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Apr 28, 2026news-current-topics

कौन थे रामलला की मूर्ति हटाने का नेहरू का आदेश ना मानने वाले अधिकारी केके नायर?

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Apr 27, 2026

केके नायर (कंधांगल करुणाकरण नायर) साल 1949 में अयोध्या के जिलाधिकारी (DM) थे। वे भारतीय इतिहास में एक बहुत चर्चित और प्रभावशाली नाम हैं, क्योंकि उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के सीधे आदेश को मानने से इनकार कर दिया था।

यहाँ उनकी कहानी के मुख्य बिंदु दिए गए हैं:

1. 22-23 दिसंबर 1949 की घटना

दिसंबर 1949 की उस रात अयोध्या के विवादित ढांचे के भीतर रामलला की मूर्ति प्रकट हुई थी। इस घटना के बाद पूरे देश में और खास तौर पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया।

2. नेहरू और नायर का टकराव

जब यह खबर दिल्ली पहुँची, तो प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू बहुत चिंतित हुए। उन्होंने इसे देश की शांति और धर्मनिरपेक्ष छवि के लिए खतरा माना। नेहरू ने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत को पत्र लिखकर मूर्ति को तुरंत वहां से हटाने का आदेश दिया।

मुख्यमंत्री के जरिए यह आदेश फैजाबाद (अब अयोध्या) के जिलाधिकारी केके नायर के पास पहुँचा।

3. नायर का ऐतिहासिक इनकार

केके नायर ने मूर्ति हटाने से साफ मना कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि:

  • अगर इस समय वहां से मूर्ति हटाई गई, तो अयोध्या और पूरे देश में बड़े पैमाने पर दंगे भड़क सकते हैं।

  • वहां हिंदू समुदाय की गहरी आस्था जुड़ी हुई थी, और हजारों की भीड़ इकट्ठा हो चुकी थी।

  • उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि प्रशासन के पास उस स्थिति को संभालने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल नहीं है।

जब सरकार ने फिर से दबाव डाला, तो नायर ने पत्र लिखकर कहा कि यदि सरकार को लगता है कि उनके रहते आदेश का पालन नहीं हो पा रहा है, तो उन्हें उनके पद से हटा दिया जाए, लेकिन वे अपने हाथों से यह 'अप्रिय' काम नहीं करेंगे।

4. इस्तीफा और बाद का जीवन

इस टकराव के बाद केके नायर को उनके पद से हटा दिया गया और उन पर विभागीय जांच भी शुरू हुई। इसके विरोध में उन्होंने सरकारी सेवा (IAS) से इस्तीफा दे दिया।

हालांकि, अयोध्या और आसपास के इलाके में वे इतने लोकप्रिय हो गए कि लोग उन्हें 'नायक' मानने लगे। बाद में वे सक्रिय राजनीति में आए:

  • 1967 में वे उत्तर प्रदेश की बहराइच सीट से भारतीय जनसंघ (जो आज की भाजपा की पूर्ववर्ती थी) के टिकट पर लोकसभा सांसद चुने गए।

  • उनकी पत्नी, शकुंतला नायर भी तीन बार विधायक और एक बार सांसद रहीं।

5. उनकी विरासत

केके नायर को अक्सर उन लोगों के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन की 'नींव' अनजाने में ही सही, लेकिन मजबूती से रख दी थी। उनके इस एक फैसले की वजह से रामलला की मूर्ति वहां से नहीं हटी और दशकों तक वहां पूजा-अर्चना जारी रही, जो अंततः सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भव्य मंदिर के निर्माण तक पहुँची।

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