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क्या आप अपनी ज़िंदगी को 4 पंक्तियों में समेट सकते हैं ?

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Updated on10/05/18
ज़िंदगी को 4 पंक्ति में समेटना थोड़ा मुश्किल है | क्योकि ज़िंदगी में हर कोई इंसान 4 पल सूकून के हमेशा ढूढ़ता रहता है | जब उसको सूकून ही नहीं मिलता तो ज़िंदगी कैसे सिमट सकती है | फिर भी एक छोटी सी कोशिश है, कि शायद ज़िंदगी के कुछ पहलु समेट सकूं |

कुछ पहलु ज़िंदगी के :-

" जो ग़म दे वो ज़िंदगी
जो ग़म हर दम दे वो ज़िंदगी
जो सिर्फ तकलीफ भरा सफ़र ही न दे
जो साहिल भी दर्द सेभरा दे वो ज़िंदगी...."

Ramesh Kumar
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Answered on10/05/18
ज़िन्दगी का फलसफा भी कितना अजीब है,
शामें कटती नहीं, और साल गुज़रते चले जा रहे हैं |
M
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Updated on06/27/26

जन्म हुआ तब माँ की भाहे थी ज़िन्दगी

चलना सिखा तब पाठशाला बनी ज़िन्दगी

बड़ा जब कद मेरा तब बनी मेरी साथी मेरी जिन्दगी

और जब दुनिया तकलीफ में भी सलाम करे हौसलो को आपके उसे कहते है ज़िन्दगी ।

N

I m a man who loves writing, listening, sharing and caring...

6
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Answered on10/05/18

चार पंक्तियों में अगर मै अपनी ज़िन्दगी व्यक्त करूँ तो वह पंक्तिया यह होंगी :-


"ऐ ज़िन्दगी तेरे लिबास तले मेरी रूह सिमट रही है
तेरी सर्द परत मुझे कचोट रही है
फिर भी तुझे ओढ़ने से रोकू कैसे खुदको
तुझसे ही मेरी साँसे चल रही है |"

M
Helping students, parents, and institutions make smarter education decisions — one well-researched article at a time.
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Madan Singh is an education consultant and content writer with 8+ years of experience advising students, parents, and educational institutions on academic pathways, career planning, and learning strategies. He holds a Master's degree in Education Management from Delhi University, a background that grounds his writing in structured pedagogical thinking rather than generic career advice. His work spans college admissions guidance, career counselling, study abroad pathways, and competitive exam preparation, with a focus on both Indian and international education systems. He writes for CollegeDekho, Shiksha.com, and Collegedunia, where his articles are aimed at students and families making academic decisions. Over the course of his consulting practice, Madan has advised 150+ students on admissions, scholarship applications, and career planning. He has published 80+ articles across education platforms during this time, covering topics from exam strategy to international study options. Madan's approach is practice-first: his writing reflects the questions he actually gets from students and parents, not templated advice. He does not claim to cover every education topic — his focus stays on admissions, career planning, and study-abroad guidance, where his consulting experience directly applies.

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Updated on10/03/18

वर्तमान समय में सभी को पैसा कमाना है | जब भी कोई व्यवसाय शुरू करना होता है, उससे पहले हमें कई प्रकार के सोच विचार करने होते हैं | सोच-विचार आना भी स्वाभविक है, क्योकि जहां आप निवेश करते हैं, वहाँ आपको हर काम सोच समझ के ही करना होता है |

आइये आपको बताते हैं, सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाले व्यवसाय कौन से हैं -
Surgeon :-
अगर कोई डॉक्टरी की पढ़ाई करता है, और Surgeon बनता है, तो वह अपने इस क्षेत्र में अधिक पैसे कमा सकता है | इस क्षेत्र में वेतन भी अच्छा मिलता है, और साथ ही Surgeon अगर अपना प्राइवेट काम अर्थात अपना क्लिनिक भी चलाते हैं, तो भी उनकी अच्छी कमाई हो जाती है |
Psychiatrist :-
डॉक्टरी की पढ़ाई करने के बाद डॉक्टरी में ही कई ऐसी शाखा है, जिसमें अच्छा खासा पैसा कमाया जा सकता है | जैसे कि Psychiatrist में | में कई शाखाएं हैं जिसमें से एक Psychiatrist (साइकोलॉजिस्ट) अर्थात मानोचिकित्सक की शाखा है | डॉक्टरी की फील्ड में Surgeon के बाद अच्छी कमाई करने वाला यह दूसरा क्षेत्र है |
Corporate executive :-
जब भी Corporate executive किसी बड़ी और मल्टीनेशनल कंपनी के लिए काम करते हैं, तो senior Laval के Corporate executive कंपनी को फायदा दिलाने के लिए बहुत अधिक चुनौतियों और तनाव का सामना करते हैं, परन्तु इसके बदले में उन्हें मोटी वेतन भी दी जाती है |
10 Business idea ) जाने सबसे ज्यादा कमाई वाला बिजनेस कौन सा है?
क्यों वर्तमान समय में लोग सरकारी बैंक की जगह प्राइवेट बैंक पर भरोसा करने लगे हैं ? जानने के लिए नीचे link पर click करें -

K
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हिंदी लेखक

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Answered on10/06/18
ऐ ज़िन्दगी गले लगा ले

हमने भी तेरे हर एक ग़म को

गले से लगाया है

है न !

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Answered on06/27/23

जिंदगी को चार पंक्ति में समेटना थोड़ी मुश्किल है क्योंकि जिंदगी में इतने उतार और चढ़ाव आते हैं कि कुछ समझ में नहीं आता है कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए कभी जिंदगी में खुशी आती है तो कभी जिंदगी में गम आता है इस प्रकार जिंदगी में गम और खुशी का दौरा लगा रहता है लेकिन फिर भी मैं कोशिश करूंगी कि किन्हीं चार पंक्तियों में जिंदगी को कैसे समेटा जा सकता है।

कुछ इस तरह जिंदगी को 4 पंक्तियों में समेट सकते हैं जैसे कि हम आपको नीचे बताने जा रहे हैं :-

सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है फिर भी हर एक सत्य एक ही होगा।

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Krishna Patel
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Answered on11/08/18
हर कदम पर जो इम्तेहान ले वो ज़िंदगी,

हर वक़्त जो नया ग़म दे वो ज़िंदगी,

न दे जो सिर्फ जीने की उमीदें

जो मरने के लिए थोड़ी सी ज़मीन भी दे वो ज़िंदगी.............

K
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हिंदी लेखक

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Updated on12/31/25

नटवरलाल
यहाँ नटवरलाल के बारे में कुछ तथ्य हैं: -

  • नटवरलाल डॉ। राजेंद्र प्रसाद के हस्ताक्षर के लिए बहुत अच्छे थे, राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए उन्होंने तीन बार ताज-महल बेचा, उन्होंने लाल किला, राष्ट्रपति भवन और 545 सांसदों के साथ भारत की संसद को भी बेच दिया।
  • उसके पास 50 अलग-अलग उपनाम थे।
  • वह अपने गाँव के जरूरतमंद लोगों को अपनी लूट देता था। यही एकमात्र कारण है कि उनका गाँव अब भी उनके रॉबिन-हुड से प्यार करता है।
  • उसे नौ बार गिरफ्तार किया गया और हर बार वह भागने में सफल रहा। 1957 में, वह कानपुर जेल से पुलिस-अधिकारी की वर्दी चोरी करने में कामयाब रहे और बहुत लापरवाही से जेल से बाहर चले गए, यह पलायन दुनिया के सबसे प्रसिद्ध जेल ब्रेक में से एक है। 84 साल की उम्र में, उन्होंने अपनी आखिरी यात्रा नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से की और फिर कभी नहीं देखा गया।
    नटवरलाल भारत के 8 अलग-अलग राज्यों में दर्ज 100 से अधिक मामलों में सबसे वांछित अपराधी था।

उन्हें 113 से अधिक वर्षों की सजा सुनाई गई थी और मुश्किल से 20 साल की जेल हुई थी।

मौत
2009 में, उनके वकील ने अनुरोध किया कि नटवरलाल के खिलाफ लंबित 100 से अधिक आरोपों को यह दावा करते हुए छोड़ दिया जाए कि नटवरलाल की मृत्यु 25 जुलाई, 2009 को हुई थी। हालाँकि, नटवरलाल के भाई, गंगा प्रसाद श्रीवास्तव ने बाद में रांची में पहले उनका अंतिम संस्कार करने का दावा किया। इसलिए मृत्यु का वास्तविक समय और वर्ष अभी तक अनिश्चित है

A
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Answered on10/06/18
वो चार कदम हम चल न सके

वो जो चल न सके तो बैठ गए

फिर बैठे बैठे जो नींद लगी

हम नींदो में ज़िन्दगी भूल गए |

R
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Answered on12/26/18
ज़िंदगी के इम्तेहान को कोई समझ नहीं सका

वक़्त का तूफ़ान कभी थम नहीं सका

जब भी सोचा ज़िंदगी जिएंगे अब खुल के

तभी न जाने क्यों ज़िंदगी को ये सहन न हो सका........

S
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Answered on12/13/18
हर कदम पर इम्तेहान लेती है ये ज़िंदगी,

कुछ न कहो फिर भी क्यों सहती है ये ज़िंदगी,

वक़्त बेवक्त एक आहट महसूस करता है ये दिल,

न जाने किस हद तक बदलेगी ये ज़िंदगी

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Answered on12/11/18

ज़िंदगी पढ़ रही हूँ, अलग अलग तरीको से

कभी खूब सुर्खिया बटोर लेती हूँ,,

कभी गिर पड़ती हूँ धम्म से,

मै ज़िंदगी हूँ गिरती हूँ , टूटती हूँ ,संभल जाती हूँ

जैसे तैसे समझो कट हीजाती हूँ |

P
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