Dronacharya Award भारत का एक प्रतिष्ठित खेल सम्मान है, जो उन कोचों को दिया जाता है जिन्होंने खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रशिक्षित किया हो। यह पुरस्कार सीधे खिलाड़ियों को नहीं बल्कि उनके कोचों को दिया जाता है, जो उनकी सफलता के पीछे अहम भूमिका निभाते हैं।
इस पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1985 में हुई थी। तब से लेकर अब तक कई दशकों में सैकड़ों कोचों को यह सम्मान मिल चुका है। उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड और खेल मंत्रालय की जानकारी के अनुसार अब तक कुल मिलाकर लगभग 150 से अधिक कोचों को द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है (यह संख्या समय-समय पर नए चयन के साथ बदलती रहती है क्योंकि हर साल नए नाम जोड़े जाते हैं)।
यह पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिया जाता है:
- नियमित श्रेणी (Active Coaches)
- लाइफटाइम अचीवमेंट श्रेणी
- विशिष्ट उपलब्धियों वाले कोच
भारत में India के कई प्रसिद्ध खेलों जैसे क्रिकेट, हॉकी, कुश्ती, बैडमिंटन, एथलेटिक्स, बॉक्सिंग और वेटलिफ्टिंग में इस पुरस्कार से सम्मानित कोच रहे हैं। इन कोचों ने भारत को ओलंपिक, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
उदाहरण के लिए, कई मशहूर कोच जिन्होंने भारतीय क्रिकेट और हॉकी टीम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाई, उन्हें यह सम्मान मिला है। इसी तरह कुश्ती और बॉक्सिंग जैसे खेलों में भी ऐसे कोच रहे हैं जिन्होंने खिलाड़ियों को विश्व स्तर तक पहुंचाया।
Dronacharya Award का नाम महान गुरु द्रोणाचार्य के नाम पर रखा गया है, जो भारतीय पौराणिक कथाओं में अर्जुन जैसे महान धनुर्धर के गुरु माने जाते हैं। इस पुरस्कार का उद्देश्य भी वही है—अच्छे गुरु और कोच को सम्मान देना।
अगर आसान भाषा में समझें तो अब तक लगभग 150 से ज्यादा कोचों को यह पुरस्कार मिल चुका है और हर साल यह संख्या बढ़ती रहती है। यह भारत के खेल जगत में कोचों की मेहनत और योगदान को सम्मान देने का सबसे बड़ा तरीका माना जाता है।