क्या अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा हो सकती है -: धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा (मूर्ति में दिव्यता स्थापित करना) एक अत्यंत पवित्र और विधिपूर्ण प्रक्रिया है, जिसे आमतौर पर तभी किया जाता है जब मंदिर पूरी तरह तैयार हो।
परंपरागत नियम:
मंदिर का गर्भगृह (जहाँ मूर्ति स्थापित होती है) पूरी तरह से निर्मित और शुद्ध होना चाहिए। अधूरे या निर्माणाधीन मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा सामान्यतः नहीं की जाती।
लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियाँ:
अगर गर्भगृह पूरी तरह तैयार है और बाकी मंदिर का काम चल रहा है, तो कुछ विद्वान पंडितों की सलाह से प्राण प्रतिष्ठा की जा सकती है।
सबसे जरूरी बात:
यह पूरी तरह धार्मिक परंपरा, आचार्य (पंडित) और स्थान की परंपरा पर निर्भर करता है।
पूरी तरह अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा सामान्यतः नहीं होती
लेकिन यदि गर्भगृह पूर्ण हो, तो विशेष परिस्थितियों में संभव है





