पिठोरिया की 19 वर्षीय युवती ऋचा भर्ती पर आपसी सौहार्द्र बिगाडनेके आरोप में अंजुमन कमेटी के मंसूर खलीफा ने 12 जुलाई को पुलिस में शिकायत की थी जिसके चलते इस युवती को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। कोर्ट ने जमानत देने के लिए इस युवती को एक मदरसे और चार अन्य संस्थानों में कुरान का दान करने की सजा दी है।
सौजन्य: एच डबल्यू न्यूज़
वैसे यह सजा तो उसने कुबूल कर ली पर साथ में ऐसा सवाल भी किया है की क्या हिन्दुओ की भावना को ठेस पहुंचाने वाले किसी और को न्यायालय ने मंदिर जाने की या हनुमान चालीसा बांटने की सजा दी है। वैसे ऋचा ने यह भी कहा है की अभी तक उसे इस आर्डर की लिखित कॉपी नहीं मिली और ऐसा आदेश मिलने के बाद वो कॉपी बांटेगी।
कभी कभी ऐसा लगता है की न्यायालय भी किसी एक समुदाय को ही ध्यान में रखकर फैसला सुनाते है। अगर सवर्ण दलित का मसला हो तो दलित छूट जाएगा पर सवर्ण फंस जाएगा, हिन्दू मुसलमान का मसला हो तो हिन्दू फंसेगा और मुस्लिम समुदाय का शख्श आराम से छूट जाएगा। एक बार फिर से न्यायालय पर सवाल उठने शुरू हो गये है और यह देश के हित में बिलकुल नहीं है।
