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Sneha Bhatiya· 8 साल पहले
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क्या बलात्कारी को मौत की सज़ा सुनाने पर लड़कियों की सुरक्षा में वृद्धि होगी ?

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ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
जवाब दिया गया12/06/22

हमारे देश मे हर रोज बलात्कार से जुडी खबर सुनने को मिलती रहती है, खास कर स्कूल, कॉलेज जाने वाली लड़कियो के साथ अक्सर बलात्कार होते रहते है।बलात्कार का सबसे बड़ा कारण है, देश के बड़े नेता, प्रधानमंत्री के लडके लड़कियो के साथ बलत्कार करते है और उन्हें कुछ दिनों के लिए जेल होती है उसके बाद पैसा खिलाकर बल्तकारी को जेल से रिहाय कर दिया जाता है जो बहुत ही गलत है लड़कियो के साथ बलत्कार करने वाले अपराधी को मौत की सज़ा मिलनी चाहिए तभी लड़कियों सुरक्षित होंगी ।

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जवाब दिया गया07/07/23

जी हाँ बिल्कुल बलात्कारी क़ो मौत की सज़ा सुनाने पर लड़कियों की सुरक्षा मे वृद्धि होंगी, क्योंकि आज के समय 5-6 वर्ष की लड़कियों के साथ भी बलत्कार हो रहे है, बहुत शर्म की बात है कि 5-6लड़कियां के साथ बलत्कार हो रहा है और हमारे देश की सरकार, पुलिस बल्तकारियो क़ो सज़ा नहीं दे रही है जिसके कारण बल्तकार के मामले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे है,ऐसे मे समय रहते पुलिस क़ो बलत्कारियो क़ो सज़ा देना चाहिए,तभी लड़कियों की सुरक्षा मे वृद्धि होगी।

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जवाब दिया गया09/06/18

आपका सवाल जितना अच्छा हैं, उससे कहीं ज्यादा सोचनीय है | बलात्कारी को मौत की सज़ा देने से लड़कियों की सुरक्षा में वृद्धि हो न हो पर ऐसे गुनाह कम जरूर हो जाएंगे | वैसे तो कोई भी गुन्हा छोटा या बड़ा नहीं होता | गुनाह सिर्फ गुनाह होता हैं, फर्क सिर्फ सज़ा में होता हैं, कौन से गुनाह की क्या सज़ा होनी चाहिए ये दोष और दोषी पर निर्भर करता हैं |


मेरा जवाब तो यही है, कि बलात्कारी हो मौत की सज़ा ही मिलनी चाहिए, क्योंकि जब तक गुन्हेगार को उसके गुन्हा की ख़तरनाक सज़ा नहीं मिलेगी तब तक उसको इस बात का एहसास कैसे होगा कि उसने जो ग़लती की हैं, वो कितनी बड़ी और कितनी ग़लत हैं | दुनिया भर में कितने अपराध होते हैं, जिनकी गिनती करना बहुत मुश्किल है, परन्तु सबसे बड़ा अपराध बलात्कार ही होता हैं |


बलात्कार एक ऐसा गुनाह है, जिससे एक महिला के सिर्फ शरीर की ही नहीं बल्कि उसकी आत्मा की भी क्षति होती है | शरीर के ज़ख्म समय के साथ भर जाते है, परन्तु आत्मा में लगे ज़ख्म कभी नहीं भरते | इसलिए एक बलात्कारी को सिवा मौत के और कोई सज़ा नहीं मिलनी चाहिए | अगर इस अपराध की सज़ा मौत होगी, तो कोई दूसरा ऐसा अपराध करने से पहले सोचेगा, उसको मरने का डर होगा | इससे महिलाओं की सुरक्षा में वृद्धि भी होगी और ऐसे गुनाह कम भी होंगे |

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अपडेट किया गया08/29/18
नैतिक मूल्यों का अभिमान किसी बलात्कारी के अंदर वह डर पैदा नहीं कर सकता जो मौत की सज़ा कर सकती है | यह कहना सही है कि बलात्कारी कभी भी पीड़ित लड़की का दर्द नहीं समझ सकता परन्तु वह अकेला नहीं है जो यह दर्द नहीं समझता| प्रत्येक व्यक्ति जिसने इस दुर्भाग्यपूर्ण अपराध का सामना नहीं किया है ,वह इस आघात का एहसास करने में , उसे समझने में विफल है। अगर ऐसा नहीं है तो लोगों को मोमबत्ती लेकर सड़को पर निकलने की ज़रूरत नहीं होती और अपराधियों को मौत की सजा के साथ दंडित करने की अपील नहीं की जा रही होती | देश में बलात्कार की संख्या में हो रही वृद्धि को रोकने का एकमात्र समाधान अपराधी को मौत की सजा देना है।

न्याय में हमारी धारणा सर्वोच्च न्यायालय ने बरकरार रखी जब उसने दिल्ली की एक लड़की निर्भया, जिसका 2012 में बलात्कार कर क़त्ल कर दिया गया था, के बलात्कारियों को मौत की सजा देने का फैसला सुनाया, । हमें भारत में अदालतों से इस तरह के फैसले की जरूरत है क्योंकि यहां जब महिलाओं की सुरक्षा की बात आती है तो क़ानून अविश्वसनीय साबित होते हैं।
यह कुछ हद तक सांत्वनादायक था जब सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की, "अपराध की क्रूर, बर्बर और शैक्षिक प्रकृति एक सभ्य समाज को नष्ट करने के लिए 'सदमे की सुनामी' ला सकती है।"

हमारे देश के ऐसे हालातों के बाद भी देश के लोगो के विचार महिलाओ के खिलाफ ही है | इससे अधिक दुखद बात यह है कि इनमें से अधिकतर लोग देश के बड़े नेता और अधिकारी हैं, जो हमारे देश को नियंत्रित करते हैं। यह इन लोगों की वजह से है कि भारत को नवीनतम Rheut reports के अनुसार महिलाओं के लिए दुनिया में सबसे असुरक्षित देश माना जाता है |

Translated by Team Letsdiskuss

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अपडेट किया गया05/28/26

फिल्मों में अक्सर देखा जाता है, जब जज किसी मुजरिम को फांसी की सजा सुनाता है तो उसके बाद वह उस निब को तोड़ देता है । ऐसा सिर्फ फिल्मों में नहीं होता बल्कि ऐसा असल ज़िंदगी में भी होता है । जब भी जज किसी मुज़रिम को फांसी की सजा सुनाता है उसके बाद वह उस पेन की निब तोड़ देता है । इसका सामान्य रीज़न यह कहा जाता है कि उस पेन से अब दोबारा कोई और फैसला नहीं हो सकता और दूसरा कि जिस सजा के लिए मुजरिम को फांसी की सजा मिल रही है ऐसा जुर्म फिर दोबारा न हो । इस आशा के साथ पेन की निब तोड़ दी जाती है, परन्तु इसके लिए यह कहना भी गलत नहीं होगा कि जिस पेन ने किसी की ज़िंदगी का फैसला कर दिया जज उस पेन के जीवन को भी वहीं ख़त्म कर देता है ।

वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऐसा सिर्फ भारत में ही होता है कि फांसी की सजा के बाद पेन की निब तोड़ दी जाए क्योंकि भारत में फांसी एक ऐसी सजा होती है जो सबसे बड़ी होती है । भारत में किसी बहुत बड़े अपराध के लिए ही फांसी की सजा सुनाई जाती है, और अगर एक बार सुप्रीम कोर्ट के जज ने फांसी की सजा सुनकर पेन तोड़ दिया तो उसके बाद वो खुद भी अपना फैसला नहीं बदल सकते । पेन तोड़ने का जज का मतलब ही इस बात से होता है कि उनके द्वारा किया गया फैसला अब अटल है, उस फैसले को वो खुद भी नहीं बदल सकते इसलिए वह उस पेन को ही तोड़ देते हैं ताकि दोबारा उस अपराध की सजा के फैसले के लिए कोई गुंजाईश न रहे । इसके लिए अपराधी दोबारा कोर्ट में अर्ज़ी नहीं लगा सकते , अगर कोई मुज़रिम फिर भी अर्जी लगाना चाहता है तो वह सीधा देश के राष्ट्रपति के पास अपनी एक याचिका भेज सकता है ।

फांसी का फंदा एक विशेष जगह से ही मंगवाया जाता है,। फांसी का फंदा बिहार के बक्सर जिले के कुछ कैदियों द्वारा बनवाया जाता है, और यह मनिला रस्सी से बनता है । फांसी के वक़्त जल्लाद मुजरिम से गले में फांसी का फंदा डालकर मुजरिम के कान में कहता है कि "मुझे माफ़ कर दो, मैं हुक्म का गुलाम हूँ ,मेरा बस चलता तो मैं आपको जीवन देकर सत्य के मार्ग पर चलाता " ऐसा कह कर जल्लाद मुज़रिम के सिर पर काले रंग का कपड़ा डालकर उसके गले में फांसी का फंदा लगा देता है । इसके बाद जल्लाद अपना काम करता है , जिसके कारण मुज़रिम को फांसी लग जाती है ।

Ramesh Kumar
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जवाब दिया गया01/27/23

आज आपने यहां पर जो सवाल किया बहुत ही अच्छा सवाल है कि क्या लड़कियों के साथ बलात्कार करने वाले को फांसी की सजा देने के बाद लड़कियां अधिक सुरक्षित हो जाएंगी तो मैं आपको बताना चाहती हूं कि हमारे भारत देश में सबसे अधिक बलात्कार किये जाते हैं और वह बलात्कारी कोई और नहीं होते बल्कि हमारे देश के नेता लोगों के ही बेटे होते हैं क्योंकि इनके बेटे लोग लड़कियों का बलात्कार करके कुछ दिनों के लिए जेल चले जाते हैं और फिर रिश्वत खिलाकर उन्हें जेल से छुड़वा लिया जाता है इसलिए मेरी सरकार से निवेदन है कि जो लोग लड़कियों का बलात्कार करते हैं उन्हें फांसी की सजा दी जाए तभी हमारे देश की लड़कियां सुरक्षित रहेंगी।लेख की तस्वीर

Krishna Patel
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