अंक ज्योतिष विद्या क्या है ,यह कैसे ग्रहों का निर्धारण करता है ? - letsdiskuss
Official Letsdiskuss Logo
Official Letsdiskuss Logo

भाषा


Dharm Dass

Working with Maruti Suzuki | पोस्ट किया | ज्योतिष


अंक ज्योतिष विद्या क्या है ,यह कैसे ग्रहों का निर्धारण करता है ?


0
0




Content Writer | पोस्ट किया


आप जानना चाहते है ज्योतिष विद्या आपके ग्रहों का निर्धारण कैसे करती है |वर्तमान समय मे लोग कितना ही व्यस्त क्यों न हो परन्तु अपने भविष्य को लेकर काफी परेशान व फिकरमंद होते है | 


पहले अंकज्योतिष (Numerology ) है क्या इसके बारे मे जानते है -


अंकज्योतिष अंकों की सहायता से भविष्यवाणी करने का विज्ञान है। अंकज्योतिष के माध्यम से मनुष्य की भविष्य जानने की मूलभूत इच्छा की पूर्ति होती है।अंकज्योतिष में गणित के नियमों का उपयोग करके मनुष्य के अस्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर नजर डाली जा सकती है। वास्तव में अंकज्योतिष में नौ ग्रहों सूर्य, चन्द्र, गुरू, यूरेनस, बुध, शुक्र, वरूण, शनि और मंगल के आधार पर गणना की जाती है। इन में से प्रत्येक ग्रह के लिए 1 से लेकर 9 तक कोई एक अंक निर्धारित किया गया है, जो कि इस बात पर निर्भर करता है कि कौन से ग्रह पर किस अंक का असर होता है। ये नौ ग्रह मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं।


जातक के जन्म के समय ग्रहों की जो स्थिति होती है, उसी के अनुसार उस व्यक्ति का व्यक्तित्व निर्धारित हो जाता है। इसलिए, जन्म के पश्चात जा तक पर उसी अंक का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है, जो कि जातक का स्वामी होता है। इस व्यक्ति के सभी गुण चाहे वे उसकी सोच, तर्क-शक्ति, भाव, दर्शन, इच्छाएँ, द्वेष, सेहत या कैरियर हो, इस अंक से या इसके संयोग वाले साथी ग्रह से प्रभावित होते हैं। यदि किसी एक व्यक्ति का अंक किसी दूसरे व्यक्ति के अंक के साथ मेल खा रहा हो तो दोनों व्यक्तियों के बीच अच्छा ताल-मेल बनता है।


अंकज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक ही नाम व अंक किसी एक व्यक्ति का स्वामी हो सकता है। इसके अनुसार इंसान के जीवन में अपने अंकों के प्रभाव के अनुसार ही अवसर व कठिनाइयों का सामना करता है। अंकज्योतिष शास्त्र में कोई भी अंक भाग्यशाली या दुर्भाग्यपूर्ण नहीं हो सकता, जैसे कि अंक “ 7” को भाग्यशाली व अंक “13” को दुर्भाग्यपूर्ण समझा जाता है।


Letsdiskuss (Courtesy : Patrika )


9
0

Picture of the author