झारखंड के दुमका ज़िले में स्थित 'शिकारीपाड़ा' के एक छोटे से गांव 'मलूटी' है | इस गांव में कई सारे प्राचीन मंदिर हैं | इस गाँव में कई सारे मंदिर होने की संख्या के कारण इस गांव को 'गुप्त काशी' और 'मंदिरों का गांव' नाम से भी जाना जाता है |
किस राज्य के एक गांव में सबसे ज्यादा मंदिर है?
क्या आप जानते हैं कि किस राज्य के गांव में सबसे ज्यादा मंदिर बने हुए हैं। चलिए हम आपको आज यहां पर बताएंगे एक रिपोर्ट के द्वारा पता लगाया गया है कि झारखंड के दुमका जिले में स्थित शिकारीपाड़ा के एक छोटे से गांव मलूटी है इस गांव में सबसे ज्यादा प्राचीन मंदिर है इस गांव में मंदिरों की संख्या अधिक होने के कारण इस गांव को गुप्तकाशी और मंदिरों के गांव के नाम से जाना जाता है। इतिहास के पन्नों में बताया गया है कि इस गांव का राजा एक किसान हुआ करता था। हम आपको बता दें कि इस राजा के वंशजों ने ही इस गांव पर 108 मंदिरों का निर्माण करवाया था।
भारत के तमिलनाडु राज्य में सबसे अधिक मंदिर हैं, लेकिन अगर किसी एक विशिष्ट गाँव की बात की जाए जहाँ मंदिरों का घनत्व सबसे अधिक है, तो वह कुंभकोणम (Kumbakonam) के पास स्थित है।
विशेष रूप से, तंजावुर जिले को मंदिरों का गढ़ माना जाता है। यहाँ के कुछ महत्वपूर्ण विवरण इस प्रकार हैं:
- राज्य: तमिलनाडु (इसे "मंदिरों की पुण्यभूमि" भी कहा जाता है)।
- गाँव/शहर: कुंभकोणम को अक्सर "Temple Town" कहा जाता है क्योंकि इस छोटे से क्षेत्र के भीतर और आसपास लगभग 188 मंदिर स्थित हैं।
- ऐतिहासिक महत्व: इन मंदिरों का निर्माण मुख्य रूप से चोल, पल्लव और पांड्य राजाओं द्वारा करवाया गया था।
इसके अलावा, यदि हम एक छोटे से 'मंदिरों के समूह' वाले गाँव की बात करें, तो कर्नाटक का ऐहोल (Aihole) गाँव भी प्रसिद्ध है, जिसे "भारतीय वास्तुकला का पालना" कहा जाता है और यहाँ 125 से अधिक पत्थर के मंदिर हैं।
आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले का तिरुपति क्षेत्र और तमिलनाडु के कई गांव मंदिरों के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन अगर एक गांव में सबसे ज्यादा मंदिरों की बात करें तो तमिलनाडु के कुछ गांवों को “टेम्पल विलेज” कहा जाता है। यहां हर गली में छोटे-बड़े मंदिर देखने को मिल जाते हैं। धार्मिक पर्यटन बढ़ने के कारण इन गांवों की पहचान और भी मजबूत हुई है।
कई गांवों में सैकड़ों साल पुराने मंदिर मौजूद हैं जहां सालभर पूजा और उत्सव चलते रहते हैं। दक्षिण भारत में मंदिर संस्कृति बेहद मजबूत मानी जाती है। यही वजह है कि यहां गांवों की पहचान भी मंदिरों से जुड़ी होती है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी काफी फायदा मिलता है।