क्या बलात्कारी को मौत की सज़ा सुनाने पर लड़कियों की सुरक्षा में वृद्धि होगी ? - letsdiskuss
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Sneha Bhatiya

Student ( Makhan Lal Chaturvedi University ,Bhopal) | पोस्ट किया |


क्या बलात्कारी को मौत की सज़ा सुनाने पर लड़कियों की सुरक्षा में वृद्धि होगी ?


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Creative director | पोस्ट किया


नैतिक मूल्यों का अभिमान किसी बलात्कारी के अंदर वह डर पैदा नहीं कर सकता जो मौत की सज़ा कर सकती है | यह कहना सही है कि बलात्कारी कभी भी पीड़ित लड़की का दर्द नहीं समझ सकता परन्तु वह अकेला नहीं है जो यह दर्द नहीं समझता| प्रत्येक व्यक्ति जिसने इस दुर्भाग्यपूर्ण अपराध का सामना नहीं किया है ,वह इस आघात का एहसास करने में , उसे समझने में विफल है। अगर ऐसा नहीं है तो लोगों को मोमबत्ती लेकर सड़को पर निकलने की ज़रूरत नहीं होती और अपराधियों को मौत की सजा के साथ दंडित करने की अपील नहीं की जा रही होती | देश में बलात्कार की संख्या में हो रही वृद्धि को रोकने का एकमात्र समाधान अपराधी को मौत की सजा देना है। 

न्याय में हमारी धारणा सर्वोच्च न्यायालय ने बरकरार रखी जब उसने दिल्ली की एक लड़की निर्भया, जिसका 2012 में बलात्कार कर क़त्ल कर दिया गया था, के बलात्कारियों को मौत की सजा देने का फैसला सुनाया, । हमें भारत में अदालतों से इस तरह के फैसले की जरूरत है क्योंकि यहां जब महिलाओं की सुरक्षा की बात आती है तो क़ानून अविश्वसनीय साबित होते हैं। 
 यह कुछ हद तक सांत्वनादायक था जब सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की, "अपराध की क्रूर, बर्बर और शैक्षिक प्रकृति एक सभ्य समाज को नष्ट करने के लिए 'सदमे की सुनामी' ला सकती है।"

हमारे देश के ऐसे हालातों के बाद भी देश के लोगो के विचार महिलाओ के खिलाफ ही है | इससे अधिक दुखद बात यह है कि इनमें से अधिकतर लोग देश के बड़े नेता और अधिकारी हैं, जो हमारे देश को नियंत्रित करते हैं। यह इन लोगों की वजह से है कि भारत को नवीनतम Rheut reports के अनुसार महिलाओं के लिए दुनिया में सबसे असुरक्षित देश माना जाता है |

Translated by Team Letsdiskuss

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Content Writer | पोस्ट किया


आपका सवाल जितना अच्छा हैं, उससे कहीं ज्यादा सोचनीय है | बलात्कारी को मौत की सज़ा देने से लड़कियों की सुरक्षा में वृद्धि हो न हो पर ऐसे गुनाह कम जरूर हो जाएंगे | वैसे तो कोई भी गुन्हा छोटा या बड़ा नहीं होता | गुनाह सिर्फ गुनाह होता हैं, फर्क सिर्फ सज़ा में होता हैं, कौन से गुनाह की क्या सज़ा होनी चाहिए ये दोष और दोषी पर निर्भर करता हैं |


मेरा जवाब तो यही है, कि बलात्कारी हो मौत की सज़ा ही मिलनी चाहिए, क्योंकि जब तक गुन्हेगार को उसके गुन्हा की ख़तरनाक सज़ा नहीं मिलेगी तब तक उसको इस बात का एहसास कैसे होगा कि उसने जो ग़लती की हैं, वो कितनी बड़ी और कितनी ग़लत हैं | दुनिया भर में कितने अपराध होते हैं, जिनकी गिनती करना बहुत मुश्किल है, परन्तु सबसे बड़ा अपराध बलात्कार ही होता हैं |

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बलात्कार एक ऐसा गुनाह है, जिससे एक महिला के सिर्फ शरीर की ही नहीं बल्कि उसकी आत्मा की भी क्षति होती है | शरीर के ज़ख्म समय के साथ भर जाते है, परन्तु आत्मा में लगे ज़ख्म कभी नहीं भरते | इसलिए एक बलात्कारी को सिवा मौत के और कोई सज़ा नहीं मिलनी चाहिए | अगर इस अपराध की सज़ा मौत होगी, तो कोई दूसरा ऐसा अपराध करने से पहले सोचेगा, उसको मरने का डर होगा | इससे महिलाओं की सुरक्षा में वृद्धि भी होगी और ऐसे गुनाह कम भी होंगे | 


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