Asked 7 years ago

ज्योतिष शास्त्र में शनि के अच्छे और बुरे प्रभाव क्या हैं?

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Shani को ज्योतिष में कर्म, अनुशासन, न्याय, धैर्य और मेहनत का ग्रह माना जाता है। माना जाता है कि शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार परिणाम देता है।

शनि के अच्छे प्रभाव:

  • मेहनत और discipline बढ़ाना
  • धैर्य और जिम्मेदारी की भावना देना
  • लंबे समय में सफलता और स्थिरता
  • आध्यात्मिक सोच और maturity बढ़ाना

शनि के बुरे प्रभाव:

  • देरी, संघर्ष या मानसिक दबाव
  • आर्थिक या करियर संबंधी कठिनाइयाँ
  • अकेलापन या जिम्मेदारियों का बोझ
  • रिश्तों और स्वास्थ्य में चुनौतियाँ

हालांकि ज्योतिष में शनि के प्रभाव पूरी कुंडली, दशा और ग्रह स्थिति पर निर्भर बताए जाते हैं। वास्तव में, कई लोग शनि को केवल “बुरा ग्रह” नहीं बल्कि जीवन में सीख और संतुलन देने वाला ग्रह भी मानते हैं।

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Answered By Priya Agrawal

Random Facts Enthusiast
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Updated on06/05/26
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शनि देव नाम से ही एक डर होता है, मन में | शनि देव को तो ऐसा बना दिया है, लोगों ने कि किसी के साथ कुछ भी बुरा हो, तो सबसे पहले किसी के मुँह से यही शब्द निकलता हैं, "शनि की दशा लगी हैं " पर अगर कुछ अच्छा हो तो ये कोई नहीं कहता कि "शनि की अच्छी दशा लगी हैं " ऐसा क्यों ? कभी सोचा हैं, किसी ने, कभी नहीं सोचा किसी ने क्योंकि शनि देव को सब बस क्रोधित भगवान ही मानते हैं |

ऐसा नहीं हैं, कि शनि देव सिर्फ क्रोध या नुक्सान करने वाले भगवान हैं | आपको बता दें, कि शनि देव ऐसे भगवान हैं, अगर वो किसी का बुरा करें, तो उसका कभी भला नहीं हो सकता, परन्तु अगर शनि देव आपसे खुश हैं, तो आपका बुरा कोई नहीं कर सकता |

आपके सवाल के अनुसार आप शनि के प्रभाव जानना चाहते हैं -

जैसा कि कुंडली में 12 भाव होते हैं, और सभी भाव में शनि का प्रवेश अलग-अलग होता हैं |
 
- पहला भाव - जिस व्यक्ति की कुंडली में शनि प्रथम भाव में हो, और वह शुभ हो तो व्यक्ति राजा की तरह जीवन जीता है, वहीं अगर यदि शनि अशुभ है, तो व्यक्ति रोगी और गरीबी की और बढ़ता हैं |
 
- दूसरा भाव - कुंडली के द्वितीय भाव में शुभ शनि का आगमन, धन की वर्षा करता हैं, वहीँ अशुभ होने पर दुःख, दरिद्रता, परिवार से दूरी, आदि करता हैं |
 
- तीसरा भाव - कुंडली के तीसरे भाव में शनि का अच्छा आगमन, बुद्धि में विकास करता हैं, वहीँ अशुभ होने पर कुंडली पर आलस का आगमन होता हैं |
 
- चौथा भाव - कुंडली में शनि अगर चौथे भाव में हैं, तो यह माता के लिए कष्ट करक होता हैं |
 
- पांचवा भाव - कुंडली में शनि का शुभ आगमन विवाह में सकारात्मकता लाता हैं, वहीं अशुभ शनि धोखा लेकर आता हैं |
 
- छठा भाव -जबकुंडली में शनि के छठे भाव में आगमन अच्छा होता हैं | जिसकी कुंडली में शनि छठे भाव में हो उसको 28 साल के बाद शादी करना चाहिए, बहुत सहायक सिद्ध होता हैं, वहीँ दूसरी और अगर शनि अशुभ है, तो रोग और ऋण कारक हो सकता हैं |
 
- सातवां भाव - शनि का सातवां भाव बुध और शुक्र से प्रभावित होता है, क्योकिं दोनों ही शनि के मित्र ग्रह हैं, इसलिए शनि बहुत अच्छा परिणाम देता है |
 
-आठवां भाव - कुंडली के आठवें लग्न में कोई भी ग्रह शुभ नहीं माना जाता है, जिसके आठवें लग्न में शनि हो उस व्यक्ति तो आयु लंबी होती है, परन्तु उसके पिता की उम्र कम होती है |
 
- नौवा भाव - इस भाव में शनि का आगमन बहुत ही शुभ होता हैं |
 
- दसवां भाव - शनि का आगमन दसवें भाव में, मनुष्य का राजनीती की ओर अग्रसर करता हैं |
 
- ग्यारवाह भाव - शनि का ग्यारहवें भाव में आगमन मनुष्य के भाग्य का निर्धारण एक निश्चित समय के लिए कर देता हैं |
 
- बारहवां भाव - कुंडली के बारहवें भाव में शनि का आगमन अच्छा परिणाम देता है | ऐसे व्यक्ति के दुश्मन नहीं होते, और व्यक्ति बहुत अमीर हो जाएगा |

 

Answered By पंडित दयाराम शर्मा

Astrology Insights Expert
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शिव शक्ति ज्योतिष केंद्र सनातन धर्म मंदिर

Updated on05/29/26
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