पहलवानों के आहार और उनकी जीवनशैली में अनुशासन का बहुत महत्व होता है। अक्सर यह देखा गया है कि अखाड़े में उतरने वाले पहलवान अचार से परहेज करते हैं। इसके पीछे कई स्वास्थ्य संबंधी और व्यावहारिक कारण छिपे होते हैं।
पहलवानों द्वारा अचार न खाने के मुख्य कारण:
- खटाई और गले की समस्या: अचार में सिरका और खटाई (जैसे अमचूर) की मात्रा अधिक होती है। पहलवानों का मानना है कि अधिक खटाई खाने से गला खराब हो सकता है और शरीर की मांसपेशियों में लचीलापन कम हो जाता है। कुश्ती के लिए शरीर का चुस्त और लचीला होना अनिवार्य है।
- हड्डियों और जोड़ों पर प्रभाव: आयुर्वेद और पारंपरिक कुश्ती परंपराओं के अनुसार, अत्यधिक खट्टा और तीखा भोजन हड्डियों को कमजोर कर सकता है और जोड़ों में दर्द या जकड़न पैदा कर सकता है। पहलवानों को भारी वजन उठाना और दांव-पेच लगाने होते हैं, जिसके लिए मजबूत जोड़ों की आवश्यकता होती है।
- पानी की कमी (Dehydration): अचार में नमक की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। अधिक नमक शरीर में पानी की कमी कर सकता है और प्यास बढ़ाता है, जो अभ्यास (Practice) के दौरान रुकावट पैदा करता है।
- पाचन और पित्त: पहलवान दूध, घी और बादाम जैसे भारी आहार लेते हैं। अचार जैसा तीखा और मसालेदार भोजन पाचन तंत्र में 'पित्त' बढ़ा सकता है, जिससे सीने में जलन और एसिडिटी हो सकती है।
निष्कर्ष: पहलवानों के लिए उनका शरीर ही उनकी पूंजी है। इसलिए, वे ऐसे किसी भी खाद्य पदार्थ से बचते हैं जो उनकी ताकत, स्टेमिना या मांसपेशियों के विकास में बाधा डाले। सात्विक और पौष्टिक आहार ही उनकी असली शक्ति का राज है।

