चिमटा के प्रथम अविष्कार मिस्रवासियों ने 1450 ईसा पूर्व किया था। उस समय लोग खाना पकाते थे या फिर रोटी सेकने के लिए लकड़ी का इस्तेमाल करते थे तभी मिस्रवासियों द्वारा चिमटे का अविष्कार किया गया। चिमटे क़ो बनाने के लिए उन्होंने लम्बी धातु की दो छड़ो का उपयोग करके चिमटा बनाया और फिर चिमटे का इस्तेमाल खाना बनाते समय चीजों क़ो पकड़ने के लिये किया। इसी तरह धीरे -धीरे विश्व भर मे सभी लोग खाना पकाते समय चूल्हे मे रोटी सेकते थे तो रोटी क़ो तवे मे से जकड़ कर पलटने के लिए चिमटे का इस्तेमाल करते थे। और भी जैसे कि आग मे आलू, टमाटर का भरवा बनाना होता था तो चिमटे का इस्तेमाल करके ही आग के अंगारो क़ो पकडकर आलू के ऊपर रखकरढक देते थे ताकि अच्छे से पक जाएं ज़ब आलू, टमाटर अच्छे से पक जाते थे तो आग से उन्हें बाहर निकालने के लिए चिमटे का इस्तेमाल करके निकला जाता था।
इसी तरह ज़ब हम चूल्हे मे मटन पकाते है, तो सबसे पहले मटन क़ो किसी बर्तन मे पानी डालकर पकने के लिए रखते है और ऊपर कोई कटोरी ढक देते है ताकि मटन जल्दी पक जाएं, मटन पका है या नहीं देखने के लिए चिमटे की मदद से कटोरी क़ो हटाते है। चिमटे की मदद से मटन का एक पीस बाहर निकालकर चेक करते है कि मटन पका है या नहीं ज़ब मटन पक जाता है, तो मटन का पूरा बर्तन चूल्हे नीचे उतार लेते है।
तंदूरी रोटी बनाते है या फिर शादी मे तंदूरी रोटी बनाने वाले लोग कोयले के अँगारे मे रोटी सेकते है, तो चिमटे की मदद से रोटी दोनों तरफ पलटते है। और जब तक तंदूरी रोटी अच्छे से सेक नहीं जाती है, चिमटे की मदद से तंदूरी रोटी क़ो इधर-उधर पलटाते रहते है, ज़ब तंदूरी रोटी अच्छे से सेक जाती है, तो रोटी क़ो आग से निकालकर बर्तन मे रखते है।
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