हिमालय के ग्लेशियरों का पिघलना भारत के जल संसाधनों पर गहरा और दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। हिमालय से निकलने वाली नदियाँ जैसे गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु देश की बड़ी आबादी को पानी उपलब्ध कराती हैं। ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से शुरुआत में नदियों में जल प्रवाह बढ़ सकता है, जिससे बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियल झील फटने (GLOF) जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ जाता है।
लेकिन लंबे समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। जैसे-जैसे ग्लेशियर सिकुड़ते जाएंगे, नदियों में पानी की मात्रा कम हो जाएगी, जिससे जल संकट बढ़ेगा। इसका सीधा असर कृषि, पीने के पानी और उद्योगों पर पड़ेगा। इसके अलावा भूजल स्तर भी प्रभावित होगा और जलविद्युत उत्पादन में कमी आ सकती है।
ग्लेशियरों का पिघलना भारत के लिए भविष्य में जल आपदा और जल संकट दोनों का कारण बन सकता है।





