गोर्बाचोव ने सोवियत संघ को बचाने के लिए दो बड़े सुधार लागू किए: पेरोस्त्रोइका (आर्थिक पुनर्निर्माण) और ग्लासनोस्त (खुलापन)। लेकिन ये उल्टे पड़ गए। जब मीडिया को आज़ादी मिली तो दशकों के झूठ सामने आए। चेर्नोबिल, अफगानिस्तान, खाद्य संकट। आधे-अधूरे आर्थिक सुधारों ने उत्पादन और घटाया। जनता को बोलने की थोड़ी आज़ादी मिली तो उन्होंने पूरी आज़ादी माँगी और व्यवस्था संभाल नहीं पाई।



