सोवियत संघ का विघटन एक दिन में नहीं हुआ। यह दशकों की थकान का नतीजा था। आर्थिक संकट, अफगानिस्तान युद्ध की विफलता, तेल की गिरती कीमतें, और जनता में कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति भरोसे की टूटन → ये सब एक साथ आए। बाल्टिक देशों से उठे राष्ट्रवादी आंदोलन ने आग में घी डाला। 1991 में बेलोवेज़ा समझौते के बाद 25 दिसंबर को गोर्बाचोव के इस्तीफे के साथ 69 साल पुराना सोवियत साम्राज्य इतिहास बन गया।



