निजी वित्त और सर्जनिक वित्त = (1)व्यक्ति स्वयं के लिए लाभ प्राप्त करने के ऑब्जेक्ट से व्यय करता है¡ इसमें सरकार के व्यय करने का उद्देश्य अधिकतम सामाजिक लाभ प्राप्त करना होता है!
(2) व्यक्ति अपना मासिक बचत बनाता है! इसमें सरकार अपना बजट वार्षिक बनाती है!
(3)" बचत "को दर्शाने वाला बजट अच्छा माना जाता है!
इसमें सरकार का बजट संतुलित या कभी-कभी घाटे को दर्शाने वाला अच्छा माना जाता है!
(4) व्यक्ति अपना व्यय रीति-रिवाज,आदतो से प्रभावित होकर करता है! इसमें सरकार का व्यय विचारपूर्ण अपनाई गई आर्थिक नीति के आधार पर किया जाता है!
डिफरेंट बिटवीन प्राइवेट फाइनेंस एंड पब्लिक फाइनेंस?
@rajnipatel6804 | Posted on November 16, 2021
निजी वित्त तथा सार्वजनिक वित्त में अंतर -
निजी वित्त से तात्पर्य - निजी वित्त में एक व्यक्ति विशेष की आड़ में तथा उसकी आवश्यकता की पूर्ति के संबंध में विद्यार्थियों का अध्ययन किया जाता है!
सार्वजनिक वित्त - सार्वजनिक वित्त में राज्य के आय-व्यय का अध्ययन किया जाता है निजी एवं सार्वजनिक वित्त दोनों में समानता फाइनेंस व्यवस्थाओं के सिद्धांत एक जैसे दिखाई देते हैं!
1) दूरदर्शिता - व्यक्ति दीर्घकालीन योजनाओं पर कम विचार करता है! सरकार दीर्घकालीन योजनाओं जैसे- सड़के, बिजलीघर आदि के निर्माण कार्य पर व्यय कर सकती है!
2) व्यय मे कटौती - व्यक्ति अपना में बहुत अधिक नहीं हटा सकता क्योंकि जीवन यापन के लिए उसे खर्च करना बस एक है सरकार अपने बेमेल शब्द आंसर कटौती कर सकती है
3) सार्वभौमिकता - व्यक्ति सरकार की तरह शक्तिशाली नहीं होता है वह दूसरों की संपत्ति नहीं छीन सकता, ना ही जप्त करके अपनी आय बढ़ा सकता है! सरकार सार्वभौमिकता या शक्तिशाली होती है! वह अपनी आय प्राप्त करने एवं उसमें वृद्धि करने हेतु जनता को विवश कर सकती है!वह नये कर लगाकर या संपत्ति जप्त कर आय को बढ़ा सकती हैं!





