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Dec 10, 2021others

क्या सभी हिंदू शाकाहारी हैं?

4 Answers
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@parvinsingh6085Mar 9, 2021
सभी हिंदू शाकाहारी नहीं हैं। तन्त्र शास्त्र के अनुसार शाकाहारी होना आपके लिए कर्म गुणों को प्राप्त करने के लिए लाभदायक है जो उनकी साधनाओं में एक तांत्रिक या योगी की सहायता करता है। यह आपको अतिरिक्त गुण देगा जो तंत्र-मंत्र और यहां तक ​​कि काले जादू के अनुष्ठानों की तरह जादू-टोने में आपकी सहायता कर सकता है। यदि आप शाकाहारी और तपस्वी हैं, तो गुण और भी अधिक हैं।

इसलिए अगर आप मंत्र, तंत्र आदि के अध्ययन को आगे बढ़ाना चाहते हैं, जो मनोगत शक्तियों को जन्म दे सकता है, तो शाकाहारी जाना बहुत अच्छा है।

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@aanchalsingh1985Dec 8, 2021

आज के समय में कोई भी हिंदू धर्म वाले शाकाहारी नहीं रहे हैं। शाकाहारी होना या मांसाहारी होना व्यक्ति का यह स्वयं का निजी फैसला होता है। आज के परिवेश में चलते हुए किसी भी धार्मिक इंसान शाकाहारी नहीं होते हैं यह अपने खानपान को स्वयं ही निर्धारित करते हैं कि हमें क्या खाना है क्या नहीं खाना और यह उन्हीं के मुताबिक यदि होता है तो इससे सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव दोनों तरह के प्रभाव दुनिया में देखने को मिलते हैं.।Letsdiskuss

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@krishnapatel8792Dec 9, 2021

सभी हिंदू शाकाहारी नहीं होते हैं। लेकिन तंत्र शास्त्र के अनुसार अपने लिए तंत्र गुणों को प्राप्त करना माना गया है। यह कहना उचित नहीं होता है कि सभी हिंदू शाकाहारी है या मांसाहारी क्योंकि यहां लोगों को अपने पसंद का खाना खाने का अधिकार होता है। इसलिए कुछ लोग बिल्कुल मसाहरी होते हैं जैसे कि वह लोग मांस मछली मुर्गा आदि पशुओं का सेवन करते हैं। और कुछ लोग हैं शुद्ध शाकाहारी होते हैं वे लोग अपने भोजन में घी दूध दही आदि रोटी सब्जी का सेवन करते हैं। आज के युग में कोई भी व्यक्ति शुद्ध शाकाहारी नहीं होता है। इसलिए निर्धारित नहीं किया जा सकता आज के युग में सब शाकाहारी हैं।Article image

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@preetipatel2612Dec 10, 2021

हमारे देश के सभी हिंदू शाकाहारी नहीं है क्योंकि वह अपने अनुसार ही अपना भोजन करते हैं चाहे वह शाकाहारी हो या फिर मांसाहारी! पहले हमारी हिंदू सभ्यता में लोगों को दूसरे जीव का मांस खाना पाप समझा जाता था , क्योंकि पहले के ऋषि मुनि कहते थे की अगर कोई व्यक्ति किसी का मांस खाते हैं तो उसे राक्षस के समान माना जाता है! पहले हमारे हिंदू धर्म में मांस नहीं खाया जाता था! लेकिन अब यह परंपरा धीरे-धीरे समाप्त होती नजर आ रही है! हर लोग अपनी सभ्यता को भूलते जा रहे हैं!Article image

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