नेशनल सर्विस हेडक्वार्टर तक पहुंचाया गया। इसके बाद मालदीव में घुसे सभी आतंकवादियों को एक-एक करके भारतीय सैनिकों ने बाहर निकाला। केवल 18 घंटे के अंदर ही मालदीव से सभी आतंकवादियों को बाहर निकाल कर भारतीय सैनिकों ने मालदीव में तख्तापलट पलट होने की साजिश को नाकाम कर दिया।
सूत्रों के अनुसार मालदीव में तख़्तापलट करने की कोशिश मालदीव के ही एक व्यापारी अब्दुल्ला लुथुफी ने किया था। अब्दुल्ला लुथुफी ने मालदीव पर हमला करने वाले आतंकवादी टीम का नेतृत्व किया था जिसे पीपुल्स लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन ऑफ तमिल एलम (पीएलओटीई) नामक एक उग्रवादी समूह ने श्रीलंका से मदद की थी।
इन दिनों मालदीव काफी चर्चित देश बना हुआ है। हाल ही में नरेंद्र मोदी लक्षद्वीप के दौरे पर गए थे और वहां से उन्होंने लक्षद्वीप की प्राकृतिक सुंदरता की तारीफ करते हुए सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर की। इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा यह कहा जाने लगा कि अब रुपए खर्च करके मालदीव में छुट्टियां मनाने से अच्छा है लक्षद्वीप जाया जाए। यह बात मालदीव के मंत्रियों को बुरी लगी और उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के पोस्ट के लिए उनकी आलोचना की। जिसके बाद आलोचना करने वाले तीन मंत्रियों को मालदीव सरकार ने निलंबित कर दिया है। लेकिन अब चीन के हाथ की कठपुतली बने इस मालदीव सरकार की पूरे विश्व में काफी आलोचनात्मक टिप्पणियों का सामना करना पड़ रहा है।
मालदीव के वर्तमान राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू का चीन की तरफ अत्यधिक रुझान होने की बात तब सामने आई जब राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने मालदीव से भारतीय सैनिकों को बाहर निकालने की बात कही। भारतीय सैनिकों को मालदीव से बाहर निकालने के बात पर बहस अधिक तेज हो गई और राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू से यह पूछा गया कि आखिर उन्हें भारतीय सैनिकों से क्या दिक्कत हो रही है। क्या वह भारतीय सैनिकों द्वारा मालदीव की रक्षा करने के लिए 1988 मे चलाये जाने वाले "ऑपरेशन कैक्टस" के बारे में भूल गए


